Parvati Stotram

झण्डा ऊँचा रहे हमारा लिरिक्स(Jhanda Uncha Rahe Hamara Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

192 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

झण्डा ऊँचा रहे हमारा - परिचय एवं सांस्कृतिक महत्व

"झण्डा ऊँचा रहे हमारा" केवल एक साधारण गीत या ध्वज-गान नहीं है, बल्कि यह भारत के करोड़ों देशवासियों के स्वाभिमान, स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानों और सनातन संस्कृति की वसुधैव कुटुंबकम की भावना का जीवंत प्रतीक है। श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' द्वारा रचित यह पावन झंडा गीत जब भी गूंजता है, तो हर भारतीय के हृदय में राष्ट्रप्रेम, भक्ति और कर्तव्यबोध की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगती है। सनातन धर्म में राष्ट्र को 'भारत माता' के रूप में दिव्य शक्ति और देवी के स्वरूप में पूजा जाता है। इस राष्ट्रीय गीत में जहाँ एक ओर मातृभूमि के प्रति अनन्य समर्पण झलकता है, वहीं दूसरी ओर स्वतंत्रता, न्याय और शांति का संदेश भी निहित है। यह गीत हमें यह सिखाता है कि जिस प्रकार हम अपने आराध्य देवी-देवताओं के चरणों में अपनी पूर्ण शरणागति अर्पित करते हैं, उसी प्रकार अपनी पावन मातृभूमि की रक्षा और उसके गौरव को बनाए रखना भी प्रत्येक नागरिक का परम धर्म है। भक्तिलोक के इस विस्तृत scholarly guide में हम इस महान गीत के इतिहास, शब्दार्थ, भावार्थ और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा।

सदा शक्ति सरसाने वाला, प्रेम सुधा बरसाने वाला,
वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन-मन सारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

स्वतन्त्रता के भीषण रण में, लख कर जोश बढ़े क्षण-क्षण में,
काँपे शत्रु देखकर मन में, मिट जाए हर संकट सारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

इस झण्डे के नीचे हम सब, बिना प्रेम भय मिटे सब आपस,
होवे जय हमारा जब-जब, सबका संशय हो निवारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

स्वाधीनता का भीषण नर-नारी, करे प्राप्त बल बलिहारी,
होवे देश-भक्ति संग सारी, जय भारत माता का नारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

शान न इसकी जाने पाए, चाहे जान भले ही जाए,
विश्व-विजय करके दिखलाए, तब होवे प्रण पूर्ण हमारा,
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth

श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' जी द्वारा रचित इस अमर गीत का प्रत्येक पद गहन देशभक्ति और आध्यात्मिक समर्पण से ओत-प्रोत है।

प्रथम पद: "विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झण्डा ऊँचा रहे हमारा।" - कवि कहते हैं कि हमारा यह तिरंगा झंडा सम्पूर्ण विश्व में विजय प्राप्त करने वाला और अत्यंत प्यारा है। यह सदा सर्वदा ऊँचा रहना चाहिए। यह झंडा साधकों और वीरों को शक्ति प्रदान करने वाला, प्रेम की अमृत वर्षा करने वाला और मातृभूमि के कण-कण में प्राण फूंकने वाला है।

द्वितीय पद: "स्वतन्त्रता के भीषण रण में..." - जब देश की स्वतंत्रता के लिए भीषण संग्राम छिड़ा, तब इस ध्वज को देखकर वीरों का उत्साह पल-पल बढ़ता गया। इसके गौरव को देखकर शत्रुओं के मन में भय उत्पन्न हो जाता है और राष्ट्र के सारे संकट स्वतः मिट जाते हैं.

तृतीय एवं चतुर्थ पद: इस झंडे के छत्र-छाया में देशवासी आपसी भेदभाव और भय को भूलकर एकजुट होते हैं। देश के नर-नारी स्वाधीनता के यज्ञ में अपनी आहुति देने के लिए तत्पर रहते हैं और 'जय भारत माता' का उद्घोष करते हैं।

पंचम पद: "शान न इसकी जाने पाए, चाहे जान भले ही जाए..." - यह पंक्ति सर्वोच्च बलिदान की भावना को दर्शाती है। देशभक्त यह संकल्प लेते हैं कि इस राष्ट्रीय ध्वज की आन-बान-शान पर कभी आंच नहीं आने देंगे, भले ही इसके लिए हमें अपने प्राणों की आहुति क्यों न देनी पड़े।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मूल भावना राष्ट्रभक्ति, एकता, शौर्य, त्याग और समर्पण है। सनातन संस्कृति में भूमि को केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि जगत जननी माँ का स्वरूप माना गया है - "माता भूमिः पुत्रोऽथ पृथिव्याः"। यह गीत हमें यह सिखाता है कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। इसके माध्यम से नागरिकों में अनुशासन, नैतिकता और सामूहिक एकता का संचार होता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण तथ्य / जानकारी
गीत का नाम झण्डा ऊँचा रहे हमारा (विजयी विश्व तिरंगा प्यारा)
रचनाकार / गीतकार श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
भाषा खड़ी बोली हिंदी / सरल संस्कृतनिष्ठ हिंदी
प्रमुख अवसर स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, राष्ट्रीय उत्सव
मुख्य विषय राष्ट्रभक्ति, एकता, शौर्य और स्वाभिमान
सांस्कृतिक महत्व भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत (झंडा गीत)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस अमर झंडा गीत के रचयिता श्री श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' जी थे, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में हुआ था। वे एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी और समर्पित साहित्यकार थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में राष्ट्र सेवा को ही अपना सर्वोपरि धर्म माना। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान अनगिनत यातनाएं सहने के बावजूद उनके देशभक्ति के स्वर कभी मंद नहीं पड़े। उनके द्वारा रचित यह झंडा गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महामंत्र बन गया, जिसे आज भी पूरे गर्व और श्रद्धा के साथ गाया जाता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
सरसाने वाला आनंदित करने वाला या रस से सींचने वाला शक्ति और ऊर्जा प्रदान करने के संदर्भ में
प्रेम सुधा प्रेम रूपी अमृत आपसी भाईचारा और सद्भाव
हरसाने वाला प्रसन्न करने वाला वीरों का उत्साह बढ़ाने वाला
भीषण रण भयंकर युद्ध या संघर्ष स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई
निवारण दूर करना या समाधान करना संकटों और संशयों का अंत
बलिहारी न्योछावर होना या समर्पण मातृभूमि के लिए सर्वस्व त्याग

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय संस्कृति में राष्ट्र और धर्म एक-दूसरे के पूरक रहे हैं। जब हम राष्ट्रध्वज को प्रणाम करते हैं, तो वास्तव में हम उन समस्त सनातन मूल्यों, बलिदानों और आदर्शों को नमन कर रहे होते हैं जिन्होंने इस देश की सभ्यता को जीवंत रखा है। श्रीमद्भगवद्गीता में निष्काम कर्म का जो संदेश दिया गया है, वही संदेश इस गीत की हर पंक्ति में झलकता है जहाँ फल की चिंता किए बिना राष्ट्र और समाज की सेवा करने की प्रेरणा दी जाती है। राष्ट्रीय पर्वों पर इस गीत का गान एक प्रकार का यज्ञ बन जाता है जिसमें हर नागरिक अपनी देशभक्ति की आहुति देता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • राष्ट्र सर्वोपरि की भावना: व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए कार्य करना।
  • अखंड एकता: जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के भेदों को भुलाकर आपसी प्रेम और भाईचारा बनाए रखना।
  • संकटों में अडिग रहना: जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आएँ, अपने कर्तव्यों से विचलित न होना।
  • बलिदान और समर्पण: सत्य, न्याय और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बड़े से बड़ा त्याग करने का साहस रखना।
  • कर्तव्यनिष्ठा: अपने दैनिक जीवन के कार्यों को पूरी ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति निष्ठा के साथ संपन्न करना।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से भारत के राष्ट्रीय पर्वों—स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के पावन अवसरों पर ध्वजारोहण के उपरांत गाया जाता है। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों के वार्षिकोत्सवों, स्काउट-गाइड शिविरों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राष्ट्रीय एकता से जुड़ी सभाओं में भी इसका सस्वर गान करने की गौरवशाली परंपरा है। इसके श्रवण मात्र से ही व्यक्ति का अंतःकरण ऊर्जा और राष्ट्रप्रेम से भर जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

घटक विवरण
गीत का शीर्षक झण्डा ऊँचा रहे हमारा (विजयी विश्व तिरंगा प्यारा)
रचयिता श्री श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'
संबोधित विषय भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और मातृभूमि
प्रमुख भाव वीर रस, देशभक्ति, उत्साह, समर्पण
उपयोगिता राष्ट्रीय उत्सव, प्रभात फेरी, सांस्कृतिक सम्मेलन
संबंधित अन्य रचनाएं श्री हनुमान चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध झंडा गीत के रचयिता अमर स्वतंत्रता सेनानी और कवि श्री श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' जी हैं।

यह गीत मुख्य रूप से स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण के समय राष्ट्रीय गौरव और एकता के प्रतीक के रूप में गाया जाता है।

इसका अर्थ है कि हमारा तीन रंगों वाला तिरंगा झंडा सम्पूर्ण विश्व में विजय प्राप्त करने वाला और अत्यंत प्रिय है, जो सदा सर्वदा ऊँचा रहना चाहिए।

इस गीत से हमें मातृभूमि के प्रति अनन्य प्रेम, राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वस्व त्याग करने की भावना और आपसी भाईचारा बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

हाँ, यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांतिकारियों और सत्याग्रहियों द्वारा प्रभात फेरियों और सम्मेलनों में जोश भरने के लिए प्रमुखता से गाया जाता था।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख पाठकों को "झण्डा ऊँचा रहे हमारा" गीत के ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराने के लिए तैयार किया गया है। इसमें गीत के प्रत्येक पद का सरल हिंदी अर्थ, कठिन शब्दों के प्रसंग और राष्ट्रीय चेतना के पक्षों को सम्मिलित किया गया है। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत पाठकों के लिए प्रस्तुत की गई है ताकि वे अपनी संस्कृति और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति गहरी श्रद्धा रख सकें।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक दस्तावेज एवं संस्मरण
  • श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' ग्रन्थवली एवं राष्ट्रीय गीत संग्रह
  • सनातन सांस्कृतिक परंपरा और राष्ट्र वंदना के ग्रंथ
  • पंचम वेद एवं सांस्कृतिक धरोहर प्रकाशन

संबंधित भजन एवं लेख

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!