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Holi Bhajan

श्यामा भर दे गगरिया हमारी लिरिक्स (Shyama Bhar De Gagariya Hamari Lyrics in Hindi) - Holi Bhajan - Bhaktilok

99 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्याम संगीनी की गागर भरने की प्रार्थना

यह भजन श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं और भक्ति की शुद्धता का प्रतीक है।

 श्यामा भर दे गगरिया हमारी लिरिक्स (Shyama Bhar De Gagariya Hamari Lyrics in Hindi) -श्यामा भर दे गगरिया हमारीकहत ब्रज नारी ||श्यामा भर देगगरिया हमारीकहत ब्रज नारीश्यामा भर दे भर दे – 2श्यामा भर दे गगरिया हमारी कहत ब्रज नारी ||अरे हमसे चढ़ा जात नही मोहनगंगा उंच अटारीपाँव धरत जियरा मेरो डरपतदूजे पाँव में पायल भारी कहत ब्रिज नारी ||अरे गागर भरे करे रस बातेंमदन रात अंधियारी कहत बृज नारी ||भर के गागर धरत उर ऊपरमोरे आँचल छुअत बिहारी कहत ब्रजनारी ||अरे तू त छोरा नंदलाल बाबा केमैं वृषभान दुलारीकहे छुअत बदन हमारी कहत ब्रिजनारी ||काहे छुअत छुअत – 2काहे – छुअतबदन हमारी कहत ब्रिजनारी ||श्यामा भर दे गगरिया हमारीकहत ब्रज नारी ||श्यामा भर दे गगरिया हमारीकहत ब्रज नारीश्यामा भर दे भर दे – 2श्यामा भर दे गगरिया हमारी कहत ब्रज नारी ||*** Singer - Manisha Rawat ***

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह गीत विशेष रूप से श्री कृष्ण की आराधना में गाया जाता है, जहाँ भक्त ब्रज की नारियों की वाणी में गागर भरने की प्रार्थना कर रही हैं। 'श्यामा भर दे गगरिया हमारी' वाक्यांश से भक्त की इच्छा स्प्ष्ट होती है कि वे श्री कृष्ण के प्रेम और भक्ति में इस गागर को भरे। इस गागर को आध्यात्मिक प्रेम का प्रतीक माना जा सकता है, जिसे ब्रज की गोपियाँ मिठास से भरना चाहती हैं। यहाँ 'कहत ब्रज नारी' से संकेत है कि यह भजन एक सामूहिक आह्वान है, जिसमें गोपियाँ अपने मन के भावों को कृष्ण को समर्पित कर रही हैं। यह गागर भरने की प्रक्रिया एक संवाद है, जहाँ भक्त अपनी भावनाओं और प्रेम का आह्वान करते हैं।

कविता के माध्यम से जब भक्त श्री कृष्ण की असीम कृपा की कामना करते हैं, तो उनकी अचेतन अभिलाषा प्रकट होती है। 'अरे हमसे चढ़ा जात नही मोहन' कहकर भक्त अपने हृदय में भय और कुतूहल को प्रकट करते हैं। यहाँ कृष्ण के प्रति उनका आकर्षण पूरी तरह स्पष्ट है और साथ ही भक्ति के मार्ग की कठिनाइयों को भी दर्शाता है। गागर भरी हुई रस बातें, रात्रि की अंधियारी में, भावुकता और प्रेम अंकित करते हैं। यह प्रेम, भक्ति का रस और दिव्य अनुभव है, जो भक्त की आत्मा को आकार प्रदान करता है।

यह भजन विशेषकर भक्ति मार्ग (Bhakti Marg) की गहराईयों को उजागर करता है, जहाँ श्रद्धा और प्रेम के साथ प्रभु से जुड़ाव स्थापित किया जाता है। 'काहे छुअत छुअत' के माध्यम से, भक्त अपने भीतर के प्रेम को जगाकर और उसके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। श्रवण और ध्यान के माध्यम से भक्त अपने हृदय में श्री कृष्ण का ध्यान करते हैं, जिससे उनका मन प्रसन्नता और शांति से भर जाता है। इस भजन में गोपियों की बातों से और भावना में उनके प्रेम का गूढ़ रहस्य छिपा है, जो भक्ति की बहुत गहराई प्रदान करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन गोपियों की भक्ति और उनके प्रिय श्री कृष्ण के प्रति प्रेम का प्रतीक है। पुराणों में कृष्ण की लीलाएँ और गोपियों का उनकी आराधना में योगदान विशेष महत्व रखता है। भागवत पुराण में यशोदा और वृषभानु जी की कथाएँ मिलती हैं, जिसमें गोपियाँ श्री कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करती हैं। यह भजन उस परंपरा की एक जीवंत झलक प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रेम, भक्ति और सच्चे श्रद्धालु की भावनाएँ व्यक्त होती हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। इस भजन का गायन मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। जब भक्त इसे गाते हैं, तो उनके भीतर श्री कृष्ण की कृपा की अनुभूति होती है, जो उनके जीवन में सुख और शांति लाता है। यह भजन भक्ति के माध्यम से आत्मिक उन्नति और आध्यात्मिक संतोष प्रदान करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का रुद्राक्ष की माला के साथ सुबह या शाम के समय गाने की सलाह दी जाती है। ध्यान करें और अपने चारों ओर दीप जलाएं। ग्रहण की मानसिकता के साथ बैठें और श्री कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति को अपने मन में अंकित करें। यह भावनाएं भजन के स्वर में प्रकट होनी चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का अर्थ क्या है?

इस भजन का अर्थ है भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति, जहाँ भक्त गागर को भरने की प्रार्थना करते हैं।

क्यों यह भजन होली के समय गाया जाता है?

इस भजन का विशेष स्थान होली के त्यौहार पर है, क्योंकि यह प्रेम और रंगों के उत्सव का प्रतीक है, जो कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा है।

इस भजन का गायन कैसे करें?

इस भजन का गायन सच्चे मन से श्रद्धा के साथ करें। सुबह या शाम के समय एकांत में बैठकर दिल से प्रार्थना करें।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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