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अर्थ सहित माँ पार्वती के 108 नाम ( Arth Sahit Maa Parwati Ke 108 Naam Lyrics in Hindi) - Mata Parvati ke 108 Naam - Bhaktilok

665 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

अर्थ सहित माँ पार्वती के 108 नाम ( Arth Sahit Maa Parwati Ke 108 Naam Lyrics in Hindi) - Mata Parvati ke 108 Naam:-

अर्थ सहित माँ पार्वती के 108 नाम ( Arth Sahit Maa Parwati Ke 108 Naam Lyrics in Hindi) - Mata Parvati ke 108 Naam - Bhaktilok

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

अर्थ सहित माँ पार्वती के 108 नाम ( Arth Sahit Maa Parwati Ke 108 Naam Lyrics in Hindi) - 

आद्य – प्रारंभिक या फिर वास्तविकता

आर्या – यह देवी का नाम है

अभव्या – यह नाम भय का प्रतीक है

अएंदरी – भगवान इंद्र की शक्ति

अग्निज्वाला – यह नाम आग का प्रतीक है

अहंकारा – यह नाम गौरव का प्रतीक है

अमेया – यह नाम उपाय से परे का प्रतीक है

अनंता – यह नाम अनंत का एक प्रतीक है

अनंता – इस नाम का अर्थ अनंत है

अनेकशस्त्रहस्ता – कई हथियारों को रखने वाली देवी

अनेकास्त्रधारिणी – वह देवी जो कई हथियारों को धारण करती हो

अनेकावारना – कई रंगों की देवी

अपर्णा – एक वह व्यक्ति जो उपवास के दौरान कुछ नहीं कहता है यह उसका प्रतीक है

अप्रौधा – वह जो उम्र नही लेता यह उसका प्रतीक है

बहुला – विभिन्न रूपों वाली

बहुलप्रेमा- हर किसी से प्यार करने वाली

बलप्रदा – यह नाम ताकत का दाता का प्रतीक है

भाविनी – खूबसूरत औरत का प्रतीक

भव्य – भविष्य का प्रतीक

भद्राकाली – काली देवी के रूपों में से एक देवी

भवानी – यह ब्रह्मांड की निवासी देवी

भवमोचनी – ब्रह्मांड की समीक्षक का प्रतीक

भवप्रीता – ब्रह्मांड में हर किसी से प्यार पाने वाली देवी

भव्य – यह नाम भव्यता का प्रतीक है

ब्राह्मी – वह देवी जो भगवान ब्रह्मा की शक्ति है

ब्रह्मवादिनी – हर जगह उपस्थित देवी

बुद्धि – ज्ञानी देवी

बुध्हिदा – ज्ञान की दात्री देवी

चामुंडा - वह जो चंड और मुंड राक्षस की हत्या करने वाली देवी है

चंद्रघंटा – यह नाम ताकतवर घंटी का प्रतीक है।

चंदामुन्दा विनाशिनी – जिसने चंड और मुंड की हत्या की वह देवी

चिन्ता – तनाव का प्रतीक

चिता – मृत्यु-बिस्तर का प्रतीक

चिति – सोच मन का प्रतीक

चित्रा – सुरम्य का प्रतीक

चित्तरूपा – सोच या विचारशील राज्य का धोतक

दक्शाकन्या – दक्ष की बेटी का नाम

दक्शायाज्नाविनाशिनी – दक्ष के बलिदान को टोकने वाला

देवमाता – वह जो देवी माँ है

दुर्गा – अपराजेय देवी

एककन्या – बालिका का प्रतीक

घोररूपा – भयंकर रूप का प्रतीक

ज्ञाना – ज्ञान का प्रतीक

जलोदरी – ब्रह्मांड में निवास करने वाली देवी

जया – विजयी का प्रतीक

कालरात्रि – वह देवी जो काली है और रात के समान दिखाई देती है।

किशोरी – किशोर का प्रतीक

कलामंजिराराजिनी – संगीत पायल का प्रतीक

कराली – हिंसक का प्रतीक

कात्यायनी – बाबा कत्यानन इस नाम को पूजते है

कौमारी- किशोर का प्रतीक

कोमारी- सुंदर किशोर का प्रतीक

क्रिया – लड़ाई का प्रतीक

क्र्रूना- क्रूर का प्रतीक

लक्ष्मी – वह जो धन की देवी है

महेश्वारी – वह जो भगवान शिव की शक्ति है

मातंगी – वह जो मतंगा की देवी

मधुकैताभाहंत्री – वह देवी जिसने राक्षस और मधु और कैटभ को मार दिया

महाबला – शक्ति का प्रतीक

महातपा – तपस्या का प्रतीक

महोदरी – एक विशाल पेट में ब्रह्मांड में रखने वाली

मनः – मन का प्रतीक

मतंगामुनिपुजिता – बाबा मतंगा द्वारा पूजी जाने वाली

मुक्ताकेशा – खुले बाल वाली

नारायणी – भगवान नारायण विनाशकारी विशेषताएँ

निशुम्भाशुम्भाहनानी – देवी जिसने शुम्भ, निशुम्भ को मारा है

महिषासुर मर्दिनी – जिस देवी ने महिषासुर को मार है

नित्या – अनन्त का प्रतीक

पाताला – रंग लाल का प्रतीक

पातालावती – लाल और सफ़द घारण करने वाली

परमेश्वरी – अंतिम देवी

पत्ताम्बरापरिधान्ना – चमड़े से बना हुआ एक प्रकार का कपडा

पिनाकधारिणी – शिव का त्रिशूल का नाम

प्रत्यक्ष – असली

प्रौढ़ा – पुराना

पुरुषाकृति – आदमी का रूप लेने वाली देवी

रत्नप्रिया – सजी देवी श्रृंगार करने वाली

रौद्रमुखी – विनाशक रुद्र की तरह भयंकर चेहरा वाली

साध्वी – आशावादी देवी

सदगति – मोक्ष कन्यादान

सर्वास्त्रधारिणी – मिसाइल हथियारों के स्वामिनी

सर्वदाना वाघातिनी - सभी राक्षसों को मारने के लिए योग्य

सर्वमंत्रमयी – सोच के उपकरण

सर्वशास्त्रमयी – वह जो चतुर है सभी सिद्धांतों में

सर्ववाहना – सभी वाहनों की सवारी

सर्वविद्या – जानकार सब जानने वाली

सती – वह देवी जो अपने पति के अपमान पर अपने आप को जला दे

जगतजननी – सारे संसार की माँ

सत्ता – सब से ऊपर

सत्य – सत्य

सत्यानादास वरुपिनी – शाश्वत आनंद

सावित्री – वह जो सूर्य भगवान की बेटी

शाम्भवी – शंभू की पत्नी

शिवदूती – भगवान शिव के राजदूत

शूलधारिणी – वह जो त्रिशूल धारण करता है

सुंदरी – भव्य

सुरसुन्दरी – बहुत सुंदर

तपस्विनी – तपस्या में लगी हुई

त्रिनेत्र – तीन आँखों का व्यक्ति

वाराही – जो व्यक्ति वाराह पर सवारी करता हुआ

वैष्णवी – अपराजेय

वनदुर्गा – वह जो जंगलों की देवी

विक्रम – हिंसक

विमलौत्त्त्कार्शिनी – खुशी प्रदान करना

विष्णुमाया – भगवान विष्णु का मंत्र

वृधामत्ता – माँ का पुराना स्वरूप

यति – दुनिया का त्याग करने वाला

युवती – औरत



🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "अर्थ सहित माँ पार्वती के 108 नाम ( Arth Sahit Maa Parwati Ke 108 Naam Lyrics in Hindi) - Mata Parvati ke 108 Naam - Bhaktilok" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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