Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

श्री हनुमान स्तवन श्रीहनुमन्नमस्कार (Shri Hanuman Stawan Hanumanna Namskarah Lyrics in Hindi) - Shree Hanuman Stawan by GULSHAN KUMAR

भजन "श्री हनुमान स्तवन श्रीहनुमन्नमस्कार (Shri Hanuman Stawan Hanumanna Namskarah Lyrics in Hindi) - Shree Hanuman Stawan by GULSHAN KUMAR" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। इस स्तवन में हनुमान जी की अनंत शक्तियों और विशेषताओं का वर्णन किया गया है। पहले श्लोक में,

प्रस्तावना एवं परिचय

श्री हनुमान स्तवन: भक्तों की संकट निवारिणी स्तुति

हनुमानजी की महिमा का गान करते हुए, भक्तों को मार्गदर्शन और साहस देने वाला यह स्तवन अत्यंत प्रभावशाली है।

श्री हनुमान स्तवन श्रीहनुमन्नमस्कार (Shri Hanuman Stawan Hanumanna Namskarah Lyrics in Hindi) - || सोरठा ||प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन ।जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ॥१॥अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम् ।दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ॥२॥सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम् ।रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि ॥३॥|| श्रीहनुमन्नमस्कार ||गोष्पदी-कृत-वारीशं मशकी-कृत-राक्षसम् ।रामायण-महामाला-रत्नं वन्देऽनिलात्मजम् ॥ १॥अञ्जना-नन्दनं-वीरं जानकी-शोक-नाशनम् ।कपीशमक्ष-हन्तारं वन्दे लङ्का-भयङ्करम् ॥ 2॥महा-व्याकरणाम्भोधि-मन्थ-मानस-मन्दरम् ।कवयन्तं राम-कीर्त्या हनुमन्तमुपास्महे ॥ 3॥उल्लङ्घ्य सिन्धोः सलिलं सलीलंयः शोक-वह्निं जनकात्मजायाः ।आदाय तेनैव ददाह लङ्कांनमामि तं प्राञ्जलिराञ्जनेयम् ॥ 4॥मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगंजितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् ।वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यंश्रीराम-दूतं शिरसा नमामि ॥ 5॥आञ्जनेयमतिपाटलाननंकाञ्चनाद्रि-कमनीय-विग्रहम् ।पारिजात-तरु-मूल-वासिनंभावयामि पवमान-नन्दनम् ॥ 6॥यत्र यत्र रघुनाथ-कीर्तनंतत्र तत्र कृत-मस्तकाञ्जलिम् ।बाष्प-वारि-परिपूर्ण-लोचनंमारुतिर्नमत राक्षसान्तकम् ॥ 7॥*** Singer: Hariharan *** 
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस स्तवन में हनुमान जी की अनंत शक्तियों और विशेषताओं का वर्णन किया गया है। पहले श्लोक में, उन्हें 'पवनकुमार' और 'ज्ञानघन' के रूप में व्यक्त किया गया है, जो उनके वायु पुत्र और ज्ञान के सागर होने का प्रतीक है। राम का नाम उनके हृदय में निवास करता है, जो भक्तों को प्रेरित करता है। दूसरी पंक्ति में, हनुमान जी को 'अतुलितबलधाम' कहा गया है, जो उनकी अद्वितीय शक्ति को दर्शाता है। उन पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है, जो दुष्टों का संहारक और भक्तों का रक्षक हैं। स्तवन की प्रत्येक पंक्ति हनुमान जी की विशेषताओं, जैसे कि वे रघुपति के प्रिय भक्त, ज्ञानियों में अग्रगण्य और वानर राजाओं के अधीश हैं, का विस्तार करती है।

हनुमान जी की महिमा का अनुकरण भक्तों के भावनात्मक अनुभव को भी दर्शाता है। ‘आञ्जनेयमतिपाटलाननं’ जैसे शब्द उनकी सुंदरता और वीरता का चित्रण करते हैं। जानकी के दुःखों का नाशक होने की बात उन्हें एक सौम्य, परंतु शक्तिशाली राजा के रूप में प्रस्तुत करती है। भक्तों को यहां यह संदेश मिलता है कि संकट के समय में, हनुमान जी उनकी रक्षा करेंगे। ‘यत्र यत्र रघुनाथ कीर्तनं’ में हनुमान जी की उपस्थिति को साक्षात्कारित करने का प्रयास किया गया है, जिससे भक्तों को प्रोत्साहन मिलता है कि राम का नाम जपने वाले हर स्थान पर हनुमान जी साथ हैं।

श्री हनुमान स्तवन भक्ति मार्ग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें शुद्ध भक्ति के साथ हनुमान जी की स्तुति की गई है। ये श्लोक न केवल भक्ति की गहराई को दर्शाते हैं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास को भी प्रगाढ़ करते हैं। हनुमान जी के प्रति भक्ति के माध्यम से भक्त सही मार्ग पर अग्रसर होते हैं। यह मार्ग संकल्प और समर्पण से भरा है, जहां भक्ति केवल एक साधना नहीं, बल्कि जीवन का उद्देश्य बन जाती है। हनुमान चालीसा और अन्य स्तोत्रों की छाया में, यह स्तवन भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे हनुमान जी की कृपा प्राप्त करें और उन्हें अपने जीवन में उतारें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह स्तवन वाल्मीकि रामायण से जुड़े भक्तिभाव की अद्भुत गाथा है, जिसमें हनुमान जी के चरित्र को विशेष रूप से उजागर किया गया है। हनुमान जी को भक्तों का दूत माना गया है। पौराणिक कथाओं में उनके अद्वितीय कार्यों का उल्लेख मिलता है, जैसे लंका का दहन, संजीवनी बूटी लाना आदि, जो यह दर्शाते हैं कि वे कठिनाईयों में सदा साथ रहते हैं। हनुमान जी की महिमा की तुलना जब अन्य देवताओं से की जाती है, तो वे न केवल ताकतवर, बल्कि सबसे विश्वासपूर्ण देवता माने जाते हैं। रामायण के प्रसंगों में उनकी सेवाभाव की गहराई को देखते हुए यह स्तवन भी उनके प्रति समर्पण का प्रतीक है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान स्तवन का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और तनाव में कमी आती है। यह भक्तों को शारीरिक तथा मानसिक शक्तियों में वृद्धि करता है। हनुमान जी की कृपा से कठिनाइयों का सामना करने की साहसिकता प्राप्त होती है। इस स्तवन का जप करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और धैर्य का संचार होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

सुबह के समय, विशेषकर सूर्योदय से पूर्व इस स्तवन का पाठ करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। भक्तों को चाहिए कि वे एक साफ स्थान पर बैठकर दिये का दीयों जलाएं और मन में हनुमान जी की छवि का ध्यान करें। समर्पण भाव से और एकाग्रता के साथ उन्हें इस स्तवन का पाठ करना चाहिए, ताकि हनुमान जी की कृपा प्राप्त हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या श्री हनुमान स्तवन का पाठ केवल हनुमान जयंती पर किया जा सकता है?

नहीं, श्री हनुमान स्तवन का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को इस स्तव का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है।

क्या हनुमान स्तवन का पाठ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है?

जी हां, नियमित रूप से हनुमान स्तवन का पाठ करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह चिंता और तनाव को कम करने में मदद करता है।

हनुमान जी की कौन सी विशेषता इस स्तवन में वर्णित है?

इस स्तवन में हनुमान जी की शक्ति, बुद्धिमत्ता, और उनका राम भक्त होना विशेष रूप से उल्लेखित है। यह दर्शाता है कि वे कठिनाईयों से लड़ने में सक्षम हैं।

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“श्री हनुमान स्तवन का यह पाठ हनुमान जी के अद्वितीय गुणों का गान करता है, भक्तों को संकटों से मुक्त करने की शक्ति प्रभावशाली है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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