भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दगा किसी का सगा नहीं है ना मानो तो कर देखो (Daga Kisi ka Saga Nahi Hai Lyrics in Hindi) - by Chetawani Nirankari Bhajan

भजन 'दगा किसी का सगा नहीं है' में ईमानदारी का संदेश है। धोखे का नकारात्मक परिणाम जानें और सच्चाई की ओर बढ़ें।

प्रस्तावना एवं परिचय

भक्ति का संदेश: दगा किसी का सगा नहीं है

इस भजन का स्मरण करें और सच्चे कर्म की ओर मार्गदर्शन प्राप्त करें।

दगा किसी का सगा नहीं है ना मानो तो कर देखो (Daga Kisi ka Saga Nahi Hai Lyrics in Hindi) -तर्ज - भला किसी का कर ना सको।दगा किसी का सगा नहीं है,किया नहीं तो कर देखो,जिसने जिसने दगा किया है,उसका जा के घर देखो,दगा किसी का सगा नही है,किया नहीं तो कर देखो।।दगा किया था रावण ने जब,साधू भेष बनाया था,भिक्षा लेने गया था लेकिन,सिता ही हर लाया था,लंका नगरी राख बनाई,पल भर में रघुवर देखो,जिसने जिसने दगा किया है,उसका जा के घर देखो,दगा किसी का सगा नही है,किया नहीं तो कर देखो।।कौरव पांडव जुआ खेले,शकुनी पासे फेंक रहा,दुर्योधन की दगागिरी को,वो नटनागर देख रहा,बिना शत्रु के वंश मिटाई,लीला नटवर की देखो,जिसने जिसने दगा किया है,उसका जा के घर देखो,दगा किसी का सगा नही है,किया नहीं तो कर देखो।।किसी को धोखा देकर प्यारे,एक बार खुश हो जाना,कर्म की अग्नि में जलके,जीवन भर तुम पछताना,सच्चा सुख पाने की खातिर,भला किसी का कर देखो,जिसने जिसने दगा किया है,उसका जा के घर देखो,दगा किसी का सगा नहीं है,किया नहीं तो कर देखो।।दगा किसी का सगा नहीं है,किया नहीं तो कर देखो,जिसने जिसने दगा किया है,उसका जा के घर देखो,दगा किसी का सगा नही है,किया नहीं तो कर देखो।।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

दगा किसी का सगा नहीं है, यह भजन जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का महत्व रेखांकित करता है। इस भजन में विशेष रूप से रावण और दुर्योधन की कहानियों के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि धोखाधड़ी और दगा का परिणाम हमेशा नकारात्मक होता है। रावण ने साधू भेष में आने के बाद सीता का हरण किया था, जिससे उसे अपनी लंका नगरी की राख में तब्दील होना पड़ा। इसी तरह, महाभारत में दुर्योधन ने जुआ खेलकर अपने वंश का नाश किया। भजन में संदेश है कि किसी को धोखा देकर मिली खुशी क्षणिक है और इसका दीर्घकालिक परिणाम जीवनभर पछतावा होता है। यह दृष्टिकोण भक्तों को यह सिखाता है कि अल्पकालिक लाभ के लिए कहीं भी विश्वासघात नहीं करना चाहिए।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन हमें आत्म-परख करने के लिए प्रेरित करता है। यह केवल दूसरों से धोखा न करने का संदेश नहीं है, बल्कि खुद के लिए सच्चे और निष्कलंक कर्म करने की आवश्यकता को भी दर्शाता है। 'कर्म की अग्नि में जलके जीवन भर तुम पछताना' यह पंक्ति जीवन की वास्तविकता को स्पष्ट करती है। यदि हम एक बार किसी को ठगी या धोखा देते हैं, तो जीवनभर पछताने के लिए हम विवश हो जाएंगे। इसलिए यह संदेश अपनी आत्मा के प्रति सच्चा रहने का है ताकि हम अपने कर्मों का पछतावा न करें और समाज में एक सकारात्मक छवि बनाए रखें।

धर्म और भक्ति के सन्दर्भ में, यह भजन हमें सचाई और ईमानदारी की ओर प्रेरित करता है। यह हमें बताता है कि सच्चे भक्ति मार्ग की शुरुआत सत्य से होती है। भक्ति का मार्ग उस समय ही सार्थक है जब हम सच्चाई के मार्ग पर चलें। हमारे कर्म, विचार और आचरण में सच्चाई होना आवश्यक है। जो व्यक्ति ईमानदार होते हैं, उन्हें भक्ति के मार्ग पर चलने में अधिक सहायता मिलती है। इस प्रकार, यह भजन भक्तों को अपने आचार-विचार में परिवर्तन लाने और दगा व धोखे से दूर रहने का मार्गदर्शन करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिन्दू धर्म के पौराणिक ग्रंथों में निहित है, जैसे रामायण और महाभारत। रामायण में रावण का धोखा और उसकी सजाओं का उल्लेख है जो उन्हें उनके दगों के कारण मिली। महाभारत में, शकुनी और दुर्योधन की कहानियाँ हैं जो दर्शाती हैं कि कैसे दगा और धोखा व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन पर विपरीत प्रभाव डालते हैं। इसलिए यह भजन भक्तों को सही और सत्य मार्ग का पालन करने की प्रेरणा देता है। यह हमें यह भी याद दिलाता है कि केवल आज का प्रायश्चित करने से वास्तविकता नहीं बदलती, बल्कि हमें हमारे कर्मों के प्रति ज़िम्मेदार रहना चाहिए।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप mental clarity और आत्मिक शांति के लिए लाभकारी है। जब भक्त इसे नियमित रूप से गाते हैं, तो उनके अंदर सच्चाई और ईमानदारी का जज्बा बढ़ता है। यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और जीवन में आने वाली विपत्तियों को दूर करने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह भजन भक्ति और प्रार्थना के माध्यम से जीवन में मंत्रमुग्धता लाने का कार्य करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप प्रातः या संध्या समय में किया जा सकता है, जब मन शांत और ध्यान केंद्रित करने के लिए तत्पर हो। पूजा करते समय एक दीया जलाएं और अपने समक्ष स्वच्छ वस्त्र पहनकर बैठें। भजन का जप करते समय ध्यान करें कि आपके मन में सच्चाई और ईमानदारी का भाव हो। इस समय प्रभु से सच्चे कर्मों के लिए प्रार्थना करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि धोखा और दगा का परिणाम हमेशा नकारात्मक होता है और हमें सच्चाई के मार्ग पर चलना चाहिए।

किस पौराणिक कथा का उल्लेख इस भजन में है?

भजन में रावण का सीता का हरण करना और दुर्योधन के जुआ खेलने के किस्से का उल्लेख है, जो धोखे के परिणामों को दर्शाते हैं।

इस भजन के गाने के समय कौन-सी भावनाएं रखनी चाहिए?

इस भजन का जप करते समय भावनाएँ सद्भाव, सत्य और ईमानदारी की होनी चाहिए, ताकि हमारे कर्मों में सकारात्मकता बनी रहे।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!