आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
Matarani Bhajan

शनि अष्टोत्तर शतनामावली (Shani Ashtottar Shatanamavali Lyrics in Hindi) -Sri Sanaischara Ashtottara Shatanamavali - Bhaktilok

112 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

शनि अष्टोत्तर शतनामावली(Shani Ashtottar Shatanamavali Lyrics in Hindi) - 


ॐ शनैश्चराय नमः |

ॐ शांताय नमः |

ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः |

ॐ शरण्यै नमः |

ॐ वरेण्याय नमः |

ॐ सर्वेषाय नमः |

ॐ सौम्याय नमः |

ॐ सुरावन्दाय नमः |

ॐ सुरलोकविहारिणे नमः | 9


ॐ सुखासनोपविष्टय नमः |

ॐ सुन्दराय नमः |

ॐ घनाय नमः |

ॐ घनरूपाय नमः |

ॐ घनभरणधारिणे नमः |

ॐ घनसार्विलेपाय नमः |

ॐ खद्योताय नमः |

ॐ मंदाय नमः |

ॐ मन्दाचेष्टाय नमः | 18


ॐ महानियागुणात्मने नमः |

ॐ मर्त्यपावनपादाय नमः |

ॐ महेशाय नमः |

ॐ छायापुत्राय नमः |

ॐ शरवाय नमः |

ॐ शरतुनिराधारिणे नमः |

ॐ चरस्थिरस्वभावाय नमः |

ॐ चंचलाय नमः |

ॐ नीलवर्णाय नमः | 27


ॐ नित्याय नमः |

ॐ नीलांजनानिभाय नमः |

ॐ नीलाम्बरविभूषाय नमः |

ॐ निश्चालय नमः |

ॐ वेद्याय नमः |

ॐ विधिरूपाय नमः |

ॐ अन्तकदर्भूमाये नमः |

ॐ भेदासनस्वभावाय नमः |

ॐ वज्रदेहाय नमः | 36


ॐ वैराग्यदाय नमः |

ॐ वीराय नमः |

ॐ वीतरोगभाय नमः |

ॐ विपत्परम्परेषाय नमः |

ॐ विश्ववन्दाय नमः |

ॐ गृधनवहाय नमः |

ॐ गुडाय नमः |

ॐ कूर्मांगाय नमः |

ॐ कुरूपिणे नमः | 45


ॐ कुत्सिताय नमः |

ॐ गुणाध्याय नमः |

ॐ अधियाय नमः |

ॐ अविद्यामूलनासाय नमः |

ॐ विद्या विद्यास्वरूपिणे नमः |

ॐ आयुष्यकरणाय नमः |

ॐ आपदुद्धर्त्रे नमः |

ॐ विष्णु भक्ताय नमः |

ॐ वशीने नमः | 54


ॐ विद्याघमवेदिने नमः |

ॐ विधिस्तुत्याय नमः |

ॐ वन्दयाय नमः |

ॐ विरूपाक्षाय नमः |

ॐ वरिष्ठाय नमः |

ॐ मक्षिमाय नमः |

ॐ वज्रंकुशाधाराय नमः |

ॐ वरदभयहस्ताय नमः |

ॐ वामनाय नमः | 63


ॐ ज्येष्ठपत्नीसमेथाय नमः |

ॐ श्रेष्ठाय नमः |

ॐ मिताबाशिने नमः |

ॐ कष्टौघंशाकाय नमः |

ॐ पुष्टिदाय नमः |

ॐ स्तुथयाय नमः |

ॐ स्तोत्रगमय नमः |

ॐ भक्तिवश्य नमः |

ॐ भाणवे नमः | 72


ॐ भानुपुत्राय नमः |

ॐ भव्याय नमः |

ॐ पवनाय नमः |

ॐ धनुर्मंडलसंस्थाय नमः |

ॐ धनदाय नमः |

ॐ धनुष्मते नमः |

ॐ तनुप्रकाशदेहाय नमः |

ॐ तमसाय नमः |

ॐ अशेषजनवन्दाय नमः | 81


ॐ विषकफडैने नमः |

ॐ वशिकात्जनेशाय नमः |

ॐ पाशुनं पतये नमः |

ॐ खेचराय नमः |

ॐ खगेसाय नमः |

ॐ घनिलाम्बराय नमः |

ॐ कथिन्यमानसाय नमः |

ॐ आर्यगणस्तुथ्याय नमः |

ॐ नीलछत्रय नमः | 90


ॐ नित्याय नमः |

ॐ निर्गणाय नमः |

ॐ गुणात्मने नमः |

ॐ निरामाय नमः |

ॐ निन्दयाय नमः |

ॐ वन्दनीयाय नमः |

ॐ धीराय नमः |

ॐ दिव्यदेहाय नमः |

ॐ दीनर्तिहरणाय नमः | 99


ॐ दैन्यसाक्षराय नमः |

ॐ आर्यजंगनाय नमः |

ॐ क्रुराय नमः |

ॐ क्रुराचेष्टाय नमः |

ॐ कामक्रोधकाराय नमः |

ॐ कालत्रपुत्रशत्रुत्वकरणाय नमः |

ॐ परिपोषितभक्ताय नमः |

ॐ परभीतिहराय नमः |

ॐ भक्तसंघमनोभिष्टफलदाय नमः 108


इति श्री शनि अष्टोतर शतनामावली: ||


सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "शनि अष्टोत्तर शतनामावली (Shani Ashtottar Shatanamavali Lyrics in Hindi) -Sri Sanaischara Ashtottara Shatanamavali - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!