प्राणायामप्रारूप (Pranayaam Ke Prakar): - 



प्राणायामप्रारूप (Pranayaam Ke Prakar) - Bhaktilok


पूरक-प्राणायामः(Poorak Pranayaam in Hindi):-


इसमें दाहिने हाथ के अंगूठे से दाहिनी नाक को बन्दकर बायीं नासिका से श्वास को भीतर खींचें और वायु को खींचते समय नील-कमल के समान श्यामवर्ण चतुर्भुज भगवान् विष्णु को नाभि में ध्यान करें । इसे पूरक प्राणायाम कहते हैं। 


कुम्भक-प्राणायामः(Kumbhak Pranayaam in Hindi):-


इसमें नाक के वायें छिद्र को भी वन्दकर भीतर में खींचे हुए वायु को भीतर में धारण कर कमल आसन पर विराजमान लालवर्ण वाले चतुर्भुज ब्रह्माजी का ध्यान अपने हृदय में करें । इसे कुम्भक प्राणायाम कहते हैं ।


रेचक-प्राणायामः(Rechak Pranayaam in Hindi):-


इसमें धारण किये हुए वायु को दाहिनी नासिका के छिद्र से धीरे धीरे वाहर छोड़ें और अपने ललाट में श्वेतवर्ण त्रिनेत्र शिवजी का ध्यान करें। । इसे रेचक प्राणायाम कहते हैं। 


प्राणायाम-मन्त्रः(Pranayaam  Mantra Sanskrit Me) :-


ॐ भः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम । ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । 

ॐ आपोज्योतीरसोऽमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम।


इस मन्त्र को प्रत्येक प्राणायाम में तीन-तीन वार एक साथ जपें अथवा प्रत्येक प्राणायाम् में एक-एक वार जप करें ।