भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे लिरिक्स (Thare Jhhang Nagana Baaje Re Lyrics in Hindi) - By Jaya Kishori Ji Bhajan

भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में समर्पित यह भजन शांति और आनंद का अनुभव कराता है, जिससे भक्तों का जीवन धन्य होता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

कृष्ण भक्ति का संगीतमय उत्सव: झांझ नगाड़ा

इस भजन के माध्यम से श्रीकृष्ण की भक्ति और प्रेम का आनंद लें, जो जीवन को रोशन कर देता है।

थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। छजूम छजूम बधाई गाजे रे। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। थारे धुन है कामधेनु। थारे राग है मधुवनी। थेरे चरण कमल से काजे रे। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। तुम बिन जीना नहीं मेरा। तुम बिन जीना नहीं मेरा। तेरे प्रेम में मरे सदा। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। कौना साजन, कौना दिलबर। जो सुन सके ये गाजे रे। धन्य है वो साजिंदे। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। मोर मयूर सब संग नाचे। थारे दर में ये जापिरे। तन मन से सजा कर जो आए। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे। कृष्णा कन्हैया, श्री राधा। संग बधाई संग गाजे रे। भक्ति, प्रेम का दिन होता। थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

"थारे झांझ नगाड़ाबाजे रे" भजन में कृष्ण की भक्ति और उनकी अनगिनत लीलाओं का गुणगान किया गया है। भजन की शुरुआत में, भक्त ने भगवान श्रीकृष्ण के नगाड़े की धुन की बात की है, जो कि भक्तों को आह्वान करता है और एक आनंदमय वातावरण का निर्माण करता है। यह भक्ति गीत प्रेम और लगाव की भावना को व्यक्त करता है, जिसमें बताया गया है कि कैसे भगवान की उपासना में भक्ति और संगीतिकता को एक साथ मिलाया जाता है। इस भजन में "थारे धुन है कामधेनु" इस विचार को दर्शाता है कि भगवान की धुन, जीवन को संपूर्णता और समृद्धि प्रदान करती है। न केवल रागिनी, बल्कि कृष्ण का नाम लेने से भी भक्तों के मन में आंतरिक शांति का अनुभव होता है।

इस भजन में उच्चारित भावनाएं कभी-कभी दिल को छू जाती हैं। "तुम बिन जीना नहीं मेरा" इस पंक्ति में भक्त कृष्ण से अपने अस्तित्व की असंबद्धता को उजागर करता है। यह वह क्षण है जब भक्त अपने दिल से यह स्वीकारता है कि उनके जीवन में कृष्ण का प्रेम सर्वोपरि है। "कौना साजन, कौना दिलबर" एवं "धन्य है वो साजिंदे" जैसे शब्दों में भक्त अपनी पहचान में कृष्ण को सर्वोच्च स्थान देता है। यह दर्शाता है कि केवल भक्ति ही मनुष्य को सही और सच्चे प्रेम का अनुभव कराती है। इस भजन के माध्यम से भक्त राधा-कृष्ण के प्रगाढ़ प्रेम की मधुरता का अनुभव करता है, जिससे जीवन में सुख और आनंद की बौछार होती है।

इस भजन का धार्मिक, दार्शनिक और भक्ति मार्ग का एक प्रगाढ़ संदेश है। "भक्ति" शब्द का अर्थ केवल पूजा या आराधना नहीं है, बल्कि यह एक गहरी भावनात्मक जुड़ाव और प्रेम की भावना से संबंधित है। भक्ति मार्ग हमें यह सीखाता है कि कैसे हर स्थिति में, भगवान की कृपा पर विश्वास रख कर आगे बढ़ा जाए। इस भजन में साजिंदों द्वारा कृष्ण का गुणगान, साज और उत्सव का संयोजन दर्शाता है कि भक्ति एक आनंदमय यात्रा है। इसमें नृत्य, राग, और भाव का सम्मिलन एक दिव्य अनुभव का निर्माण करता है जो भक्त को आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का पौराणिक संदर्भ श्री कृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। पुराणों में कृष्ण ने हमेशा अपनी भक्ति से भक्तों को प्रेरित किया है। विशेषकर भागवत पुराण में यह बताया गया है कि कैसे कृष्ण की संगीत और नृत्य की अनुपम लीलाएं भक्तों को मोहित करती हैं। भजन का संदर्भ सीधे तौर पर कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम का प्रतीक है, जिसे भक्तों ने हर समय गाया और मन में आत्मसात किया। इसकी महत्ता इस बात में है कि यह भक्तों के हृदय में भक्ति की अलौकिक गहराई अनुभव कराता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि यह физिकली भी ऊर्जा प्रदान करता है। भक्तों को मानसिक तनाव में राहत मिलती है और एक सकारात्मक वातावरण का अनुभव होता है। आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, इस भजन का भक्ति पूर्वक जप करते समय व्यक्ति अपने आध्यात्मिक विकास की ओर अग्रसर होता है। यह व्यक्तिगत संबंध को भगवान के प्रति और गहरा बनाता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह-सुबह या संध्या के समय करना विशेष लाभकारी होता है। भक्त को चाहिए कि वे एक स्वच्छ स्थान पर बैठकर ध्यान मुद्रा में रहें और अपने सामने एक दीपक जलाएं। भगवती राधा और श्री कृष्ण की तस्वीर के समक्ष अगरबत्ती भी जलानी चाहिए। पठान के समय, मन में एकाग्रता बनाए रखें और भक्ति भाव से गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन का महत्व क्या है?

इस भजन का महत्व भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का अद्वितीय तरीका दर्शाना है, जो प्रेम और संगीत के माध्यम से भक्तों को एकत्र करता है।

कौन इसे गाते हैं?

इस भजन को छवि और भक्ति भाव से जगत प्रसिद्ध भजन गायिका जया किशोरी जी गाती हैं, जो भक्तों के हृदय में कृष्ण के प्रति भक्ति का संचार करती हैं।

भजन का जप कैसे करें?

भजन का जप करते समय, भक्तों को सुबह या शाम को एकांत में ध्यान मुद्रा में बैठकर सच्चे मन से गाना चाहिए, जिससे आन्तरिक शांति प्राप्त हो।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!