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यदा यदा ही धर्मस्य अर्थ सहित श्लोक इन हिंदी (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka in Hindi) - by Jagjit Singh - Bhaktilok

 

यदा यदा ही धर्मस्य अर्थ सहित श्लोक इन हिंदी (Yada Yada Hi Dharmasya Sloka in Hindi) - 


श्लोक:-

“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।”


श्लोक का अर्थ:-

जब जब धर्म की हानि होगी और अधर्म बढ़ेगा तब तब मैं धरती पर अवतार लेकर आता रहूंगा और धर्म की रक्षा और स्थापना करूंगा एवं अधर्म का नाश करूंगा।


श्लोक:-

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।

धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे


श्लोक का अर्थ:-

मैं यानिकी कृष्ण हर युग में बार-बार अवतार लूंगा जो साधुओं की रक्षा करने के लिए, धरती पर पाप को खत्म करने के लिए, पापियों का संहार करने के लिए और धर्म को स्थापित करने के लिए होगा और में जनकल्याण करूँगा।

श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए उपदेशों के कारण ही अर्जुन का मनोबल बड़ा और उन्होंने युद्ध किया और कौरवों पर विजय पायी। आशा करते हैं आपको आपके प्रश्न का उत्तर मिल गया। ऐसे ही अन्य प्रश्नों के उत्तरों को पाने के लिए ज्ञानग्रंथ को फॉलो करिये।


श्लोक:-

अहंकारम बलम दरपम

कामम क्रोधम् च समश्रितः

महामातं परमदेषु

प्रदविष्णो अभ्यसुयाकः


श्लोक का अर्थ:-

अहंकार, शक्ति, अहंकार, इच्छा और क्रोध से अंधा, राक्षसी ने अपने शरीर के भीतर और दूसरों के शरीर में मेरी उपस्थिति का दुरुपयोग किया।



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