श्री रामायण जी की आरती | Shri Ramayan Ji Ki Aarti in Hindi
श्री रामायण जी की आरती एक अत्यंत पावन एवं भक्तिमय कीर्तन है, जो भगवान श्री रामचंद्र जी की महिमा तथा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस की महानता का गुणगान करती है। यह आरती केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि रामकथा के समस्त पात्रों—श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, तथा बाल्मीकि, नारद, शुक, सनकादि ऋषियों—की भक्ति भावना का सामूहिक स्वरूप है। इस आरती में रामायण को "कीरति कलित ललित सिया पी की" कहकर उस दिव्य ग्रंथ की वंदना की गई है, जो कलियुग में भी मानव को मर्यादा, धर्म और भक्ति का मार्ग दिखाता है। यह आरती विशेष रूप से रामनवमी, विवाह पंचमी, मंगलवार, शनिवार तथा सायंकालीन आरती के समय गाई जाती है। जब भक्त शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ इसका स्मरण करता है, तो उसके जीवन से कलिमल दूर होकर श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics
आरती श्री रामायण जी की
आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिया पी की ।।
आरती श्री रामायण जी की…
गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद,
बाल्मीकि विज्ञान विशारद ।
सुक सनकादि शेष अरू शारद,
बरनी पवन सुत कीर्ति निकी ।।
आरती श्री रामायण जी की …
गावत वेद पुराण अष्टदस,
छओं शाश्त्र सब ग्रन्थ को रस ।
मुनिजन धन संतन को सरबस,
सार अंश सम्मत सब ही की ।।
आरती श्री रामायण जी की…
गावत संतत शम्बू भवानी,
अरू घट संभव मुनि विग्यानी ।
व्यास आदि कवी पुंज वखाणी,
काग भुसुंडि गरुड़ के ही की ।।
आरती श्री रामायण जी की…
कलिमल हरनि विषय रास फीकी,
सुभग सिगार मुक्ति जुवती की ।
दलन रोग भव भूरी अभी की,
तात मात सब विधि तुलसी की ।।
आरती श्री रामायण जी की…
आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
इस आरती का प्रत्येक पद भक्ति, शास्त्र और दर्शन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। पहले पद में कहा गया है—"आरती श्री रामायण जी की, कीरति कलित ललित सिया पी की" अर्थात् हम श्री रामायण की आरती करते हैं, जो श्री सीता-राम की सुंदर एवं यश से युक्त कीर्ति का वर्णन करती है। यहाँ "सिया पी" शब्द माता सीता और प्रभु श्रीराम दोनों की संयुक्त वंदना को दर्शाता है।
दूसरे पद में बताया गया है कि इस आरती को ब्रह्मा, नारद, बाल्मीकि, शुक, सनकादि, शेष, शारदा तथा पवनपुत्र हनुमान जैसे महान ऋषि-मुनि एवं देवता गाते हैं। यह दर्शाता है कि रामायण की महिमा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं, बल्कि देवताओं और ऋषियों द्वारा भी गाई जाती है। बाल्मीकि जी को "विज्ञान विशारद" कहा गया है, क्योंकि उन्होंने रामायण की रचना करके संसार को रामकथा का अमृत प्रदान किया।
तीसरे पद में अठारह वेद-पुराण, छह शास्त्र तथा समस्त ग्रंथों का सार रामायण को बताया गया है। यह पद इस बात पर बल देता है कि रामायण केवल एक काव्य नहीं, बल्कि समस्त शास्त्रों का सारतत्व है। मुनियों का धन, संतों का सर्वस्व और सभी मतों का सार रामायण ही है।
चौथे पद में शंभू (शिव), भवानी (पार्वती), घटसंभव (अगस्त्य मुनि), व्यास, कागभुसुंडि तथा गरुड़ जैसे महान भक्तों का उल्लेख है, जो सदैव रामायण की कीर्ति गाते रहते हैं। यह पद भक्ति परंपरा की निरंतरता को दर्शाता है।
अंतिम पद में रामायण को कलिमल हरनि अर्थात् कलियुग के पापों का नाश करने वाली, विषय रास फीकी अर्थात् सांसारिक भोगों को तुच्छ बनाने वाली, तथा मुक्ति रूपी सुंदर स्त्री का श्रृंगार बताया गया है। यह रोग, भव-बंधन और दुःखों का दलन करने वाली है और तुलसीदास जी के लिए यह माता-पिता के समान सर्वस्व है।
आरती का धार्मिक महत्व एवं फल | Significance & Benefits
श्री रामायण जी की आरती का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। यह आरती भक्त को केवल श्रीराम से नहीं, बल्कि समस्त रामकथा परंपरा से जोड़ती है। इसके नियमित गायन एवं श्रवण से निम्नलिखित लाभ माने जाते हैं—
- कलिमल का नाश: आरती में स्वयं कहा गया है कि यह कलियुग के पापों का हरण करती है।
- भव-बंधन से मुक्ति: यह जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की ओर अग्रसर करती है।
- रोग एवं दुःख का दलन: शारीरिक एवं मानसिक रोगों की शांति हेतु यह आरती अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।
- भक्ति भाव की वृद्धि: यह हृदय में श्रीराम के प्रति अनन्य भक्ति उत्पन्न करती है।
- पारिवारिक सुख-शांति: सायंकालीन आरती से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
यह आरती विशेष रूप से श्री राम स्तुति तथा श्री राम चालीसा के साथ पढ़ने पर विशेष फलदायी मानी जाती है।
आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation
श्री रामायण जी की आरती करने के लिए निम्नलिखित विधि का पालन करें—
आरती थाली सज्जा
- एक चांदी या पीतल की आरती थाली लें।
- उसमें घी या तिल के तेल का दीपक स्थापित करें।
- रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, तुलसी दल तथा इत्र रखें।
- श्रीराम, माता सीता एवं हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के समक्ष थाली रखें।
आरती विधि
- प्रातः या सायंकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धि करें।
- श्रीराम, सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान जी का ध्यान करें।
- दीपक प्रज्वलित करके थाली को दक्षिणावर्त घुमाते हुए आरती गाएं।
- आरती के पश्चात प्रसाद वितरित करें।
आरती का शुभ समय प्रातःकाल संध्या तथा सायंकालीन संध्या माना जाता है। मंगलवार, शनिवार तथा रामनवमी पर विशेष रूप से यह आरती की जाती है।
संबंधित मंत्र एवं स्तुति | Associated Mantra
श्री रामायण जी की आरती के साथ पढ़ें
श्री राम जय राम जय जय राम
श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्
नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्
इन मंत्रों के साथ आरती करने से भक्ति भाव और भी गहरा होता है। इसके साथ श्री हनुमान चालीसा तथा श्री राम स्तुति का पाठ अवश्य करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: श्री रामायण जी की आरती कब गाई जाती है?
यह आरती विशेष रूप से सायंकालीन आरती, रामनवमी, विवाह पंचमी, मंगलवार तथा शनिवार को गाई जाती है।
प्रश्न 2: क्या यह आरती घर में गा सकते हैं?
हाँ, यह आरती किसी भी शुभ दिन, पूजा स्थल पर शुद्ध भाव से गाई जा सकती है।
प्रश्न 3: आरती में कौन-कौन से देवता एवं ऋषियों का नाम आता है?
इसमें ब्रह्मा, नारद, बाल्मीकि, शुक, सनकादि, शेष, शारदा, हनुमान, शिव, पार्वती, अगस्त्य, व्यास, कागभुसुंडि तथा गरुड़ जी का नाम आता है।
प्रश्न 4: क्या इस आरती का पाठ करने से रोग दूर होते हैं?
आरती में स्वयं कहा गया है कि यह "दलन रोग भव भूरी अभी की" है, अर्थात् यह रोगों का नाश करती है। श्रद्धा एवं नियमित पाठ से लाभ मिलता है।
प्रश्न 5: आरती करते समय किन बातों का ध्यान रखें?
शुद्ध वस्त्र, स्वच्छ स्थान, दीपक, धूप, पुष्प तथा पूर्ण भक्ति भाव का होना आवश्यक है।
प्रश्न 6: क्या यह आरती रामचरितमानस से संबंधित है?
हाँ, यह आरती गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस की महिमा का गुणगान करती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें श्री रामायण जी की आरती का मूल पाठ, शब्दार्थ, भावार्थ एवं पूजा विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है। सामग्री का संकलन पारंपरिक भक्ति परंपरा, रामचरितमानस तथा प्रचलित आरती संग्रहों के आधार पर किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इसे श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ पढ़ें तथा अपने स्थानीय परंपरा के अनुसार पाठ करें।
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