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शिव अष्टोत्रम (Shiva Ashtothram Lyrics in Hindi) - 108 Names of Lord Shiva - Bhaktilok

145 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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शिव अष्टोत्रम: महादेव के 108 नाम

महादेव के 108 नामों का जप करते हुए आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होगा।

ॐ नमः शिवाय 1. ॐ महादेवाय नमः। 2. ॐ चन्द्रशेखराय नमः। 3. ॐ भूतनाथाय नमः। 4. ॐ नटराजाय नमः। 5. ॐ हराय नमः। 6. ॐ त्र्यंबकाय नमः। 7. ॐ काशीराजाय नमः। 8. ॐ बम बम भोले नमः। 9. ॐ गंगाधराय नमः। 10. ॐ शिवाय नमः। 11. ॐ शिव शंकराय नमः। 12. ॐ अष्टमूर्ति नमः। 13. ॐ परमहंसाय नमः। 14. ॐ नीलकण्ठाय नमः। 15. ॐ मृदज हृद्याणां वरदाय नमः। 16. ॐ उमा-पतये नमः। 17. ॐ परमेश्वराय नमः। 18. ॐ रुद्राय नमः। 19. ॐ शांतिकराय नमः। 20. ॐ जटाधराय नमः। 21. ॐ वियोगशांताय नमः। 22. ॐ पतंजलिनायकाय नमः। 23. ॐ शिवोपाध्याय नमः। 24. ॐ एकनाथाय नमः। 25. ॐ वरदाय नमः। 26. ॐ सूर्यनारायणाय नमः। 27. ॐ चक्रधाराय नमः। 28. ॐ शिवसिंहाय नमः। 29. ॐ अंशुमती देव्यै नमः। 30. ॐ ब्रह्मा-हत्यामोक्षाय नमः। 31. ॐ प्रचंडरणाय नमः। 32. ॐ सिद्धिविनायकाय नमः। 33. ॐ सर्वभूतमध्येश्वराय नमः। 34. ॐ वैराग्यभैरवाय नमः। 35. ॐ वृषभध्वजाय नमः। 36. ॐ महादिवसे नमः। 37. ॐ प्रियदर्शनाय नमः। 38. ॐ ज्ञानेश्वराय नमः। 39. ॐ भार्गवाय नमः। 40. ॐ श्रविष्णुजाय नमः। 41. ॐ काशीवासी नमः। 42. ॐ अव्यक्ताय नमः। 43. ॐ भव्याय नमः। 44. ॐ शार्दूल शुक्लाय नमः। 45. ॐ मार्कंडेयाय नमः। 46. ॐ तैलाद्र तिलकाय नमः। 47. ॐ प्राणायामाय नमः। 48. ॐ शव्याय नमः। 49. ॐ आकाशद्याय नमः। 50. ॐ श्वेताय नमः। 51. ॐ क्षीराधाराय नमः। 52. ॐ सतीश्वराय नमः। 53. ॐ आपन्नाकोटी नाशाय नमः। 54. ॐ द्वादशाक्षरमंत्राय नमः। 55. ॐ शिलादवाय नमः। 56. ॐ सर्वाय नमः। 57. ॐ अक्रेताय नमः। 58. ॐ त्रैधातुकाय नमः। 59. ॐ सप्तऋषिनायकाय नमः। 60. ॐ मृद सेवकाय नमः। 61. ॐ वृषारूढाय नमः। 62. ॐ चक्रधराय नमः। 63. ॐ कूलनायकाय नमः। 64. ॐ गामायामाय नमः। 65. ॐ ध्वजनायकाय नमः। 66. ॐ भूत्वेश्वराय नमः। 67. ॐ अचिंत्याय नमः। 68. ॐ सर्वज्ञाय नमः। 69. ॐ सूक्ष्माय नमः। 70. ॐ अव्यक्तदृशाय नमः। 71. ॐ दंभनाय नमः। 72. ॐ जीवः श्वासाय नमः। 73. ॐ शक्राय नमः। 74. ॐ ब्रह्मा-हत्यामोक्षाय नमः। 75. ॐ सर्वजनहिताय नमः। 76. ॐ गगनमयाय नमः। 77. ॐ महागणेशाय नमः। 78. ॐ चैतन्यमुक्ताय नमः। 79. ॐ रुद्रवारि नमः। 80. ॐ शालिग्रामाय नमः। 81. ॐ संयमाय नमः। 82. ॐ श्वेताय नमः। 83. ॐ नीलाय नमः। 84. ॐ आयुर्वेदाय नमः। 85. ॐ अष्टरात्रिकाय नमः। 86. ॐ जपाध्याय नमः। 87. ॐ क्षेमकराय नमः। 88. ॐ आभ्यंतराय नमः। 89. ॐ कुंकुमाय नमः। 90. ॐ च aqqर्याय नमः। 91. ॐ वायुर्थाय नमः। 92. ॐ सर्पाय नमः। 93. ॐ यज्ञेश्वराय नमः। 94. ॐ वैश्वानराय नमः। 95. ॐ पार्वतीनाथाय नमः। 96. ॐ जगन्मयाय नमः। 97. ॐ गणेशाय नमः। 98. ॐ घराय नमः। 99. ॐ पराय नमः। 100. ॐ निर्मलाय नमः। 101. ॐ तैलाधराय नमः। 102. ॐ प्रौढाय नमः। 103. ॐ सिद्धाश्रमी नमः। 104. ॐ महेश्वराय नमः। 105. ॐ पाषाणाय नमः। 106. ॐ निर्गुणाय नमः। 107. ॐ आत्मनंदनाय नमः। 108. ॐ अव्यक्ताय नमः।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

शिव अष्टोत्रम में भगवान शिव के 108 नामों का उल्लेख किया गया है, जो उनकी अनंत विशेषताओं और गुणों को दर्शाते हैं। इस भजन का मुख्य संदेश शिव की दिव्यता और कृपा का अनुभव करने के लिए उन्हें सच्चे मन से स्मरण करना है। प्रत्येक नाम का एक विशेषार्थ और महत्वपूर्ण चेतना है, जैसे 'महादेवाय नमः' का अर्थ है कि हम महादेव, जिसके बिना कोई आरंभ नहीं होता, उनकी स्तुति कर रहे हैं। इसी तरह, 'शिवाय नमः' के द्वारा भक्ति की शक्ति और निर्मलता की प्रतीक के रूप में उनकी आराधना होती है। इस प्रकार भजन में प्रत्येक नाम, भक्तों के हृदय चक्षु को खोलने और उन्हें आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करने के लिए गहराई से जुड़ा हुआ है।

गीत की प्रत्येक पंक्ति में भगवान शिव की महिमा, उनके आश्रय, उनके स्वरूप की सुंदरता और उन पर विश्वास रखने वाले भक्तों के लिए भक्ति का अद्वितीय भाव छिपा हुआ है। जिस प्रकार शिव तांडव करते हैं, उसी प्रकार भक्तों को अपने भीतर की आंतरिक अशांति और दुख को दूर करने के लिए भगवान शिव को स्मरण करना चाहिए। हर नाम में प्रेम और भक्ति का प्रतिबिंब है, जो न केवल व्यक्तिगत कल्याण बल्कि सभी जीवों की भलाई के लिए आवश्यक है। 'गंगाधराय नमः' जैसे नाम के द्वारा गंगा के पवित्र जल के साथ शिव का संबंध दर्शाया गया है, जो आत्मा की शुद्धि का प्रतीक है।

यह अष्टोत्रम भक्ति मार्ग का गहरा अनुभव कराता है, जहाँ शिव की आराधना उन सभी धारणाओं और भ्रांतियों से मुक्ति दिलाती है जो मानव मन को अपूर्णता की ओर ले जाती हैं। भगवान शिव तात्त्विक साँचें के रूप में प्रस्तुत हैं, जो सृजन व संहार के एकसाथ प्रतीक हैं। उनके नामों का जाप करते समय, भक्त आत्म को ध्यान में रखते हुए ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शांति और सच्ची भक्ति की प्राप्ति होती है। शिव के नामों के माध्यम से हम संपूर्ण सृष्टि के साथ एकता और समता का अनुभव करते हैं, जो हमें व्यक्तिगत और सामाजिक दृष्टिकोण से सशक्त बनाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

भगवान शिव के 108 नामों का यह संग्रह कई पौराणिक ग्रंथों में उल्लिखित हैं, जैसे कि महाभारत और पुराणों में। शिव को संहारक और सृष्टिकर्ता दोनों के रूप में पूजा जाता है और उनके नामों में उनके अनंत स्वरूप का दर्शन होता है। यह अष्टोत्रम विशेष रूप से भक्तों को मानसिक शांति, आत्म-जागरूकता और जीवन के कठिनाइयों को पार करने में मदद करता है। पुराणों के अनुसार, भगवान राम और श्री कृष्ण ने भी शिव का ध्यान करके अनेक बार शक्ति प्राप्त की थी। इस भजन के गहरे श्रद्धाभाव से भक्ति का फल अनंत होता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। शिव अष्टोत्रम का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मशुद्धि और व्यक्तिगत कल्याण प्राप्त होता है। यह नियमित जाप करने से भक्त की चिंता, तनाव और भय का नाश होता है, और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। शिव की कृपा से आशा और सामर्थ्य का संचार होता है, जो कठिन समय में सहारा देता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

शिव अष्टोत्रम का जाप सुबह के समय उठने के बाद या संध्याकाल में शांति के लिए किया जा सकता है। पूजा के समय एक दीया जलाकर और ताजे फूलों का भोग अर्पित करना चाहिए। शांतिपूर्वक समाधि में बैठकर ध्यान करते हुए हृदय को समर्पित करना आवश्यक है। इस प्रकार की साधना से भक्त को पुण्य लाभ और शांति की अनुभूति होती है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

शिव अष्टोत्रम का महत्व क्या है?

शिव अष्टोत्रम भक्तों को मानसिक शांति, आत्म-जागरूकता और जीवन के कष्टों से विजय दिलाने में मदद करता है, जिससे उनकी भक्ति में गहराई आती है।

इस भजन का जाप कब करना चाहिए?

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या में करना अनुकूल होता है, जब मन शांत और साक्षी भाव में होता है।

क्या शिव अष्टोत्रम का प्रभाव तात्कालिक होता है?

हाँ, भक्तिपूर्वक जाप करने से तुरंत मानसिक शांति और विश्वास की वृद्धि होती है, और दीर्घकालिक प्रभाव से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखे जा सकते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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