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गणेश जी की सम्पूर्ण कथा लिरिक्स (Ganesh Ji ki Katha Lyrics in Hindi) - Ganesh Katha - Bhaktilok

 

गणेश जी की सम्पूर्ण कथा लिरिक्स (Ganesh Ji ki Katha Lyrics in Hindi) - 

गणेश जी की कथा के अनुसार, वे हिन्दू धर्म के प्रमुख देवता माने जाते हैं। गणेश जी का जन्म कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। गणेश जी के माता-पिता हैं भगवान शिव और माता पार्वती।


कथा के अनुसार, एक दिन माता पार्वती ने अपने शरीर से गणेश की मूर्ति बनाई और उसे जीवन दी। उसके बाद उन्होंने उसे कहा कि वह बाहर के लोगों से न करने दे, जब तक कोई उनके स्वागत के लिए द्वार पर नहीं आता।


एक दिन, शिव जी की प्रवृत्ति के समय गणेश ने शिव जी की माता पार्वती को रोका कि उनके अंतर्द्वार में कोई अज्ञात व्यक्ति नहीं जा सकता है। शिव जी ने उसे पहचाना नहीं और उसे भद्र कहा। गणेश ने उन्हें रुकने के लिए कहा, जिससे उन्हें क्रोध आया। उन्होंने अपनी त्रिशूल से गणेश की सिर को काट दिया।


माता पार्वती ने यह देखा और उन्होंने अपने पति की आत्मा को स्वच्छ करने का आदेश दिया। वे अपने भेदों में श्लोक ने कहा कि जो भेद नहीं होगा, वह अपने मान-सम्मान की गारंटी कहा है। फिर उन्होंने गणेश के सिर को हाथी के सिर के साथ बदल दिया।


इसके बाद, गणेश ने ब्रह्मा, विष्णु और शिव को अपने शीर्षक पार्वती के शीर्षक के रूप में मान्यता दी और उन्हें अपने पूजा में सर्वोच्च मान्यता दी। इसलिए गणेश को विघ्नहर्ता और विद्यार्थीके देवता के रूप में पूजा जाता है।


गणेश जी की कथा हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखती है। वे प्रथम देवता हैं जिन्हें पूजा जाता है। गणेश जी की कथा कई पुराणों और ग्रंथों में मिलती है, लेकिन मुख्यतः दो कथाएं प्रसिद्ध हैं:


1. प्रलय के समय ब्रह्मा का पुत्र:

कहा जाता है कि जब ब्रह्मा ने सृष्टि का कार्य शुरू किया तो उन्होंने पहले विष्णु और शिव को बनाया। फिर उन्होंने एक सूर्यकिरण से अपनी पत्नी के शरीर को तथा अपने आप से उत्पन्न उसके गर्भ को पानी से पूरा किया। इस प्रकार उनका बेटा गणेश उत्पन्न हुआ।


2. पार्वती द्वारा संथान:

एक बार पार्वती माता को स्नान के लिए गंगा नदी में जाना था। उन्होंने निर्मल और पुरानी सुरक्षा वस्त्र पहने थे। वहां पहुंचकर उन्होंने अपने जल से नहाया, और फिर वह अपने शरीर के मिट्टी का गोला बनाते हुए उसे अपने संग रख दिया। इसके बाद उन्होंने उस गोले को प्राण देकर जीवित कर दिया। ऐसे ही, उनकी संतान, गणेश, का जन्म हुआ।

गणेश जी की कथा में उनके विविध लीलाएं और कार्यों का वर्णन होता है, जो उन्हें अत्यंत प्रिय और पूज्य बनाता है। वे विद्या, बुद्धि, समृद्धि, और सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं।

गणेश जी की कथा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। उनकी कथा कई विभिन्न पुराणों और ग्रंथों में मिलती है, लेकिन मुख्यत: "शिव पुराण" और "गणेश पुराण" में वर्णित है। यहां मैं गणेश जी की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का संक्षेप में वर्णन करता हूँ:


गणेश जी का जन्म:- गणेश जी का जन्म माता पार्वती के द्वार पर हुआ था। एक दिन पार्वती ने स्नान के बाद अपनी शरीर से निकली कोमल मिटटी का मूर्ति बनाई और उसे जीवित कर दिया। इस मूर्ति को गणेश कहा गया।


गणेश का विवाह:- एक बार देवी पार्वती ने अपने पुत्र से कहा कि जो भी पहले उनके घर में घूमकर वापस आएगा, उसे वह अपनी पत्नी बनाएगी। गणेश जी ने वाहन के रूप में मूषक (चूहा) को चुना, और इस बात को लेकर श्रीकृष्ण और लक्ष्मी जी के बीच एक प्रसिद्ध युद्ध हुआ। अंतत: गणेश जी की विवाह भवानी जी (पार्वती) से हुई।


गणेश का वाहन:- गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) है, जो बुद्धिमानता का प्रतीक है। चूहा अपनी चाल में बड़ा ही धीरे और चतुर धारण करता है, जिससे गणेश की बुद्धि को दर्शाता है।


गणेश चतुर्थी:- गणेश चतुर्थी हिन्दू धर्म में बड़ा ही महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसमें गणेश जी की पूजा-अर्चना की जाती है। यह त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में उत्सव के रूप में मनाया जाता है।


यह केवल कुछ कथाएं हैं, जो गणेश जी की महिमा और महत्व को दर्शाती हैं। उनके अनेक प्रसिद्ध लीलाएं और कथाएं हैं, जो उनके भक्तों को प्रेरित करती हैं।


गणेश जी की कथा हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण और प्रिय देवता गणेश के जन्म और कई रोचक कथाओं से भरी हुई है। यहाँ मैं गणेश जी की प्रमुख कथाओं में से कुछ बताता हूँ:


पार्वती की उत्पत्ति (शिव पुराण):- पार्वती ने अपनी इच्छा से गणेश को जन्म दिया। उनका रूप इतना मनोहारी था कि शिव जी को भी उनपर मोह हो गया।


गणेश की कुंडलिनी जागरण (मार्कंडेय पुराण): एक कथा के अनुसार, गणेश को पर्वती माता ने सृष्टि के अधिपति बनाने की इच्छा की थी। शिव जी ने गणेश के शिर को काट दिया था, जिससे उनकी कुंडलिनी शक्ति जाग्रत हुई और वे जगदगुरु बने।


लक्ष्मी-गणेश विवाह (लिंग पुराण):- एक दिन, देवी लक्ष्मी को देखकर गणेश ने उनसे विवाह करने की इच्छा जताई। लक्ष्मी माता ने गणेश की बहादुरी को देखकर उनके साथ विवाह करने का निर्णय किया।


विघ्नहर्ता (विश्वकर्म पुराण):- गणेश को विघ्नहर्ता भी कहा जाता है, क्योंकि वे शुभ कार्यों में अधिक आ रहे बाधाओं को दूर करते हैं।


कार्तिकेय के मुख्यांश (पद्म पुराण): गणेश के चार मुख का कारण कई कथाओं में विविध रूपों में व्याख्या किया गया है, एक कथा के अनुसार उन्होंने उस समय चार मुख पाए जब उनके माता पार्वती ने उन्हें सौंदर्य की प्राप्ति के लिए विधि की थी।


गणेश की कथाएँ भक्तों के बीच अत्यंत प्रिय हैं और उनकी उपासना और पूजा में उन्हें उनके बलिदान, विवाह और परिवार से संबंधित सिद्धांतों का उदाहरण माना जाता है।



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