भक्ति काव्य व भजन मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई लिरिक्स (Tere Dar ko Mai Chhod Kaha Jau Na Duja Koi Lyrics in Hindi) - Sai Bhajan

तेरे दर को मैं छोड़ कहां जाऊं ना दूजा कोई लिरिक्स पढ़ें। शिरडी वाले साई बाबा का यह लोकप्रिय भजन अर्थ और महिमा सहित उपलब्ध है।

तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई लिरिक्स - साई भजन परिचय

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित पावन भजन "तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई लिरिक्स (Tere Dar ko Mai Chhod Kaha Jau Na Duja Koi Lyrics in Hindi)" अनन्य भक्ति, पूर्ण शरणागति (Surrender) और आत्मिक शांति का प्रतीक है। साईं बाबा के चरणों में ही इस संसार के समस्त दुखों का निवारण और सच्चा सुकून मिलता है। जब भक्त दुनिया के दुखों से त्रस्त होकर चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब बाबा का दरबार ही एकमात्र ऐसा शरणस्थल बनता है जहाँ उसे अहेतुकी कृपा और करुणा की प्राप्ति होती है। लक्खा जी की मधुर वाणी में गाया गया यह लोकप्रिय साईं भजन भक्तों के हृदय में अगाध श्रद्धा, विश्वास और सबूरी (धैर्य) का संचार करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, गायन विधि, आध्यात्मिक महत्व और साईं बाबा की महिमा का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

गायक (Singer): लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha)


(मुखड़ा)
तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं,
ना दूजा कोई द्वार ना दिखे।
तुझ बिन जीना भी क्या जीना,
तेरा दर ही मेरा ठिकाना है॥
हो तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं...

(अंतरा 1)
तेरा दर्शन जब मै पाऊँ,
दुनिया के गम भूल ही जाऊँ।
तेरी रहमत का साया जो मिल जाए,
जिंदगी का हर दर्द भूल जाऊँ॥
हो तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं...

(अंतरा 2)
इतनी कृपा बस हम पर कर देना,
मूँ Aaina तेरा गाऊँ मुझे यही वर देना।
शिरडी वाले बाबा तेरा साथ ना छूटे,
हर जनम में यह पावन नाता ना टूटे॥
हो तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं...

(समापन पंक्तियाँ)
सबका मालिक एक तुम्हारा नारा,
दुखियों का तुमने ही है सहारा।
शिरडी के साईं रहम नजर करना,
भक्तों की झोली खुशियों से भरना॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भक्त और भगवान (साईं बाबा) के बीच के अनन्य और अटूट रिश्ते को परिभाषित करता है। मुखड़े की पंक्तियाँ - "तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, ना दूजा कोई द्वार ना दिखे" - उस परम आध्यात्मिक स्थिति को दर्शाती हैं जहाँ साधक को सम्पूर्ण ब्रह्मांड में शिरडी वाले साईं बाबा के चरणों के अलावा और कोई अन्य आश्रय नजर नहीं आता। जीव जब सांसारिक प्रपंचों और दुखों से थक जाता है, तब वह साईं दरबार में आकर शांति पाता है।

अंतरा भाग में भक्त वर्णन करता है कि बाबा के एक बार दर्शन मात्र से ही सांसारिक मोह-माया, संताप और दुःख स्वतः समाप्त हो जाते हैं। साईं बाबा की रहमत का आंचल जिसके ऊपर भी तन जाता है, उसका जीवन धन्य हो जाता है। भजन की अंतिम पंक्तियों में भक्त कोई भौतिक सुख या धन-दौलत नहीं मांगता, बल्कि वह केवल यह वरदान मांगता है कि उसका शिरडी वाले बाबा के साथ जन्म-जन्मांतर का नाता बना रहे और वह निरंतर बाबा के गुणों का गान करता रहे। यह समर्पण ही सच्ची भक्ति और अध्यात्म की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन न केवल संगीतमय दृष्टि से मधुर है, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत उच्च कोटि का है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शरणागति भाव: यह भजन शरणागति (Total Surrender) के मार्ग को प्रशस्त करता है, जो भक्तियोग का मूल आधार है।
  • सर्वधर्म समभाव: साईं बाबा के दरबार में जाति, धर्म, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता, जिसे यह भजन भली-भांति रेखांकित करता है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के निरंतर श्रवण या गायन से मन का तनाव, चिंता और अवसाद दूर होता है तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • भक्ति रस की प्रधानता: यह भजन साधक के हृदय में करुणा, प्रेम और परोपकार की भावना को जागृत करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय गाया या सुना जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों और समयों पर इसका प्रभाव अत्यंत अलौकिक होता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकालीन वंदना: सुबह उठकर स्नान के पश्चात साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष धूप-दीप प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है।
  • गुरुवार की संध्या (Sai Vrat Puja): शिरडी साईं बाबा के व्रत और गुरुवार की शाम को होने वाली साईं संध्या या भजन-कीर्तन में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जाता है।
  • साईं सत्संग और मंदिर दर्शन: शिरडी मंदिर या स्थानीय साईं मंदिरों में होने वाले साप्ताहिक सत्संग के दौरान इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन शिरडी के महान संत एवं सद्गुरु शिरडी वाले साईं बाबा को समर्पित है। साईं बाबा ने अपने जीवनकाल में "श्रद्धा और सबूरी" (Faith and Patience) का मुख्य संदेश दिया। उनका कोई निश्चित पंथ या जाति नहीं थी; वे सभी धर्मों के लोगों को मानवता, प्रेम और ईश्वर-स्मरण का पाठ पढ़ाते थे। साईं बाबा को भगवान श्री दत्तात्रेय और कबीर दास जी का अवतार भी माना जाता है। उनके दरबार में आने वाला हर दीन-दुखी व्यक्ति कभी खाली हाथ नहीं लौटता। साईं बाबा के जीवन और उनके चमत्कारों पर आधारित अनेक रचनाएं हैं, जिनमें साईं बाबा के प्रसिद्ध भजन और आरती का विशेष स्थान है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस प्रसिद्ध भजन को लोकप्रिय गायक लखबीर सिंह लakkha ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज से सजाया है। लक्खा जी के भजनों की विशेषता यह होती है कि उनके शब्दों में सीधी सादगी और गहरा भक्ति भाव झलकता है। इस भजन की रचनाकारिता आधुनिक भक्ति संगीत शैली में की गई है, जहाँ सरल हिंदी और उर्दू के सहज शब्दों का प्रयोग किया गया है ताकि आम जनमानस भी इसे आसानी से समझ सके और गुनगुना सके। यह भजन शिरडी साईं भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और हर साईं भक्त की जुबान पर रहता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और प्रवाहमयी खड़ी हिंदी एवं हिंदुस्तानी है। इसमें अलंकारिक कठिन शब्दों के स्थान पर सीधे और हृदय को छूने वाले शब्दों का चयन किया गया है। काव्य शैली के अंतर्गत इसमें अनुप्रास और ग्यात्मक लय का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के कठिन समय में भी धैर्य न खोने की सीख देता है। साईं बाबा के चरणों में जाने का अर्थ है अपने अहंकार का त्याग करना और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखना। जीवन में चाहे कितनी भी आपदाएं आएं, यदि साईं रूपी गुरु का हाथ सिर पर हो, तो हर संकट को आसानी से पार किया जा सकता है। यह भजन हमें स्वार्थ से ऊपर उठकर निष्काम प्रेम और सेवा करने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
दर द्वार या चौखट ईश्वर या गुरु का शरणस्थल
ठिकाना आश्रय स्थल या घर आत्मा की वास्तविक शांति का स्थान
रहमत कृपा, दया या आशीर्वाद परमात्मा की अहेतुकी करुणा
सबूरी धैर्य या संतोष साईं बाबा द्वारा बताया गया मुख्य मार्ग

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. तेरे दर को मैं छोड़ कहाँ जाऊँ, ना दूजा कोई द्वार ना दिखे:
भक्त कहता है कि हे साईं! इस संसार में भटकते-भटकते मैंने सब कुछ देख लिया है, परंतु आपके चरणों के सिवा मुझे कोई दूसरा ऐसा पावन द्वार नहीं दिखता जहाँ सच्चे सुख और शांति की प्राप्ति हो सके।

2. तुझ बिन जीना भी क्या जीना, तेरा दर ही मेरा ठिकाना है:
ईश्वर या गुरु के स्मरण के बिना यह मनुष्य जीवन व्यर्थ है। मेरा असली घर और ठिकाना केवल आपका दरबार ही है।

3. तेरा दर्शन जब मैं पाऊँ, दुनिया के गम भूल ही जाऊँ:
बाबा की एक झलक या उनकी दिव्यता का अनुभव होते ही सांसारिक दुख, संताप और चिंताएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

साईं बाबा के स्मरण और उनकी स्तुति के लिए निम्नलिखित पावन मंत्र का जाप अत्यंत लाभकारी माना जाता है:

"ॐ साईं राम शिरडी वासाय विद्महे सच्चिदानंदाय धीमहि तन्नो साईं प्रचोदयात्॥"

यह साईं गायत्री मंत्र है, जिसके निरंतर जाप से मानसिक शांति और बाबा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त आप ॐ साईं राम मंत्र जप के लाभ और विधि के बारे में भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तेरे दर को मै छोड़ कहा जाऊं ना दूजा कोई (Tere Dar ko Mai Chhod Kaha Jau)
समर्पित देवता शिरडी वाले साईं बाबा
गायक / कलाकार लखबीर सिंह लक्खा (Lakhbir Singh Lakkha)
भाषा सरल हिंदी / ब्रज-मिश्रित हिंदुस्तानी
मुख्य भाव शरणागति, भक्ति, प्रेम और विश्वास
उपयुक्त अवसर गुरुवार की पूजा, साईं संध्या, सत्संग, दैनिक वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय साईं भजन को प्रसिद्ध भक्ति गायक लखबीर सिंह लक्खा जी ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन शिरडी के महान संत एवं सद्गुरु शिरडी वाले साईं बाबा को समर्पित है।

इस भजन को विशेषकर गुरुवार के दिन, साईं व्रत के समय, सुबह की पूजा में या किसी भी साईं संध्या के आयोजन पर सुनना और गाना अत्यंत फलदायी होता है।

साईं बाबा की साधना में 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर के पूजा स्थल पर अकेले या परिवार के साथ पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ गा सकते हैं।

"साईं नाथ तेरे हजारों हाथ", "हे शिरडी वाले बाबा", "पाव पडे साईं तेरे चरण में" और "साईं बाबा की आरती" आदि शिरडी साईं बाबा के अत्यंत प्रसिद्ध भजन और स्तुतियाँ हैं। आप शिरडी साईं बाबा आरती लिरिक्स भी पढ़ सकते हैं।

भजन में सकारात्मक शब्दों, मधुर संगीत और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव होता है, जो मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांत करता है और तनाव को कम करता है।

"ॐ साईं राम" (Om Sai Ram) शिरडी साईं बाबा का सबसे सरल, प्रभावी और लोकप्रिय मूल मंत्र है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख शिरडी साईं बाबा के भक्तों की भावनाओं और पारंपरिक भक्ति साहित्य को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध गीत, प्रामाणिक अर्थ और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करना है। सभी पंक्तियों और भावार्थों को साईं दर्शन और परंपरा के अनुसार सत्यापित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिरडी साईं बाबा चरित्र और सच्चित
  • पारंपरिक साईं भजन संग्रह एवं लोकगीत परंपरा
  • भक्ति संगीत ग्रंथ और लक्खा साईं भजन एलबम
  • सनातन एवं संत परंपरा के मूल दार्शनिक ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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