Patriotic Songs गुरुवार विशेष (भगवान श्री हरि विष्णु व गुरुदेव)

निर्जला एकादशी गायत्री जयंती (Nirjala Ekadashi Gayatri Jayanti) - Gayatri Mantra Om Jai Jagdish Hare

भजन "निर्जला एकादशी गायत्री जयंती (Nirjala Ekadashi Gayatri Jayanti) - Gayatri Mantra Om Jai Jagdish Hare" के हिन्दी लिरिक्स, विस्तृत अर्थ, और पौराणिक महत्त्व। "ॐ जय जगदीश हरे" एक परम प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरती है जो सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सर्वव्याप

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

ॐ जय जगदीश हरे, आरती कीजै चाकरी। तुम्हो देवस देवल, दारु ब्रह्मा-विष्णु-महेश। ॐ जय जगदीश हरे॥ आरती कीजै चाकरी, तुम्हो देव विश्व-विमोहन। नमो नमो देवी, सर्वभूत-पालक अनोखे। भव-सागर से तारक, जगत के सर्वेश्वर को। ॐ जय जगदीश हरे॥ जो ध्यावत फल पावत, दुःख बिसे सुख सोये। कहत नरहरि, आरती तुम्हारी, जागत रहै मोये। नित नित आरती करत हैं, देव सकल सुर नर। करहु कृपा निरंतर, सो नित पावत भर। ॐ जय जगदीश हरे॥ तुम पूरन परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। सर्व शक्ति के धारी, सब रूप विधायी। आसीर्वाद करहु सो, दास तुम्हारो आजु। मेरो तन, मन, धन सब, सब कुछ अर्पन लाजु। ॐ जय जगदीश हरे॥
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

"ॐ जय जगदीश हरे" एक परम प्रसिद्ध और लोकप्रिय आरती है जो सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी ब्रह्म को समर्पित है। यह भजन गहराई से उस परमात्मा की जय-जयकार करता है जो सम्पूर्ण जगत के ईश्वर हैं और सभी देवताओं के देव हैं। "आरती कीजै चाकरी" पंक्ति भक्त की विनम्र प्रार्थना को व्यक्त करती है कि वह सेवक के रूप में परमेश्वर की पूजा करना चाहता है। यह आरती ब्रह्मा, विष्णु और महेश - तीनों देवताओं को भी स्वीकार करती है, जो सृष्टि, पालन और संहार के कार्यों को करते हैं। भजन में भक्त यह स्वीकार करता है कि परमात्मा ही "विश्व-विमोहन" हैं, अर्थात पूरे विश्व को आकर्षित और मुग्ध करने वाले हैं। यह आरती जीवन के प्रति एक समर्पित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जहाँ भक्त अपने सभी कार्यों को ईश्वर के नाम पर करता है।

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहन और हृदय-स्पर्शी है। जब भक्त "जो ध्यावत फल पावत, दुःख बिसे सुख सोये" कहता है, तब वह यह संदेश देता है कि जो कोई भी परमात्मा का ध्यान और चिंतन करता है, वह निश्चित रूप से फल प्राप्त करता है और उसके सभी दुःख विलीन हो जाते हैं। यह अनुभव की गई सत्य है कि परमेश्वर का स्मरण मन को शांति और सुख प्रदान करता है। भजन में "सर्वभूत-पालक" का उल्लेख करके भक्त सभी प्राणियों के प्रति ईश्वर की करुणा और दायित्व को दर्शाता है। "भव-सागर से तारक" पंक्ति का अर्थ है कि परमात्मा ही इस संसार-रूप सागर से मनुष्य को पार लगाने वाले हैं। भक्त के मन में यह विश्वास है कि नित्य आरती करने से और परमेश्वर का स्मरण करने से मन सदैव जागृत और सचेत रहता है। यह भाव-भरी प्रार्थना सभी भक्तों के हृदय से निकलने वाली आंतरिक पुकार है।

इस आरती का दार्शनिक और आध्यात्मिक सार यह है कि परमात्मा ही अद्वितीय सत्ता है जो "पूरन परमात्मा" और "अन्तर्यामी" दोनों हैं। वे पूर्ण हैं, सर्वज्ञ हैं और प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं। भक्ति-मार्ग की दृष्टि से, यह आरती शरणागति और समर्पण की भावना को प्रदर्शित करती है। भक्त अपने तन, मन और धन सभी कुछ परमात्मा को अर्पित कर देता है, जिससे आत्मिक मुक्ति संभव होती है। "सब शक्ति के धारी, सब रूप विधायी" कथन अद्वैत दर्शन को प्रतिबिंबित करता है कि परमात्मा ही सभी शक्तियों के स्रोत हैं। निर्जला एकादशी पर इस गायत्री और आरती का गायन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह दिन आत्मिक शुद्धि और आत्मबोध के लिए समर्पित है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस आरती का वैदिक और पौराणिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। यह आरती उपनिषदों में वर्णित ब्रह्म-विचार पर आधारित है, जहाँ परमात्मा को "सत्यं ज्ञानं अनंतं ब्रह्म" कहा गया है। रामायण और महाभारत में भी भगवान की आरती का उल्लेख मिलता है - जब भक्त भगवान की सेवा और पूजन करते हैं। विष्णु पुराण में इसी प्रकार की आरतियों का विस्तृत वर्णन है। निर्जला एकादशी एक महत्वपूर्ण व्रत है जो पानी के बिना (निर्जला) रखा जाता है, और यह भक्ति और कठोर तपस्या का प्रतीक है। इसी दिन गायत्री जयंती मनाई जाती है, जो गायत्री मंत्र और सूर्य देव को समर्पित है। गायत्री मंत्र "ॐ भूर्भुवः स्वः तत् सवितुर्वरेण्यम्..." वेदों का सबसे पवित्र मंत्र है। इस आरती के माध्यम से भक्त इन सभी पवित्र तत्वों का आह्वान करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस आरती का नियमित गायन और ध्यान मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर अनेक लाभ प्रदान करता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, यह आरती परमात्मा से सीधा संपर्क स्थापित करता है और भक्त की चेतना को उच्च अवस्था में ले जाता है। नियमित गायन से मन की शांति, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है। शारीरिक स्तर पर, इसका गायन श्वसन तंत्र को मजबूत करता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। मानसिक लाभ के रूप में, यह मनोविकारों को दूर करता है, भय को नष्ट करता है और आशावाद का संचार करता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

निर्जला एकादशी पर इस आरती का सही तरीके से पाठ करने के लिए प्रातःकाल उदित होने वाले सूर्य के समय (ब्रह्म-मुहूर्त में) इसका गायन सर्वोत्तम है। पूजा-स्थल को स्वच्छ करें, दीपक प्रज्ज्वलित करें और फूलों, फलों और जल का अर्पण करें। शुद्ध मन और शरीर से, आरामदायक आसन पर बैठकर इसे गाएं। आरती के समय भक्ति-भाव से अपना सिर झुकाएं और परमात्मा के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखें। निर्जला एकादशी के दिन व्रत रखते हुए इसका गायन और ध्यान अधिक प्रभावी होता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

निर्जला एकादशी पर इस आरती का विशेष महत्व क्यों है?

निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित सबसे कठोर व्रत है। इसी दिन गायत्री जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन यह आरती गाने से भक्त को परमात्मा का विशेष आशीर्वाद मिलता है। निर्जला व्रत करते हुए इस आरती का गायन आध्यात्मिक उन्नति में तीव्रता लाता है।

क्या यह आरती किसी विशेष देवता को समर्पित है?

यह आरती सर्वज्ञ और सर्वव्यापी परमात्मा को समर्पित है, जो सभी देवताओं के देव हैं। इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की स्तुति की गई है। निर्जला एकादशी पर यह विशेषत: भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है।

इस आरती का गायन कितनी बार करना चाहिए?

प्रतिदिन प्रातःकाल और संध्या के समय इस आरती का गायन करना चाहिए। निर्जला एकादशी पर कम से कम तीन बार इसका पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। भक्ति-भाव से नियमित गायन ही महत्वपूर्ण है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 04 Nov 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!