hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

संतों का संग, हरि का रंग (santon ka sang, hari ka rang lyrics in hindi)

संतों का संग, हरि का रंग भजन के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। साधु-संतों की महिमा और हरि भक्ति से सराबोर इस सुंदर भजन का भावार्थ और महत्व जानें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 संतों का संग, हरि का रंग (santon ka sang, hari ka rang lyrics in hindi)

(राग: भक्ति रस)

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

साधु-संतों की महिमा अपरंपार,

हर दिल में बस जाए प्रेम का संसार।

संतों का संग, हरि का रंग।

संतों के संग में बसी है शांति,

हर मन में हो प्रेम की नित्य भांति।

सच्चाई की राह पर चलें,

हर दिल में भक्ति का दीप जलें।

ध्यान और ध्यान से मन हो निर्मल,

संतों के संग से हो जीवन उज्जवल।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

संतों की बातें दिल को छू जाएं,

सत्य के पथ पर कदम बढ़ाए।

धर्म और प्रेम की सिखाए राह,

हर मन को मिले जीवन का आशीर्वाद।

जो भी संतों का संग करे,

हर पाप से मुक्त हो जाए।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

संतों का संग है अमृत समान,

जो इसे पाता, वह हो जाए महान।

हर दिल में बस जाए हरि का नाम,

हर कर्म में दिखे प्रेम का धाम।

साधु-संतों के चरणों में बसा,

हर जीवन हो जाए सुखमय और सजा।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

संतों का संग करे जीवन पवित्र,

हर पल हरि का ध्यान हो अद्भुत।

संतों की महिमा अपरंपार,

हर मन में हो हरि का प्यार।

जो संतों के संग में खो जाए,

उसका जीवन हर दिशा में रोशन हो जाए।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

संतों का संग है सबसे प्यारा,

उनके साथ जीवन हो जाता उजियारा।

हर शब्द, हर वाक्य में प्रेम हो,

सभी में हरि का आशीर्वाद हो।

संतों के संग से भक्ति मिलती,

हर आत्मा को शांति मिलती।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

आओ मिलकर संतों की महिमा गाएं,

हर दिल में हरि का नाम लगाएं।

संतों के संग से जीवन हो सार्थक,

हर कर्म में हो प्रेम और धर्म का प्रकाश।

संतों का संग, हरि का रंग,

सच्चे प्रेम का यह है अंग।

यह गीत संतों के संग की महिमा और उनके द्वारा दी गई भक्ति और प्रेम की शक्ति को दर्शाता है। इसे गाते हुए हर दिल में शांति, प्रेम और हरि के प्रति आस्था का अनुभव होता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "संतों का संग, हरि का रंग (santon ka sang, hari ka rang lyrics in hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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