Siddhidatri Mata Aarti

श्री सिद्धिविनायक आरती (Shri Siddhivinayak Aarti Lyrics in Hindi) - Jai Dev Jai Dev जय देव जय देव - Bhaktilok

155 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

सुख कर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नचि।

नूरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।।

सर्वांगी सुन्दर उत्तिषेन्दु रचि।

कण्ठी झलके माड़ मुख्ता पधानचि।।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय मंगल मूर्ति।

दर्शन मात्रे मान,

कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा।।

चंदनाची उति कुमकुम के शर।

किराए जड़ित मुकुट शोभतो बारा:।

रुनझुनाति नुपुरे चारणि घाघरिया:।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय मंगल मूर्ति।

दर्शन मात्रे मान,

कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

लम्बोदर पीताम्बर फणीवर वन्दना।

सरल सोन्द वक्रतुण्ड त्रिनयना:।

दास रामाचा वत पाहे सदना।

संकटी पाववे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वन्दना।।

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय मंगल मूर्ति।

दर्शन मात्रे मान,

कामना पूर्ति

जय देव जय देव ॥

॥ श्री गणेशाची आरती॥

शिंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको।

डौंडिल लाल बिराजे सुत गौरीहरको।

हाथ ली गुड़ लड्डु सैं सुरवरको।

महिमा कहे न जाई लगत हूं पड़को॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव,

जय जय श्री गणराज ।

विद्या सुखदाता

धन्य तुम्हारा दर्शन

मेरा मन रमता,

जय देव जय देव ॥

अस्तौ सिद्धि दासि संकटको बैरि।

विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी:।

कोटिसूरजप्रकाश ऐबि छबि तेरी।

गंधस्थलदममस्तक झूले शशिबिहारी॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव,

जय जय श्री गणराज ।

विद्या सुखदाता

धन्य तुम्हारा दर्शन

मेरा मन रमता,

जय देव जय देव ॥

भवभगत से कोई शरणागत आवे।

संतति सम्पति सबहि भरपुर पावे।।

ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे।

गोसाविनन्दन निशिदिन गुन गावे॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव,

जय जय श्री गणराज ।

विद्या सुखदाता

धन्य तुम्हारा दर्शन

मेरा मन रमता,

जय देव जय देव ॥

॥ श्री शंकराची आरती॥

लवथवती विक्राला ब्रह्माण्डी माला,

विषे कण्ठ कला त्रिनेत्री ज्वाला

लावण्या सुन्दर मस्तकी बाला,

तेथुनिया जाला निर्मला वाहे झूलाझूला॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय श्री शंकर.

आरती ओवलु,

तूजा कर्पुरागौरा

जय देव जय देव ॥

कर्पुरागौरा भोला नयनी विशाला,

अर्धांगी पार्वती सुमनंच्या माला,

विभूतिचे उधलाना शितिकन्था नीला,

ऐसा शंकर शोभे उमावेलहला॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय श्री शंकर.

आरती ओवलु,

तूजा कर्पुरागौरा

जय देव जय देव ॥

देवी दैत्यि सागरमंथन पै केले

त्यामाजी अवचिता हलाहला जे उठे

ते त्वा असुरपाणे प्रशान केले,

नीलकंठ नाम प्रसिद्ध झाले॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय श्री शंकर.

आरती ओवलु,

तूजा कर्पुरागौरा

जय देव जय देव ॥

व्याघ्रंबरा फणीवरधरसुंदर मदनारी,

पंचानन मनमोहन मुनिजन सुखकारी

शतकोटिचे बीज वाचे उच्चारी,

रघुकुलतिलका रामदास अंतरी॥

जय देव जय देव..

जय देव जय देव

जय श्री शंकर.

आरती ओवलु,

तूजा कर्पुरागौरा

जय देव जय देव ॥

॥ श्री देविचि आरती ॥

दुर्गे दुर्गत भारी तुजवीं संसारी,

अनाथनाथे अम्बे करुणा विस्तारि।

वारी वारी जनम मरांते वारी,

हरि पदलो अता संकट निवारी॥

जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,

जय महिषासुरमथिनि।

सुरवर ईश्वर वर्दे,

तारक संजीवनी

जय देवी जय देवी ॥

तुजवीन भुवनि पहाता तुज ऐसे नहीं,

चारि श्रमले परंतु न बोलवे कहिन।

सहि विवाद करिता पडिले प्रवाही,

ते तू भक्तलगी पवसी लावलहि॥

जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,

जय महिषासुरमथिनि।

सुरवर ईश्वर वर्दे,

तारक संजीवनी

जय देवी जय देवी ॥

प्रसन्न वदने प्रसन्न होसि निजदासा,

क्लेशपसुनि सोदिवि तोदि भावपाशा:।

अम्बे तुजवाचुन कोण पुरविल आशा,

नरहरि तेलिन झाला पदपंकजलेषा॥

जय देवी जय देवी..

जय देवी जय देवी,

जय महिषासुरमथिनि।

सुरवर ईश्वर वर्दे,

तारक संजीवनी

जय देवी जय देवी ॥

॥ घलिन लोटंगन आरती॥

घलिन लोटंगन वंदिन चरन।

डोल्यानि पाहिं रूप तुझे।

देव प्रेमे अलिंगन आनन्दे पूजिन्।

भावे ओवलिन म्हाने नामा ॥

त्वमेव माता च पिता त्वमेव।

त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।

त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव।

त्वमेव सर्वं मम देव देव॥

कायेना वाचा मनसेन्द्रियेन्वा।

बुद्धायत्मना वा प्रकृतिस्वाभावात्।

करोमि यध्यात् सकलं परस्मै।।

नारायणयेति समर्पयामि॥

अच्युतम केशवम् रामनारायणम्।

कृष्णदामोदरं वासुदेवं भजे।

श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभम्।

जानकी नायकं रामचन्द्र भजे॥

हरे राम हरे राम राम,

राम हरे हरे ।

हरे कृष्ण हरे कृष्ण,

कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

श्री सिद्धिविनायक आरती (Shri Siddhivinayak Aarti Lyrics in Hindi) - Jai Dev Jai Dev जय देव जय देव - Bhaktilok

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश जी का यह भजन "श्री सिद्धिविनायक आरती (Shri Siddhivinayak Aarti Lyrics in Hindi) - Jai Dev Jai Dev जय देव जय देव - Bhaktilok" सभी कार्यों के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना से गाया जाता है। विघ्नहर्ता गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और विवेक के अधिष्ठाता देव हैं। इस भजन के प्रत्येक शब्द में गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और चूषक वाहन का सुंदर वर्णन है।

इस भजन की मूल भावना विघ्न विनाश और शुभ-लाभ की प्राप्ति की है। जीवन में जब भी कोई नया कार्य प्रारंभ करना हो, तो गणेश जी का स्मरण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि वे ऋद्धि-सिद्धि के प्रदाता हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

गणेश पुराण के अनुसार, श्री गणेश जी की स्तुति और भजन सुनने से बुद्धि का विकास होता है, विद्या अर्जन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और घर में शांति का वातावरण बनता है।

प्रथम पूज्य श्री गणेश जी के जन्म और उनकी कथाओं का संपूर्ण विवरण जानने के लिए ब्रह्म पुराण गणेश महिमा का पाठ करें। गणेश संकीर्तन से मानसिक अशांति दूर होती है, बुद्धि कुशाग्र होती है और किसी भी कार्य में आने वाली विघ्न-बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के सम्मुख दूर्वा और मोदक अर्पित कर इस भजन का संकीर्तन करें। गायन के समय सिंदूर का तिलक लगाना शुभ होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

गणेश जी की पूजा में 'दूर्वा' (दूब घास) क्यों चढ़ाई जाती है?

दूर्वा शीतलता प्रदान करने वाली है। अनलासुर नामक दैत्य को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में उत्पन्न जलन को शांत करने के लिए मुनियों ने उन्हें दूर्वा चढ़ाई थी। तब से गणेश जी को दूर्वा अत्यंत प्रिय है।

गणेश जी के भजन किस दिन विशेष रूप से गाने चाहिए?

बुधवार का दिन और हर माह आने वाली संकष्टी व विनायक चतुर्थी की तिथियां गणेश आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

क्या प्रथम पूज्य गणेश जी का स्मरण हर पूजा से पहले जरूरी है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव से मिले वरदान के कारण किसी भी शुभ कार्य या देव पूजा की शुरुआत गणेश जी के पूजन व स्मरण से ही की जाती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 21 Sep 2026

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