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जिन घर साधू न पुजिये घर की सेवा नाही दोहे का अर्थ (Jin Ghar Sadhu Na Pujiye Ghar Ki Sewa Naahi Dohe Ka Arth In Hindi) - Bhaktilok


जिन घर साधू न पुजिये घर की सेवा नाही दोहे का अर्थ (Jin Ghar Sadhu Na Pujiye Ghar Ki Sewa Naahi Dohe Ka Arth In Hindi) - 


जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही ।

ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही ।


जिन घर साधू न पुजिये घर की सेवा नाही दोहे का अर्थ (Jin Ghar Sadhu Na Pujiye Ghar Ki Sewa Naahi Dohe Ka Arth In Hindi) - Bhaktilok


जिन घर साधू न पुजिये घर की सेवा नाही दोहे का अर्थ (Jin Ghar Sadhu Na Pujiye Ghar Ki Sewa Naahi Dohe Ka Arth In Hindi):-

कबीर दास जी कहते हैं कि जिस घर में साधु और सत्य की पूजा नहीं होती, उस घर में पाप बसता है। ऐसा घर तो मरघट के समान है जहाँ दिन में ही भूत प्रेत बसते हैं।




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