Parvati Stotram

संपूर्ण स्वस्ति वचन मंत्र(Swasti Vachan lyrics in Hindi) - Bhaktilok

247 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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स्वस्ति वाचन (Swasti Vachan) सनातन धर्म की वैदिक परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण, मंगलकारी और ऊर्जावान मंत्र समूह है। 'स्वस्ति' शब्द दो शब्दों के मेल से बना है - 'सु' (अर्थात् शुभ, सुंदर, कल्याणकारी) और 'अस्ति' (अर्थात् होना या अस्तित्व)। इसका सामूहिक अर्थ है 'कल्याण हो' या 'मंगल हो'। किसी भी मांगलिक कार्य, यज्ञ, अनुष्ठान, पूजा-पाठ, विवाह संस्कार या नवीन गृह प्रवेश के प्रारंभ में स्वस्ति वाचन का पाठ करना अनिवार्य माना गया है। यह मंत्र समूह ऋग्वेद और यजुर्वेद के अत्यंत प्रभावशाली मंत्रों का संकलन है, जिसके माध्यम से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक शक्तियों, देवगणों और दसों दिशाओं से कल्याण, सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। इस पावन मंत्र के श्रवण और शुद्ध उच्चारण मात्र से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के विघ्न-बाधाओं का शमन होता है।

मूल मंत्र एवं शुद्ध पाठ | Complete Swasti Vachan Mantra

ॐ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतोऽदब्धासो अपरितास उद्भिदः।
देवा नो यथा सदमिद् वृधे असन्नप्रायुवो रक्षितारो दिवे दिवे॥१॥

देवानां भद्रा सुमतिरृजूयतां देवानां रातिरभि नो नि वर्तताम्।
देवानां सख्यमुप सेदिमा वयं देवा न आयुः प्र तिरन्तु जीवसे॥२॥

तान्पूर्वया निविदा हूमहे वयं भगं मित्रमदितिं दक्षमस्रिधम्।
अर्यमणं वरुणं सोममश्विना सरस्वती नः सुभगा मयस्करत्॥३॥

तन्नो वातो मयोभु वातु भेषजं तन्माता पृथिवी तत्पिता द्यौः।
तद्ग्रावाणः सोमसुतो मयोभुवस्तदश्विना शृणुतं धिष्ण्या युवम्॥४॥

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥५॥

मंत्र उच्चारण एवं पद-विच्छेद | Mantra Pronunciation

स्वस्ति वाचन का प्रभाव इसके शुद्ध उच्चारण में निहित है। वैदिक मंत्रों के उच्चारण में स्वर (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित) का विशेष महत्व होता है। 'विश्वतोऽदब्धासो' जैसे शब्दों का उच्चारण करते समय 'विश्वतः' और 'अदब्धासः' के संधि-विच्छेद को समझना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से इन मंत्रों की ध्वनि तरंगें शरीर के चक्रों को जाग्रत करने में सहायक होती हैं।

संस्कृत शब्द पद-विच्छेद सरल हिंदी अर्थ
स्वस्ति सु + अस्ति कल्याण हो
भद्राः भद्राः कल्याणकारी विचार
विश्वतः विश्वतः सभी दिशाओं से
रक्षितारः रक्षितारः रक्षा करने वाले

सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Hindi Meaning & Bhavarth

स्वस्ति वाचन का भाव यह है कि हमारे पास चारों ओर से ऐसे विचार आएं जो कल्याणकारी हों और जिन्हें कोई दबा न सके। हम देवताओं की उस कृपा की प्रार्थना करते हैं जो हमें निरंतर उन्नति की ओर ले जाए। इसमें इंद्र, पूषा, तार्क्ष्य (गरुड़) और बृहस्पति जैसे देवों का आह्वान किया गया है ताकि वे हमारे जीवन में सुरक्षा, ज्ञान और समृद्धि का संचार करें। यह मंत्र केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि समष्टि (पूरे समाज) के कल्याण की कामना करता है।

मंत्र जप विधि, नियम एवं शुभ मुहूर्त | Chanting Method & Rules

स्वस्ति वाचन का पाठ किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में किया जाता है। इसके लिए कोई विशेष माला की आवश्यकता नहीं होती, परंतु इसे शुद्ध आसन पर बैठकर, पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। पाठ के समय मन में शांति और श्रद्धा का भाव होना अनिवार्य है।

एक नजर में मंत्र की जानकारी | Quick Information

मंत्र का नाम स्वस्ति वाचन
स्रोत ऋग्वेद एवं यजुर्वेद
उद्देश्य कल्याण, शांति एवं विघ्न निवारण
उपयुक्त अवसर पूजा, यज्ञ, गृह प्रवेश, विवाह

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: स्वस्ति वाचन का पाठ कब करना चाहिए?
    उत्तर: किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, नवीन कार्य की शुरुआत या दैनिक पूजा के अंत में इसका पाठ करना अत्यंत शुभ होता है।
  • प्रश्न: क्या इसे घर पर अकेले पढ़ा जा सकता है?
    उत्तर: हाँ, स्वस्ति वाचन का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है, यह घर के वातावरण को शुद्ध करता है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री ऋग्वेद के मंत्रों और सनातन वैदिक परंपराओं के आधार पर संकलित की गई है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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