Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

भगत के वश में है भगवान (Bhagat ke vash mein hai bhagwan Lyrcs in Hindi) - Krishna Bhajan

भगत के वश में है भगवान भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रसिद्ध कृष्ण भजन का आनंद लें | Bhaktilok.

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

भगत के वश में है भगवान

भक्त बिना ये कुछ भी नहीं है

भक्त है इसका शान


भगत मुरली वाले की रोज ब्रंदावन डोले

कृष्ण को लल्ला समझे, कृष्ण को लल्ला बोलो

श्याम के प्यार में पागल, हुई वो श्याम दीवानी

अगर भजनो में लगे, छोड़ दे दाना पानी

प्यार करण वो लागे उसे अपने बेटे समान

भगत के वश में है भगवान...


वो अपने कृष्ण लाला को गले से लगाकर रखें

हमेशा सजा कर रखना की लड़कियाँ लड़ कर रखना

वो दिन में भाग के देखना, किसी रात में जाग के देखना

कभी अपने कमरे से, श्याम को हुंकार के देखना

अपनी जान से ज्यादा कहानी अपने लाला का ध्यान

भगत के वश में है भगवान...


वो लल्ला लल्ला पुकारे हाय क्या जुल्म हुआ रे

बुढ़ापा गया जी लाल मेरा कैसे गिरा रे

जाओ डॉक्टर को लाल का हाल दिखाओ

अगर एडिटेड कुछ हो गया तो मुझे भी मारो गिराओ

अंतिम संख्या पागल हो जाएगी घर वाले

भगत के वश में है भगवान...


नबज को टटोल के बोले, ये तेरा लाल सही है

मुझे कोई तकलीफ़ नहीं है

वो माथा देख के बोले ये तेरा लाल सही है

मुझे चिंता मत करो कोई परेशानी नहीं है


जोहे गेजेट से इंस्पायर किया गया खाना जाम कर आया

उन्होनें कई बार डॉक्टर चकराया का मूल्यांकन किया

धड़क रहा सीना लल्ला का, मूर्ति में प्राण

भगत के वश में है भगवान...


देख तेरे लाल की मैया बड़ी हेयरां हो रही है

कहां से भी लल्ला ल्या वो पे जा रहा हूं

लाल तारा जुग जुग जिया बड़ा एहसान

आज से सारा जीवन उसी का नाम है

बनवारी तेरे मन नहीं पागल पागल सारा कहाँ

भगत के वश में है भगवान...

बोलिये वृन्दावनबिहारी लाल की जय

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "भगत के वश में है भगवान (Bhagat ke vash mein hai bhagwan Lyrcs in Hindi) - Krishna Bhajan - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!