हृदि पवित्रकारणार्थ न्यास(Hradi Pavitrakarnarth Nyas Sanskrit me):-
हृदि पवित्रकारणार्थ न्यास(Hradi Pavitrakarnarth Nyas Sanskrit me) :-
ॐ वाक् वाक् (अञ्जलियों से मुख का स्पर्श)
ॐ प्राणः प्राणः (तर्जनी और अंगूठे से नाक का स्पर्श)
ॐ चक्षुश्चक्षुः (अनामिका और अंगूठे से दोनों आँख)
ॐ श्रोत्रं श्रोत्रम् (मध्यमा और अंगूठे से दोनों कान)
ॐ नाभिः नाभिः (अंगुष्ठ एवं कनिष्ठका से नाभि)
ॐ हृदयम् (दक्षिण करतल से हृदय)
ॐ कण्ठः (दाहिने हाथ की अंगुलियों के अग्र भाग से कण्ठ)
ॐ मुखम् (दाहिने हाथ के अगले भाग से मुख).
ॐ शिरः (अंगुलियों से शिर)
ॐ शिखाम् (अंगुलियों से चोटी का स्पर्श)
ॐ वाहुभ्यां यशोबलम् (दाहिने हाथ से दोनों भुजाओं का स्पर्श) इसके बाद दोनों हाथों से शिर से पैर तक स्पर्श करें।
