Parvati Stotram

बूटी ला दे रे बालाजी (Buti Laa De Re Balaji Lyrics in Hindi) - Balaji Bhajan - Bhaktilok

122 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भजन (Bhajan / Devotional Song)

बूटी ला दे रे बालाजी (Buti Laa De Re Balaji Lyrics in Hindi) - Balaji Bhajan

प्रकाशित तिथि: 2023/09 | श्रेणी: भजन, हनुमान स्तुति | संदर्भ: श्री हनुमान चालीसा

सनातन संस्कृति और हनुमान भक्ति की अनूठी परंपरा में संकटमोचन महावीर हनुमान जी को संकटों का निवारण करने वाले परम आराध्य के रूप में पूजा जाता है। यह अत्यंत पावन और भावपूर्ण भजन "बूटी ला दे रे बालाजी" भगवान हनुमान के उस ऐतिहासिक प्रसंग की याद दिलाता है जब उन्होंने लक्ष्मण जी के प्राण बचाने के लिए द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर संपूर्ण सृष्टि को विस्मय में डाल दिया था। इस भजन का मुख्य भाव भक्त की अपने आर्त प्रभू के प्रति अनन्य पुकार, पूर्ण शरणागति और संकट के समय केवल और केवल हनुमान जी के चरणों में आश्रय पाने की व्याकुलता को दर्शाता है। संगीत, लय और भक्ति रस से ओतप्रोत यह संकीर्तन न केवल उत्तर भारत के मंदिरों और मेलों में, बल्कि देश-विदेश के हनुमान भक्तों द्वारा मंगलवार, शनिवार और हनुमान जयंती के पावन अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। बरनउँ रघुबर बिमल सुजोसु, जो दायकु फल चारि।। बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी! लक्ष्मण जी के प्राण बचा ले, संजीवनी ले आ रे बालाजी। बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी... राम भक्त जग में महावीरा, तेरा नाम जगत में चीरा। अंजनि पुत्र पवनसुत प्यारे, संकट मोचन प्राण हमारे।। लंका जल रही रावण की छाती, गूंजे तेरी जग में ख्याति। ऐसी कृपा तू आज दिखा दे, बूटी ला दे रे बालाजी... बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी... द्रोणगिरि पर्वत तू पहुँचा, कौन सा पर्वत तुझको सूझा। उखाड़ के पर्वत हाथ में लाया, लक्ष्मण वीर को होश में लाया।। वैद्यों ने जब हार थी मानी, अमर हो गई तेरी कहानी। वैसी शक्ति आज जगा दे, बूटी ला दे रे बालाजी... बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी... संकट मोचन नाम तुम्हारा, भक्त जनों का तू ही सहारा। जो भी तेरे दर पर आता, मनचाहा फल झोली पाता।। 'भक्तलोक' के मन में तू ही, तेरे बिन दूजा कोई नहीं। चरणों में मुझको भी बिठा ले, बूटी ला दे रे बालाजी... बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी, लक्ष्मण जी के प्राण बचा ले, संजीवनी ले आ रे बालाजी!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी के परम पराक्रमी और संकटमोचन स्वरूप का आह्वान करता है। रामायण काल में जब मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे और संपूर्ण वानर सेना में शोक की लहर दौड़ गई थी, तब लंका के वैद्य सुषेन के कहने पर हनुमान जी ने हिमालय जाकर संजीवनी बूटी लाने का दायित्व उठाया था। इस भजन में उसी ऐतिहासिक प्रसंग को आधार बनाकर भक्त अपने जीवन के दुखों, संकटों और बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए बालाजी से गुहार लगाता है।

भजन का भाव यह है कि जिस प्रकार हनुमान जी ने असंभव कार्य को संभव कर दिखाया और लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा कर प्रभु श्री राम के संकट को दूर किया, उसी प्रकार वे अपने प्रत्येक भक्त के जीवन के कठिन समय में संजीवनी रूपी कृपा लेकर आएं और समस्त कष्टों का निवारण करें। यह भजन साधক के अंतर्मन को यह विश्वास दिलाता है कि हनुमान जी अमर हैं और आज भी सच्चे मन से पुकारने पर अपने भक्तों की रक्षा के लिए तुरंत प्रकट होते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • आरध्य देव: संकटमोचन महावीर हनुमान (बालाजी महाराज)।
  • मुख्य प्रसंग: लक्ष्मण मूर्छा और संजीवनी बूटी लाने की पौराणिक घटना।
  • भक्ति का भाव: अनन्य प्रेम, अटूट विश्वास, संकट निवारण और पूर्ण शरणागति।
  • सांस्कृतिक महत्व: उत्तर भारत, राजस्थान के मेहंदीपुर बालाजी और सालासर धाम तथा संपूर्ण देश के हनुमान मंदिरों में अत्यंत लोकप्रिय।
  • मानसिक लाभ: इस भजन के नियमित स्मरण से भय, चिंता, नकारात्मक ऊर्जा और संकटों से मुक्ति मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा, चौकी, जागरण या सुंदरकांड पाठ के समय गाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके, हनुमान जी के चित्र या विग्रह के समक्ष चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित कर इस भजन का संकीर्तन करना चाहिए। इसके साथ ही आप श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान श्री राम के परम भक्त, माता अंजनी और केसरी नंदन हनुमान जी हैं। सनातन परंपरा में उन्हें कलयुग के प्रत्यक्ष जाग्रत देवताओं में गिना जाता है। संत तुलसीदास जी और गोस्वामी परंपरा से प्रेरित होकर लोक कवियों ने ऐसे भजनों की रचना की है जो आम जनमानस की भाषा में भगवान की महिमा का गुणगान करते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संगीत और पारंपरिक भक्ति संकीर्तन की शैली में रचित यह भजन मौखिक परंपरा से पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ा है। इसमें रामायण के युद्ध कांड की उस महिमा को दर्शाया गया है जो वीरता, निष्ठा और भाई के प्रति प्रेम का प्रतीक है। आधुनिक समय में इसे विभिन्न भजन गायकों द्वारा अपनी मधुर आवाज़ में रिकॉर्ड किया गया है, जो यूट्यूब और अन्य धार्मिक प्लेटफार्मों पर खूब सुना जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी, अवधी और राजस्थानी लोक बोलियों के सुंदर मिश्रण से तैयार किया गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जो श्रोता के मन में तुरंत उतर जाता है। शब्दों की सरलता और लयबद्धता ऐसी है कि बच्चा-बच्चा इसे आसानी से गुनगुना सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

इस भजन से हमें यह गहरी सीख मिलती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा या संकट क्यों न आ जाए, यदि प्रभु पर अटूट विश्वास और सेवा भाव बना रहे, तो हर असंभव कार्य संभव हो जाता है। हनुमान जी का चरित्र हमें यह सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा दूसरों की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए होना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
बालाजी श्री हनुमान जी बाल रूप एवं संकटमोचन रूप
संजीवनी जीवन देने वाली दिव्य बूटी लक्ष्मण मूर्छा निवारण हेतु औषधि
द्रोणगिरि हिमालय का एक पर्वत जहाँ संजीवनी बूटी पाई जाती थी
संकट मोचन संकटों को दूर करने वाला हनुमान जी का प्रसिद्ध नाम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"बूटी ला दे रे बालाजी, संकट टाल दे रे बालाजी!" - इस पंक्ति में भक्त सीधे हनुमान जी से प्रार्थना कर रहा है कि हे बालाजी! जिस प्रकार आपने संजीवनी लाकर संकट टाला था, वैसे ही हमारे जीवन के भी समस्त संकट दूर कर दीजिए।
"लंका जल रही रावण की छाती, गूंजे तेरी जग में ख्याति।" - हनुमान जी के पराक्रम और लंका दहन की घटना की ओर संकेत करते हुए उनकी अपरंपार महिमा का गुणगान किया गया है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्री रामदूतम शरणं प्रपद्ये॥

इस श्लोक का स्मरण करने से भजन का फल कई गुना बढ़ जाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम बूटी ला दे रे बालाजी (Buti Laa De Re Balaji)
आराध्य देवता संकटमोचन श्री हनुमान जी (बालाजी)
रचनाकार / परंपरा पारंपरिक लोक भजन (Traditional Lok Bhajan)
भाषा हिंदी एवं राजस्थानी लोक मिश्रित
मुख्य थीम संकट निवारण, भक्ति और शरणागति
उपयुक्त अवसर मंगलवार, शनिवार, जागरण, हनुमान जयंती, कीर्तन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: "बूटी ला दे रे बालाजी" भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन भगवान श्री राम के परम भक्त संकटमोचन हनुमान जी (बालाजी) को समर्पित है।

Q2: इस भजन में किस पौराणिक घटना का उल्लेख है?

इसमें रामायण काल के दौरान लक्ष्मण मूर्छा के समय हनुमान जी द्वारा संजीवनी बूटी लाने की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख है।

Q3: यह भजन किस दिन गाना या सुनना सबसे उत्तम माना जाता है?

मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा के समय इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से फलदायी होता है।

Q4: क्या इस भजन को घर पर होने वाले अनुष्ठान में गा सकते हैं?

हाँ, इसे घर के सत्संग, जागरण, सुंदरकांड पाठ या किसी भी धार्मिक आयोजन में आसानी से गाया जा सकता है।

Q5: इस भजन को गाने से क्या आध्यात्मिक लाभ मिलता है?

इसके गायन से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है और हनुमान जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

Q6: क्या इस भजन के साथ हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है?

अवश्य, भजन के साथ हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

Q7: इस भजन की भाषा शैली कैसी है?

इसकी भाषा अत्यंत सरल हिंदी और लोक बोलियों का मिश्रण है जो हर भक्त की जुबान पर आसानी से चढ़ जाती है।

Q8: क्या यह भजन ऑनलाइन ऑडियो या वीडियो फॉर्मेट में उपलब्ध है?

जी हाँ, विभिन्न कलाकारों द्वारा यह भजन यूट्यूब और अन्य संगीत प्लेटफार्मों पर उपलब्ध है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, लोक साहित्य और हनुमान उपासना के ग्रंथों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। Bhaktilok.in का उद्देश्य पाठकों तक प्रामाणिक, शुद्ध और उच्च कोटि की धार्मिक सामग्री पहुँचाना है। सभी लिरिक्स और भावार्थ को पारंपरिक स्रोतों के अनुरूप सत्यापित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस - गोस्वामी तुलसीदास जी (लंका कांड प्रसंग)
  • पारंपरिक हनुमान लोक भजन संग्रह
  • भक्ति संकीर्तन एवं लोक गाथा परंपरा

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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