आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
Radha Kriya Kataksh Stotram

श्री लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्बा स्तोत्रम (Sri Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram Lyrics in Hindi) - Laxmi Stotra - Bhaktilok

115 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

श्री लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्बा स्तोत्रम (Sri Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram Lyrics in Hindi) - Laxmi Stotra - Bhaktilok


श्री लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्बा स्तोत्रम (Sri Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram Lyrics in Hindi) - 


श्रीमत पयोनिधि निकेतन चक्र फलक

भोगेन्द्र भोग मणि राजिथा पुण्य मूरते

योगीसा शाश्वत सरण्यं भाब्धि पोथा

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 1 ||


ब्रह्मेन्द्र रुद्रार्क किरीता कोटि

संगतिथंगरी कमला माला कंथि कंथा

लक्ष्मी लसथ कुचा सरोरुहा राजा हम्सा

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 2 ||


संसार दावा दहनाथुरा भिकारोरु

ज्वाला वले बिरथी धिग्धा नूरुहास्य

थ्वत् पाद पद्म सरसि सरनागथस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 3 ||


संसार जल पथिथस्य जगं निवासा

सर्वेन्द्रीयार्थ बदीसार्थ जशोपमस्य

प्रोथ गंदिथा प्रचूरा तालुका मस्तकस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 4 ||


संसार कूपं अधि घोरा मागध मूलम्

सम्प्रप्य दुःख शत सर्प समकुलस्य

धीनस्य देवा कृपाण पदमगदस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 5 ||


संसार भिखारा करीन्द्र करभिगाथा

निश्पिष्ट मर्ममा वपुषा सकलार्थी नासा

प्राण प्रयाण भव भेति समाकुलस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 6 ||


संसार सर्प घाना वक्त्रा भयोगरा थेव्रा

दम्ष्ट्र कराला विषा दग्धा विनष्ट मूरते

नागरी वाहन सुधाब्धि निवास सौरे

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 7 ||


समस्र वृक्षमघ भीज मनन्था कर्म

सखा शतं कारणं पत्थरमणंगा पुष्पम

अरोहस्य दुःख फलितं पथथो दयालो

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 8 ||


संसार सागर विशाला कराला कला

नक्र ग्रहं ग्रासना निग्रह विग्रहस्य

व्याघ्रस्य राग रसनोर्मिणि पीडिथस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 9 ||


संसार सागर निमज्जन मुह्यमानम्

दिनं विलोकाय विभो करुणानिधे माम्

प्रह्लाद खेडा परिहार परावतारा

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 10 ||


संसार गोरा गहने चराथे मुरारे

मारोगरा भीखारा मृगा प्रवर्धितस्य

अर्थस्य मठ्सर निधा चैन पीडिथस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 11 ||


बधवा गले यमभता बहुतार्जयन्तः

कर्शान्ति यत्र भवपाषाशतैर्युतं माम्।

एकाकिणं परवशं चकितं दयालो

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 12 ||


लक्ष्मी पथे कमला नाभ सुरेसा विष्णो

वैकुंठ कृष्ण मधु सूदन विश्वरूपा

ब्रह्मण्य केशव जनार्दन चक्रपाणे

देवेसा देहि कृपांस्य करावलम्बम् || 13 ||


एकेना चक्रमापरेना करीना शाम्खा-

मन्येन सिन्धुतनयामावलम्ब्य तिष्ठन्

वामे करेण वरदाभ्यपद्माचिह्नम्

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 14 ||



अंधास्य मे विवेका महा दानस्य

चोरै प्रभो भालिभी रिन्द्रिया नाम देयै

मोहंदा कूप कुहारे विनिपथथस्य

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 15 ||


प्रह्लाद नारद पराशर पुण्डरीका-

व्यासादि भगवत पुंगवः ऋणिवासः

भक्तानुरक्त परिपालन पारिजाता

लक्ष्मी नृसिंह मम देहि करावलम्बम् || 16 ||


लक्ष्मीनृसिंह चरण अबजा मधुव्रतेन

स्तोत्रं कृतं शुभकारं भुवि शंकरेण

ये तत्पथन्ति मनुजा हरिभक्ति युक्ता

स्ते यान्ति तत्पाद सरोजा माखण्डरूपम् || 17 ||


इति श्री लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्बा स्तोत्रम् ||


प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

भगवान श्री रामचंद्र जी को समर्पित यह भजन "श्री लक्ष्मी नरसिम्हा करावलम्बा स्तोत्रम (Sri Lakshmi Narasimha Karavalamba Stotram Lyrics in Hindi) - Laxmi Stotra - Bhaktilok" मर्यादा पुरुषोत्तम के पावन चरित्र का स्मरण कराता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के सिद्धांतों के अनुसार, राम का नाम स्वयं राम से भी अधिक सामर्थ्यवान है। इस भजन की लय और शब्द भक्त को सीधे साकेत धाम की पावन चेतना से जोड़ते हैं।

भजन का प्रमुख भाव शरणागति का है। जब जीव समस्त सांसारिक प्रपंचों से थककर भगवान राम के चरणों में शरण लेता है, तो उसे परम अभय की प्राप्ति होती है। राम नाम की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और अंतःकरण में धर्म और सत्य के प्रति निष्ठा दृढ़ होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

सनातन ग्रंथों के अनुसार, राम नाम का जाप कलयुग का सर्वश्रेष्ठ साधन माना गया है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में राम नाम की असीम महिमा गाई गई है। यह भजन साधक के मन में वैराग्य, संयम, दया और कर्तव्य परायणता जैसे नैतिक मूल्यों का संचार करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। राम नाम के संकीर्तन से व्यक्ति का आत्मबल जागृत होता है, भय तथा शंकाओं का नाश होता है और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य रखने की शक्ति प्राप्त होती है। यह पारिवारिक सौहार्द और मर्यादा की स्थापना में सहायक है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

राम भजन का संकीर्तन प्रातःकाल स्नान के पश्चात राम दरबार की प्रतिमा के सम्मुख घी का दीपक जलाकर करें। तुलसी की माला से राम नाम का जप करने के पश्चात इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

राम भजन के गायन से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

राम भजन के संकीर्तन से मानसिक शांति, उत्तम चरित्र, और विपत्तियों में धैर्य बनाए रखने का आत्मबल प्राप्त होता है।

राम नाम जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माला कौन सी है?

भगवान श्री राम के मंत्र जाप और संकीर्तन के लिए तुलसी की माला को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत पवित्र माना गया है।

क्या राम भजन बच्चों के संस्कारों के लिए उपयोगी है?

हाँ, भगवान राम के मर्यादापूर्ण चरित्र के भजन सुनने से बच्चों में बड़ों के प्रति सम्मान, सत्यप्रियता और उच्च नैतिक संस्कारों का विकास होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!