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गणपती आरती लिरिक्स इन मराठी (Ganpatichi Aarti in Marathi Lyrics in Hindi) - Sukhkarta Dukhharta - Bhaktilok

123 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

प्रस्तावना एवं परिचय

सुख करता दुख हर्ता, वार्ता विघ्नाची |

नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची ||

सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची |

कंठी झलके माल मुकताफळांची ||

जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा |

चंदनाची उटी कुमकुम केशरा ||

हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा |

रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया ||

जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना |

सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना ||

दास रामाचा वाट पाहे सदना |

संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना ||

जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति

दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति .. जय देव जय देव

शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को |

दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को ||

हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को |

महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को ||

जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी |

विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी ||

कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी |

गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी ||

जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

भावभगत से कोई शरणागत आवे |

संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे ||

ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे |

गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे ||

जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता

धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता .. जय देव जय देव

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "गणपती आरती लिरिक्स इन मराठी (Ganpatichi Aarti in Marathi Lyrics in Hindi) - Sukhkarta Dukhharta - Bhaktilok " ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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