Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

विश्वम्भरी स्तुति लिरिक्स (Vishwambhari Stuti Lyrics in Hindi) - Kinjal Dave Vishwambhari Stuti

विश्वम्भरी स्तुति के संपूर्ण लिरिक्स हिंदी अर्थ के साथ पढ़ें। माँ अम्बे की इस पावन स्तुति से प्राप्त करें असीम शांति और आत्मिक शक्ति। Bhaktilok पर देखें।

विश्वम्भरी स्तुति (Vishwambhari Stuti) जगत जननी माँ अम्बे, आदिशक्ति जगदंबा की स्तुति में गाया जाने वाला एक अत्यंत पावन और लोकप्रिय devotional भजन है। विशेष रूप से नवरात्रि, देवी जागरण, और माता के पूजन के अवसरों पर इस स्तुति का गान और श्रवण असीम शांति और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है। किंजल दवे (Kinjal Dave) की सुमधुर वाणी में गाये जाने के बाद इस स्तुति ने घर-घर में विशेष स्थान बना लिया है। माँ जगदंबा संपूर्ण ब्रह्मांड की पालनहार, दुख-हर्ति और सुख-कर्ति हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम विश्वम्भरी स्तुति के संपूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, गायन विधि, और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे ताकि साधक माँ भगवती की कृपा प्राप्त कर सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:

विश्वंभरी अखिल विश्व तनी जनेता
विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता
दुर्बुद्धिने दूर करी सदबुद्धि आपो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

भूलो पड़ी भवरने भटकू भवानी
सूझे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी
भासे भयंकर वाली मन ना उतापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

आ रंकने उगरावा नथी कोई आरो
ब्रह्मांड छू जननी हु ग्रही बाल तारो
ना शु सुनो भगवती शिशु ना विलापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

माँ कर्म जन्मा कथनी करता विचारू
आ स्रुष्टिमा तुज विना नथी कोई मारूँ
कोने कहू कथन योग तनो बलापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

हूँ काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो
आदम्बरे अति घनो मदथी बकेलो
दोषों थकी दूषित ना करी माफ़ पापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

ना शाश्त्रना श्रवण नु पयपान किधू
ना मंत्र के स्तुति कथा नथी काई किधू
श्रद्धा धरी नथी करा तव नाम जापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

रे रे भवानी बहु भूल थई छे मारी
आ ज़िन्दगी थई मने अतिशे अकाड़ी
दोषों प्रजाली सगला तवा छाप छापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

खाली न कोई स्थल छे विण आप धारो
ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारों
शक्तिन माप गणवा अगणीत मापो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

पापे प्रपंच करवा बधी वाते पुरो
खोटो खरो भगवती पण हूँ छुं तरो
राखी चरणमां तव दास नहि विलोपो
माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

विश्वम्भरी स्तुति का प्रत्येक शब्द भक्त की अपनी आराध्य माँ के प्रति अनन्य पुकार और शरणागति को दर्शाता है। स्तुति के पहले चरण में माँ को संपूर्ण विश्व की जननी (विश्वंभरी) और विद्या प्रदायिनी के रूप में संबोधित किया गया है। भक्त प्रार्थना करता है कि हे माँ! मेरी दुर्बुद्धियों को दूर कर मुझे सदबुद्धि प्रदान करो और मेरे भवसागर के दुखों का नाश करो (माम पाहि ओम भगवती भव दुख कांपो)।

आगे भक्त अपनी दीनता स्वीकार करते हुए कहता है कि मैं इस भवसागर में भटक गया हूँ और मुझे कोई दिशा नहीं सूझ रही है। हे माँ जगदंबा! इस अंकिचन बालक को उबारने वाला आपके सिवाय इस ब्रह्मांड में कोई दूसरा नहीं है। मैंने अपने जीवन में काम, क्रोध, मद और मोह जैसे विकारों में फंसकर अनेक भूलें की हैं, शास्त्रों का श्रवण या मंत्र जाप भी विधिवत नहीं किया है, किंतु हे भवानी! आप अपने वात्सल्य भाव से मेरे सभी दोषों और पापों को क्षमा कर अपने चरणों में स्थान दें। इस प्रकार यह स्तुति अज्ञान से ज्ञान की ओर और अहंकार से संपूर्ण समर्पण की यात्रा है। इसी प्रकार के अन्य पावन भजनों के लिए हमारे देवी भजन संग्रह को देखें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह स्तुति माँ अम्बे की करुणा और ममता का जीवंत प्रतीक है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • भक्ति भाव (Devotional Bhava): इसमें शरणागति (Surrender) और आत्म-स्वीकृति का अनूठा भाव है।
  • सांस्कृतिक लोकप्रियता: गुजराती और हिंदी भाषी क्षेत्रों में किंजल दवे द्वारा गाए गए इस भजन को नवरात्रि के दिनों में विशेष रूप से घर-घर में बजाया जाता है।
  • मानसिक शांति: इस स्तुति के नित्य श्रवण से मन का संताप, भय और अवसाद दूर होता है।
  • आध्यात्मिक ऊर्जा: यह साधक को सकारात्मक ऊर्जा और माता की अतुल्नीय शक्ति का अहसास कराती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

विश्वम्भरी स्तुति का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, किंतु इसके विशेष लाभ निम्नलिखित अवसरों पर प्राप्त होते हैं:

  • नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि में घटस्थापना के पश्चात प्रातः काल या संध्या आरती के समय।
  • दैनिक पूजा: घर के मंदिर में दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात ध्यान मुद्रा में।
  • माता के जागरण व सत्संग में: सामूहिक रूप से बैठकर समवेत स्वर में गायन करने से वातावरण शुद्ध होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस स्तुति की आराध्य देवी माँ दुर्गा, जगदंबा, भवानी और आदिशक्ति हैं। सनातन धर्म में आदिशक्ति को संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा, सृजन और पालन का आधार माना गया है। भगवान शिव की अर्धांगिनी और समस्त देवों की शक्ति स्वरूपा माँ अम्बे अपने बालकों के सभी कष्टों को हरने वाली महामाया हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह पारंपरिक गुजराती स्तुति सदियों से गुजरात और राजस्थान के संतों व भक्तों द्वारा गाई जाती रही है। आधुनिक समय में प्रसिद्ध लोक गायिका किंजल दवे ने अपनी ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज में इसे रिकॉर्ड किया, जिससे यह भारत और विदेशों में रहने वाले सनातन प्रेमियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो गई।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस स्तुति की भाषा सरल हिंदी और गुजराती मिश्रित ब्रज-लोक भाषा की शैली है, जिसे सामान्य जनमानस आसानी से समझ सकता है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है जो इसके काव्य सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

विश्वम्भरी स्तुति हमें सिखाती है कि मनुष्य अपनी कमजोरियों और गलतियों से घिरा हुआ है, किंतु माँ का आंचल ममता से भरा है। अहंकार का त्याग कर जब भक्त अपनी भूल स्वीकार करता है, तब माँ की करुणा स्वतः प्रवाहित होती है। यह भजन हमें धीरज, विनम्रता और अनन्य श्रद्धा का पाठ पढ़ाता है। आप इस प्रकार के अन्य स्तोत्रों के लिए श्री दुर्गा चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
विश्वंभरी संपूर्ण विश्व का पालन करने वाली माँ जगदंबा के संबोधन में
अखिल विश्व तनी जनेता सारे संसार की माता सृष्टि की रचनाकार
माम पाहि हमारी रक्षा करो शरणागति की पुकार
भव दुख कांपो संसार के दुखों का नाश करो मोक्ष और शांति की कामना
रंक गरीब, दीन-हीन बालक भक्त की स्वयं के प्रति दीनता

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

स्तुति की हर पंक्ति साधक के मन की गहराइयों को छूती है। जब भक्त कहता है "हूँ काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो", तो इसका अर्थ है कि वह अपने अंदर के आंतरिक शत्रुओं से त्रस्त है। इसी प्रकार "ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारों" पंक्ति माँ की सर्वव्यापकता (Omnipresence) का अत्यंत सुंदर वर्णन करती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

विश्वम्भरी स्तुति के साथ निम्नलिखित देवी मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है:

"या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै నమో नमः॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम विश्वम्भरी स्तुति (Vishwambhari Stuti)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति जगदंबा
प्रसिद्ध गायिका किंजल दवे (Kinjal Dave)
भाषा गुजराती / हिंदी मिश्रित
मुख्य थीम शरणागति, करुणा और भक्ति
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी पूजन, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

विश्वम्भरी स्तुति एक पारंपरिक गुजराती लोक स्तुति है जो सदियों से संतों और भक्तों द्वारा गाई जाती रही है। आधुनिक काल में इसे गायिका किंजल दवे ने अपनी आवाज देकर अत्यधिक लोकप्रिय बनाया।

इस स्तुति का पाठ प्रातः काल स्नान के पश्चात या संध्याकाल में माता की आरती के समय करना सबसे उत्तम माना जाता है। नवरात्रि के दिनों में इसका विशेष महत्व है।

हाँ, आप इसे अपने घर के मंदिर में पूर्ण पवित्रता और श्रद्धा के साथ गा या सुन सकते हैं। इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

इसके नित्य श्रवण से मानसिक शांति, भय से मुक्ति, आत्मविश्वास में वृद्धि और माँ भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

हाँ, इस लेख में विश्वम्भरी स्तुति के संपूर्ण लिरिक्स देवनागरी लिपि (हिंदी) में उपलब्ध कराए गए हैं।

इसका अर्थ है - "हे भगवती! हमारी रक्षा करो और हमारे संसारिक दुखों का नाश करो।"

इसके लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, बस मन में श्रद्धा, पवित्रता और माँ के प्रति अनन्य विश्वास होना आवश्यक है।

दुर्गा चालीसा, अम्बे तू है जगदंबे काली, भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अमे और महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र अत्यंत लोकप्रिय हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत लिरिक्स और अर्थ को पारंपरिक स्रोतों और भक्तों की मान्यताओं के आधार पर सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को शुद्ध एवं प्रामाणिक सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पारंपरिक लोक गीत एवं स्तुति संग्रह
  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • भक्तजनों के संकलित संकीर्तन ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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