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ज्यों नैनन में पुतली त्यों मालिक घर माँहि दोहे का अर्थ(Jyo Nainan Me Putali Tyo Maalik Ghar Mahi Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok


ज्यों नैनन में पुतली त्यों मालिक घर माँहि दोहे का अर्थ(Jyo Nainan Me Putali Tyo Maalik Ghar Mahi Dohe Ka Arth in Hindi):- 


ज्यों नैनन में पुतली, त्यों मालिक घर माँहि।

मूरख लोग न जानिए , बाहर ढूँढत जाहिं

 

ज्यों नैनन में पुतली त्यों मालिक घर माँहि दोहे का अर्थ(Jyo Nainan Me Putali Tyo Maalik Ghar Mahi Dohe Ka Arth in Hindi) - Bhaktilok

ज्यों नैनन में पुतली त्यों मालिक घर माँहि दोहे का अर्थ(Jyo Nainan Me Putali Tyo Maalik Ghar Mahi Dohe Ka Arth in Hindi):-

कबीर दास जी कहते हैं कि जैसे आँख के अंदर पुतली है, ठीक वैसे ही ईश्वर हमारे अंदर बसा है। मूर्ख लोग नहीं जानते और बाहर ही ईश्वर को तलाशते रहते हैं।




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