hari bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

ब्रज में हरि होरी मचाई लिरिक्स (Braj Me Hari Hori Machayi Lyrics in Hindi) - Holi Geet

ब्रज में हरि होरी मचाई भजन प्रेम और भक्ति का अद्भुत उत्सव प्रस्तुत करता है। राधा-कृष्ण के रंगों से जीवन को भरने की प्रेरणा।

प्रस्तावना एवं परिचय

राधा-कृष्ण: ब्रज में होली का आनंद

इस भजन के माध्यम से भगवान कृष्ण और राधा की होली का सुनहरा दृश्य जीवंत होता है।

ब्रज में हरि होरी मचाईइतते आवत कुँबरि राधिकाउतते कुँवर कन्हाईखेलत फाग परस्पर हिलमिलयह सुख बरनि न जाईसु घर-घर बजत बधाईब्रज में हरि होरी मचाईबाजत ताल मृदंग झांझ ढपमंजीरा और शहनाईउड़ति अबीर कुमकुमा केसरि,रहत सदा ब्रज छाईमनो मघवा झरि लाईब्रज में हरि होरी मचाईराधाजू सैन दियौ सखियन कोझुण्ड झुण्ड जो धाईलपटि-लपटि गई श्यामसुंदर सौंबरबस पकरि लैआईलाल जू को नाच नचाईब्रज में हरि होरी मचाईलीन्हों छीनि पीताम्बर मुरलीसिर सों चुनरि ओढ़ाईबेंदी भाल नैनन बिच काजरनकबेसर पहिराईमनो नई नारि बनाईब्रज में हरि होरी मचाईफगुआ लिये बिनु जानि न देहोकरिहौ कौन उपाईलहौं काढ़ि कसरि सब दिन कीतुम चितचोर कन्हाईबहुत दिन दधि मेरी खाईब्रज में हरि होरी मचाईसुसकत हौ मुख मोरि मोरि तुमकहाँ गयी चतुराईकहाँ गये वे सखा तुम्हारेकहाँ जसोमति माईतुम्हें किन लेति छुड़ाईब्रज में हरि होरी मचाईरास बिलास करत वृन्दावन ब्रज बनिता जदुराईराधे श्याम जुगल जोरी परसूरदास बलि जाईप्रीत उर रहति समाईब्रज में हरि होरी मचाई
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में ब्रज में होली के पर्व का अनूठा चित्रण प्रस्तुत किया गया है। पहले पद में, भगवान कृष्ण और राधा का एक साथ आना और होली खेलने का वर्णन है। यहाँ परस्पर हिलमिलकर खेलना, अपनी भावनाओं को साझा करना, और सुख का अनुभव करना दर्शाया गया है। फाल्गुन मास में जब होली का पर्व आता है, तब ब्रज क्षेत्र में हर घर में बधाईयों की गूँज सुनाई देती है। मृदंग, शहनाई, और ढपली की धुन पर नृत्य और गान करते हुए सखियाँ और मथुरा की महिलाएँ इस उत्सव में भाग लेती हैं, जैसे कि वे सभी मिलकर एक-दूसरे का आनंद बढ़ा रही हों। यह केवल एक पर्व नहीं है, बल्कि भक्ति और प्रेम का उत्सव है, जो आत्मा को उच्चतम स्तर पर पहुँचाने में सहायक है।

भजन में अगले पदों में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया गया है। राधा की सखियाँ उन्हें धक्का देती हैं ताकि वह कृष्ण के साथ अधिक समय बिताएँ। यह दृश्य प्रेम और भक्ति से भरा हुआ है। श्यामसुंदर, जो कि कृष्ण का एक नाम है, का प्रति क्षण बोध कराना, और लाल जी का नृत्य करते हुए वर्णन करना इस भजन में राधा-कृष्ण के प्रेम के आलिंगन को बहुत अच्छे से प्रस्तुत करता है। जब वे रंग में रंगते हैं, तब उनके प्रेम की भीनी महक चारों ओर फैल जाती है। यहाँ पर शास्त्रीय दृष्टिकोण से राधा कृष्ण की जोड़ी का महत्व भी बखूबी दर्शाया गया है।

इस भजन की थाती भक्ति मार्ग के आधार पर है। प्रेम, समर्पण, और भक्ति में जो आनंद है, वह इस भजन में स्पष्ट रूप से प्रकट होता है। राधा और कृष्ण का संबंध अद्वितीय है, जिसमें प्रेम के विभिन्न रंग प्रदर्शित होते हैं। जब भक्त इस भजन का गान करते हैं, तो वह नारियों और पुरुषों में समानता का संदेश फैलाते हैं। भक्ति का मार्ग केवल साधना का नहीं, बल्कि प्रेम और समर्पण का अनुभव देने वाला है। जब भक्त अपने हृदय में भगवान को स्थान देते हैं, तभी रंग और आनंद का अनुभव होता है, जो हमें ब्रज क्षेत्र की ओर खींचता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक है। यह श्रीमद्भागवत पुराण और अन्य पौराणिक ग्रंथों में वर्णित राधा-कृष्ण की लीलाओं को उजागर करता है। होली का पर्व ब्रज क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लास और आनंद का पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान कृष्ण और राधा ने होली का खेला, तब उन्होंने प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश फैलाया। विभिन्न रंगों का अत्यधिक उपयोग यहाँ दर्शाता है कि रंगीन जीवन किस प्रकार प्रेम और भक्ति में परिवर्तित हो सकता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का उच्‍चारण करने से व्यक्ति के मन में शांति, प्रेम और सामंजस्य का अनुभव होता है। यह मानसिक स्थिति को संतुलित करती है और आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होती है। भक्तों के लिए, यह निरंतर गान करना उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में मददगार होता है। होली के समय इस भजन का उच्चारण विशेष रूप से आनंद और उल्लास को बढ़ाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का उच्चारण सुबह के समय या होली के विशेष अवसर पर किया जाना चाहिए। ध्यान लगाकर कृष्ण की मूर्ति के सामने या किसी पवित्र स्थान पर दीप जलाना चाहिए। भक्त को प्रेम और समर्पण के भाव से इस भजन का गान करना चाहिए। शांति और भक्ति का माहौल बनाकर मन को एकाग्र करना उत्तम होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कब है?

इस भजन को सुबह के समय या होली के पर्व पर गाना सर्वश्रेष्ठ होता है, जब भक्तों का मन आनंद और उल्लास से भरा होता है।

क्या इस भजन का धार्मिक महत्त्व है?

जी हाँ, इस भजन का संबंध श्री राधा और कृष्ण की लीलाओं से है, जो भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना को उजागर करता है।

इस भजन का अनुष्ठान कैसे किया जाए?

इस भजन का अनुष्ठान करते समय भक्त को शांत मन से गान करना चाहिए, दीप जलाना चाहिए और भगवान की मूर्ति के सामने बैठकर भक्ति पूर्ण भाव से गुनगुनाना चाहिए।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!