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राम मेरे घर का किराया सारा भर दो लिरिक्स (Ram Mere Ghar Ka Kiraya Lyrics in Hindi) - Shri Ram Bhajan Gyanendra Sharma - Bhaktilok

229 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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राम मेरे घर का किराया सारा भर दो लिरिक्स - परिचय एवं पृष्ठभूमि

श्री राम भजन "राम मेरे घर का किराया सारा भर दो" आधुनिक समय में अत्यंत लोकप्रिय हुआ एक ऐसा भावुक और अनूठा भक्ति गीत है, जिसमें एक भक्त अपनी गृहस्थी की साधारण सी समस्याओं और आर्थिक विवशताओं को अत्यंत सहजता और अपनेपन के साथ भगवान श्री राम के समक्ष प्रस्तुत करता है। ज्ञानेंद्र शर्मा जी की मधुर वाणी में गाया गया यह भजन सनातन धर्म के शरणागति सिद्धांत का एक बहुत ही सुंदर और व्यावहारिक उदाहरण है। इस भजन में 'किराया भरने' का प्रतीक वस्तुतः जीवन के समस्त बोझ, चिंताओं और संसार के बंधनों से मुक्ति पाकर पूर्ण रूप से भगवान की शरण में जाने की भावना को व्यक्त करता है। जब मनुष्य सांसारिक दुखों, महंगाई और जीवन की आपाधापी से थक जाता है, तब वह अपने आराध्य श्री राम को ही अपना एकमात्र आश्रयदाता मानता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि एक भक्त की अपने इष्ट के साथ अत्यंत अंतरंग और आत्मीय बातचीत है, जो श्रोताओं के हृदय को द्रवित कर देती है और उन्हें भगवान की करुणा का अनुभव कराती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री राम भजन: राम मेरे घर का किराया सारा भर दो

राम मेरे घर का किराया सारा भर दो,
आके मेरे संकटों को पल में हर लो।
दर-दर भटक रहा हूँ मैं संसार की ठोकर खाकर,
अब तो अपनी शरण में मुझको तुम ले लो॥

मकान मालिक भी रोज तकादा करने आता है,
माया का यह बाजार मुझे बहुत सताता है।
हे रघुनंदन! हे कृपासिंधु! अब धीरज टूट रहा है,
अपनों का साथ यहाँ हर पल मुझसे छूट रहा है॥

सुना है मैंने राम, तुम गरीबों के सहारे हो,
डूबती हुई नैया के तुम ही तो किनारे हो।
मेरे इस छोटे से घर में तुम भी वास करो आकर,
जीवन की सारी बाधाओं का अंत करो आकर॥

ज्ञानेंद्र कहे चरणों में तेरे शीश झुकाता हूँ,
बस तेरा ही नाम मैं सुबह-शाम गाता हूँ।
अब तो संभाल लो राम मेरे इस कच्चे आशियाने को,
पूर्ण करो प्रभु मेरे मन के हर एक पुराने को॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन शरणागति और विनय का एक अत्यंत सुंदर रूप है। भजन के पहले पद में भक्त भगवान श्री राम से प्रार्थना करता है कि हे प्रभु! मेरे जीवन रूपी घर का सारा किराया (अर्थात मेरे कर्मों का भार और संसार के कष्ट) आप ही भर दीजिए और मेरे सभी संकटों को दूर कर दीजिए। संसार में भटकते-भटकते जब मनुष्य थक जाता है, तब उसे भगवान के चरणों के अलावा कहीं शांति नहीं मिलती।

दूसरे पद में भक्त ने सांसारिक यथार्थ का बहुत ही सुंदर चित्रण किया है। 'मकान मालिक का तकादा' वस्तुतः काल, कर्म और संसार के दबाव का प्रतीक है, जो मनुष्य को निरंतर भयभीत और चिंतित रखता है। माया के इस प्रपंच में फंसकर जब भक्त का धीरज टूटने लगता है और उसे अपने सगे-संबंधियों से भी निराशा हाथ लगती है, तब वह केवल मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को ही अपना अंतिम और एकमात्र सहारा मानता है।

तीसरे और अंतिम चरणों में भक्त श्री राम की अतुल्नीय कृपा और उनके दीन-दयालु स्वभाव का स्मरण करता है। वह जानता है कि भगवान राम ने हमेशा शबरी, केवट और अहिल्या जैसे दीन-दुखियों का उद्धार किया है। वह भगवान से अपने छोटे से हृदय रूपी घर में वास करने का अनुरोध करता है, जिससे उसका जीवन धन्य हो जाए और उसकी सभी बाधाएं समाप्त हो जाएं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और आम जनजीवन से इसकी निकटता है। गंभीर दार्शनिक शब्दों के स्थान पर इसमें रोजमर्रा के जीवन के शब्दों का प्रयोग किया गया है, जो सीधे श्रोता के दिल को छू लेते हैं।

  • व्यावहारिक भक्ति का दर्शन: यह भजन सिखाता है कि भगवान से केवल बड़े वरदान ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की परेशानियों को साझा किया जा सकता है।
  • शरणागति भाव: इसमें तुलसीदास जी के रामचरितमानस के उस मूल सिद्धांत की झलक मिलती है, जहाँ भगवान अपने शरणागत भक्त की रक्षा करने के लिए स्वयं उत्तरदायी हो जाते हैं।
  • मानसिक शांति: इस भजन को सुनने या गाने से मन का तनाव कम होता है और भगवान के प्रति अटूट विश्वास पैदा होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु इसकी प्रभावशीलता तब और बढ़ जाती है जब मनुष्य मानसिक रूप से अशांत हो या जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना कर रहा हो।

  • ब्रह्म मुहूर्त या संध्याकाल: सुबह पूजा के समय या शाम को दीपक प्रज्वलित करते समय इस भजन का स्मरण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • सत्संग और रामायण पाठ: धार्मिक अनुष्ठानों, सुंदरकांड पाठ या श्री राम कथा के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
  • एकांत साधना: जब मन विचलित हो, तब शांत कमरे में बैठकर इस भजन के शब्दों पर ध्यान केंद्रित करने से असीम मानसिक शांति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम हैं, जिन्हें सनातन संस्कृति में करुणा, मर्यादा, धर्म और पालनहार का प्रतीक माना जाता है। वाल्मीकि रामायण और तुलसीकृत रामचरितमानस में भगवान राम के चरित्र का जो वर्णन मिलता है, वह दीन-दुखियों के तारणहार के रूप में है। इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाले गायक ज्ञानेंद्र शर्मा जी ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से इसे और अधिक जीवंत बना दिया है। उनके द्वारा गाए गए ऐसे भजन लोगों को श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ की तरह नियमित रूप से स्मरण करने की प्रेरणा देते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन समकालीन भक्ति संगीत की परंपरा का हिस्सा है, जिसे आज के युग के भक्तों की संवेदनाओं को ध्यान में रखकर रचा गया है। आधुनिक दौर में आर्थिक दबाव, महानगरों का जीवन और किराए के मकानों की समस्या से जूझते मध्यमवर्गीय समाज की पीड़ा को इस भजन में बहुत ही खूबसूरती से भक्ति के साथ जोड़ा गया है। रचनाकार ने सांसारिक समस्याओं को ही भक्ति का माध्यम बना दिया है, जिससे हर वह व्यक्ति जो जीवन संघर्षों से जूझ रहा है, इस भजन से तुरंत जुड़ाव महसूस करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के संस्कारों की हल्की सी मिठास भी मिलती है। इसमें रूपक अलंकार का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है—जहाँ सांसारिक चिंताओं को 'किराया' और जीवन की कठिन परिस्थितियों को 'मकान मालिक का तकादा' कहा गया है। यह सरल काव्य शैली बिना किसी कठिन शब्दार्थ के सीधे श्रोता के अंतःकरण में उतर जाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान से कभी भी औपचारिकता नहीं रखनी चाहिए। जिस प्रकार एक छोटा बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी समस्या के लिए अपने पिता के पास दौड़ता है, उसी प्रकार भक्त को भी अपने हर सुख-दुख को भगवान के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। यह जीवन सीख देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए और कभी भी अपना धैर्य नहीं खोना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
किराया मकान का शुल्क संसार में रहने के एवज में हमारे कर्मों का भार
कृपासिंधु दया के सागर भगवान श्री राम का करुणामय स्वरूप
तकादा बार-बार मांगना या दबाव डालना समय और कर्मों का निरंतर बढ़ता दबाव
शरणागति पूर्ण समर्पण अपने अहंकार को त्यागकर भगवान की शरण में जाना

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"राम मेरे घर का किराया सारा भर do..." - इस पंक्ति में भक्त अत्यंत विनय भाव से भगवान से अपने जीवन के सभी भारों को अपने हाथों में लेने की विनती करता है।

"मकान मालिक भी रोज तकादा करने आता है..." - यहाँ मकान मालिक काल और दुनिया का प्रतीक है, जो मनुष्य को हर पल उसकी सीमाओं और कमियों का अहसास कराता है।

"सुना है मैंने राम, तुम गरीबों के सहारे हो..." - यह पंक्ति भगवान के उस वादे की याद दिलाती है, जिसके तहत वे हमेशा असहायों और शरणागतों की रक्षा करते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को और अधिक दृढ़ करने के लिए निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना चाहिए:

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् l लोकाभिरामं श्री रामं भूयो भूयो नमाम्यहम ् ll

अर्थ: जो समस्त आपदाओं को हरने वाले हैं, सभी संपत्तियाँ प्रदान करने वाले हैं और जो समस्त संसार को प्रिय हैं, उन श्री राम को मैं बार-बार प्रणाम करता हूँ।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम राम मेरे घर का किराया सारा भर दो (Ram Mere Ghar Ka Kiraya Lyrics)
समर्पित देवता मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
गायक / कलाकार ज्ञानेंद्र शर्मा
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-प्रभावित खड़ी बोली
मुख्य भाव शरणागति, विनय, प्रेम और समर्पण
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, मानसिक अशांति या संकट के समय

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय भजन प्रसिद्ध गायक ज्ञानेंद्र शर्मा जी की मधुर आवाज में गाया गया है, जिसे श्रोता बहुत पसंद करते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश पूर्ण शरणागति है। यह सिखाता है कि हमें अपनी सभी चिंताएं और परेशानियां भगवान श्री राम के चरणों में समर्पित कर देनी चाहिए।

हाँ, इस भजन को सुबह या शाम की पूजा के समय या मन की शांति के लिए किसी भी समय आसानी से गाया जा सकता है।

भजन में 'किराया' शब्द प्रतीकात्मक रूप से जीवन के आर्थिक संघर्षों, चिंताओं और सांसारिक बंधनों को दर्शाता है।

श्री राम के अन्य लोकप्रिय भजनों में 'श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन', 'मंगल भवन अमंगल हारी' और श्री हनुमान चालीसा प्रमुख हैं।

हाँ, जब व्यक्ति आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है, तब इस भजन का श्रवण और गायन बहुत संबल प्रदान करता है।

इसे गाने से अंतःकरण में सकारात्मक ऊर्जा, आस्था और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास की जागृति होती है।

हाँ, भक्तों की सुविधा के लिए यह भजन देवनागरी (हिंदी) लिपि में संपूर्ण अर्थ और भावार्थ के साथ यहाँ उपलब्ध कराया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका और भजन विवरण भक्तों की आध्यात्मिक संतुष्टि और प्रामाणिक जानकारी को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सनातन भक्ति परंपरा और आधुनिक संवेदनाओं का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जो पाठकों के मन में भगवान श्री राम के प्रति प्रेम और विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करती है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • वाल्मीकि रामायण - गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशन
  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास
  • पारंपरिक लोक भक्ति संगीत एवं भजन परंपरा
  • सनातन धर्म के शरणागति और भक्ति सिद्धांत ग्रंथ

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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