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श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र (Shri Hanuman Langoolastra Stotram in Hindi) - Hanuman Stotra - Bhaktilok

138 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र: शक्ति और साहस का स्तोत्र

इस स्तोत्र के माध्यम से हनुमान जी की अद्भुत शक्तियों का वर्णन किया गया है, जिनसे भक्तों को साहस और बल मिलता है।

 श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र (Shri Hanuman Langoolastra Stotram in Hindi) - ॥ श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र ॥ हनुमन्नञ्जनीसूनो महाबलपराक्रम ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १ ॥मर्कटाधिप मार्ताण्डमण्डलग्रासकारक ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ २॥अक्षक्षपण पिङ्गाक्ष दितिजासुक्षयङ्कर ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ३ ॥रुद्रावतार संसारदुःखभारापहारक ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ४॥श्रीरामचरणाम्भोजमधुपायितमानस ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ५॥वालिप्रमथनक्लान्तसुग्रीवोन्मोचनप्रभो ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ६॥सीताविरहवाराशिभग्न सीतेशतारक ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ७॥रक्षोराजप्रतापाग्निदह्यमानजगद्वन ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ८॥ग्रस्ताशेषजगत्स्वास्थ्य राक्षसाम्भोधिमन्दर ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ९॥पुच्छगुच्छस्फुरद्वीर जगद्दग्धारिपत्तन।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १०॥जगन्मनोदुरुल्लङ्ग्यपारावारविलङ्घन ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ ११॥स्मृतमात्रसमस्तेष्टपूरक प्रणतप्रिय ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १२॥रात्रिञ्चरतमोरात्रिकृन्तनैकविकर्तन ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १३॥जानक्या जानकीजानेः प्रेमपात्र परन्तप ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥१४ ॥भीमादिकमहावीरवीरावेशावतारक ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १५॥वैदेहीविरहक्लान्तरामरोषैकविग्रह ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १६॥वज्राङ्गनखदंष्ट्रेश वज्रिवज्रावगुण्ठन ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १७॥अखर्वगर्वगन्धर्वपर्वतोद्भेदनस्वर ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १८॥लक्ष्मणप्राणसन्त्राण त्राततीक्ष्णकरान्वय ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ १९॥रामादिविप्रयोगार्त भरताद्यार्तिनाशन ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ २०॥द्रोणाचलसमुत्क्षेपसमुत्क्षिप्तारिवैभव ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ २१॥सीताशीर्वादसम्पन्न समस्तावयवाक्षत ।लोलल्लाङ्गूलपातेन ममारातीन्निपातय ॥ २२॥इत्येवमश्वत्थतलोपविष्टःशत्रुञ्जयं नाम पठेत्स्वयं यः ।स शीघ्रमेवास्तसमस्तशत्रुःप्रमोदते मारूतजप्रसादात् ॥ २३ ॥इति श्री हनुमाल्लाङ्गूलास्त्र स्तोत्रम् ।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र में भक्तजन भगवान हनुमान के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट करते हैं, जो न केवल रामभक्त हैं बल्कि समस्त जीवों के रक्षक भी हैं। इस स्तोत्र का प्रथम श्लोक हनुमान की अपार शक्ति और बल पर ध्यान केंद्रित करता है। यहाँ हनुमान जी को 'महाबल' और 'पराक्रम' के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो अपने लांगूलastra (लाठी) के माध्यम से शत्रुओं का संहार करते हैं। यह श्लोक भक्तों को याद दिलाता है कि संकटों में हनुमान जी की कृपा से अच्छे परिणाम मिलते हैं। प्रत्येक श्लोक में हनुमान जी की विभिन्न लीलाओं और शक्तियों का वर्णन है, जैसे 'मर्कटाधिप' एवं 'मार्ताण्डमण्डलग्रासकारक', जो उनके अनंत रूपों को दर्शाते हैं।

जैसे-जैसे स्तोत्र आगे बढ़ता है, हनुमान जी की महिमा को और गहराई से दर्शाया गया है। श्लोक में 'अक्षक्षपण पिङ्गाक्ष' की बात की गई है, जिसका अर्थ यह है कि हनुमान जी सभी तरह के विरोधों को समाप्त करते हैं और दुष्टों का नाश करते हैं। इस स्तोत्र में 'सीताविरह' और 'वैदेहीविरह' जैसी पंक्तियाँ शबदों के माध्यम से भावनात्मक गहराई को समझाती हैं, जहां हनुमान जी माता सीता की रक्षा और राम के प्रेम का प्रतीक हैं। भक्त को अपने हृदय में हनुमान जी के प्रति अप्रतिम प्रेम एवं भक्ति का अनुभव होता है।

यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र केवल प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह भक्तिपथ का अनुसरण एवम् समाज के अन्य जरूरतमंद जनों के प्रति करुणा का संदेश भी है। हनुमान जी, जो कि रुद्रावतार हैं, संसार के दुखों को दूर करते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्ति का मार्ग खुलता है, जिससे भक्त में एक स्थायी शांति और शक्ति का अनुभव होता है। इसे 'प्रणतप्रिय' कहा गया है, जो यह दर्शाता है कि हनुमान जी अपने भक्तों की भक्ति को सदा स्वीकार करते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र का उल्लेख रामायण में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां हनुमान जी का रूद्र स्वरूप संसार के संकटों को समाप्त करता है। पुराणों में हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस स्तोत्र के माध्यम से भक्त जन हनुमान जी की दया और कृपा की याचना करते हैं। इस प्रकार, यह स्तोत्र केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि हनुमान जी का अभिनव रूप और उनके प्रति श्रद्धा का प्रतीक भी है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र का जप करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि यह व्यक्ति में अद्भुत बल और साहस का संचार करता है। इसके नियमित पाठ से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है और उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह स्तोत्र संकट के समय में एक आस्था का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से सुबह की पूजा के समय करना चाहिए। सुबह-सवेरे स्नान के बाद एक स्वच्छ स्थान पर लाल या पीले कपड़े बिछाकर बैठें। सामने भगवान हनुमान की प्रतिमा रखें और उन्हें खीर या बूंदी का भोग अर्पित करें। ध्यानपूर्वक और श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री हनुमान लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करने से क्या लाभ होता है?

इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक एवं आध्यात्मिक बल मिलता है। साथ ही, यह दुष्टों से रक्षण और संकटों से मुक्ति में सहायक होता है।

क्या इस स्तोत्र का पाठ नियमित रूप से किया जा सकता है?

हाँ, यह स्तोत्र किसी भी समय और हर दिन पढ़ा जा सकता है, लेकिन सुबह के समय इसका पाठ करने से अधिक लाभ मिलता है।

क्या इस स्तोत्र का पाठ केवल विशेष अवसरों पर करना चाहिए?

नहीं, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए इसे नियमित रूप से करना बहुत अच्छा है। विशेष अवसरों पर, जैसे हनुमान जयंती पर, इसका विशेष महत्व होता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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