विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही दिल में बाड़ू तुहीं, बात दिल के हम कही। (vidaee kaise karen, judaee kaise sahee dil mein badala tuhen, baat dil ke ham hai)
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही
दिल में बाड़ू तुहीं, बात दिल के हम कही।
निमिया के छांव में, नौ दिन रहनी
हमरा गाँव में, कह तु कैसे सहनी।
बाबू जी के आंख से, लोर बहत बा।
माई के कलेजा, तू तोड़त जात बा।
चली पायलिया के छनछन, रोवत जात बाड़ी।
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही।
भइया के गोदी में, खेलत रहनी।
बहिना के संग संग, बचपन बितवनी।
आज के दिनवा, दिल के तोड़त बा।
भौजी के मांग से, सिंदूर छूटत बा।
कहवां जइबू ए रानी, पिया के संग बाड़ी।
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही।
सखिया के संग संग, बगिया में खेलनी।
चुनरिया के कोरा में, सपना सहेजनी।
आज के दिनवा, सपना टूटत बा।
अंगना के माटी से, नाता छूटत बा।
चली साजन के डोली, सपनवा सजत बाड़ी।
विदाई कैसे करी, जुदाई कैसे सही।
यह गीत एक विदाई के समय की भावनाओं और संघर्ष को दर्शाता है। गीत में परिवार के सभी सदस्यों के साथ जुड़े भावनात्मक रिश्तों का वर्णन किया गया है।