hari bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल केशव माधव गोविंद बोल लिरिक्स (Hari Bol Hari Bol Hari Hari Hari Bol Keshav Madhav Govind Bol Lyrics in Hindi) - by Pamela Jain

प्रसिद्ध भजन 'हरी बोल हरी बोल केशव माधव गोविंद बोल' के संपूर्ण लिरिक्स, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व को पढ़ें। पमेला जैन की मधुर वाणी में भक्ति का आनंद लें।

भक्ति संगीत की दिव्य और अलौकिक धारा में प्रवाहित होने वाला पावन संकीर्तन "हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल केशव माधव गोविंद बोल" सुप्रसिद्ध गायिका पमेला जैन (Pamela Jain) की मधुर और मंत्रमुग्ध कर देने वाली वाणी में गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय भजन है। भगवान श्री हरि विष्णु के विभिन्न पावन स्वरूपों—केशव, माधव, गोविंद, मुरारी और चक्रधारी का स्मरण कराते हुए यह संकीर्तन साधक के अंतःकरण को प्रफुल्लित कर देता है। नाम जप की महिमा का गुणगान करने वाला यह भजन भक्तों को सांसारिक मोह-माया के बन्धनों से मुक्त कर भगवत्प्रेम की अनंत गहराई में डुबो देता है। सनातन परंपरा में हरि नाम संकीर्तन को कलियुग में भवसागर पार करने का सबसे सुलभ और प्रभावकारी साधन माना गया है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, शब्दार्थ, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके गहरे प्रभावों का संपूर्ण अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल केशव माधव गोविंद बोल लिरिक्स


हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

नाम प्रभु का है सुखकारी,
पाप काटेंगे क्षण में भारी।
नाम का पीले अमृत घोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

शबरी अहिल्या सदन कसाई,
नाम जपन से मुक्ति पाई।
नाम की महिमा है बेतोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

सुवा पढ़ावत गणिका तारी,
बड़े-बड़े निशिचर संहारी।
गिन-गिन पापी तारे तोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

नरसी भगत की हुण्डी सिकारी,
बन गयो साँवलशाह बनवारी।
कुंडी अपने मन की खोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

जो-जो शरण पड़े प्रभु तारे,
भवसागर से पार उतारे।
बन्दे तेरा क्या लगता है मोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

राम-नाम के सब अधिकारी,
बालक वृध्द युवा नर नारी।
हरी जप इत-उत कबहूँ न डोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल
केशव माधव गोविन्द बोल॥

चक्रधारी भज हर गोविन्दम्,
मुक्तीदायक परमानन्दम्।
हरदम कृष्ण मुरारी बोल,
केशव माधव गोविन्द बोल॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि भगवान के नाम की महिमा और उसके असीम अनुकंपा का जीवंत दस्तावेज है। भजन के मुखड़े में ही भगवान के विभिन्न रूपों—केशव, माधव और गोविंद—का स्मरण करने का आह्वान किया गया है। गीतकार और गायक के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि ईश्वर का नाम समस्त दुखों का नाश करने वाला और परम सुख प्रदान करने वाला है।

भजन के पहले अंतरे में कहा गया है कि प्रभु का नाम अत्यंत सुखकारी है, जो बड़े से बड़े पापों को क्षण भर में नष्ट कर देता है। जिस प्रकार अमृत पीने से अमरता मिलती है, उसी प्रकार हरि नाम रूपी अमृत का पान करने से मनुष्य जन्म-मरण के चक्र से छूट जाता है। इसके पश्चात पौराणिक उदाहरणों के माध्यम से हरि नाम की शक्ति को दर्शाया गया है। माता शबरी, अहिल्या और गणिका (पिंगला) जैसे पात्रों का स्मरण किया गया है, जिन्होंने प्रभु के नाम और स्मरण मात्र से मोक्ष प्राप्त किया। यह इस बात का प्रमाण है कि भगवान जाति, कुल या पाप-पुण्य नहीं देखते, बल्कि शरणागत का भाव देखते हैं।

नरसी मेहता की कथा का उल्लेख करते हुए भजन बताता है कि जब भक्त ने पूर्ण विश्वास के साथ पुकारा, तो भगवान 'साँवलशाह' बनकर उसकी हुंडी स्वीकार करने स्वयं पधारे। अंत में यह संदेश दिया जाता है कि राम और हरि के नाम पर सभी का समान अधिकार है—चाहे वह बालक हो, वृद्ध हो, युवा हो या स्त्री-पुरुष हो। जीवन में किसी भी परिस्थिति में अपने चित्त को विचलित न होने देकर निरंतर हरि नाम का स्मरण करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए हमारे श्री हरि स्तोत्र और श्री हनुमान चालीसा के पावन लेखों का अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • सर्वसुलभ भक्ति: इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग सरलता से गा सकते हैं।
  • पौराणिक संदर्भों का समावेश: शबरी, अहिल्या, गणिका और नरसी भगत के उदाहरणों के माध्यम से भगवत्कृपा की व्यापकता को समझाया गया है।
  • नाम स्मरण की महिमा: कलियुग में केवल हरि नाम के जप से ही मुक्ति और शांति प्राप्त होने के सिद्धांत को रेखांकित किया गया है।
  • मधुर संगीत संयोजन: पमेला जैन की सुरीली और भावपूर्ण आवाज ने इस संकीर्तन को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी सत्संग और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान गाया जा सकता है। इसे अकेले में ध्यान लगाते समय अथवा सामूहिक संकीर्तन (कीर्तन मंडली) के साथ ताल से ताल मिलाकर गाने से विशेष मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करने से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री विष्णु, उनके अवतार भगवान श्री राम, श्री कृष्ण, तथा केशव, माधव और गोविंद स्वरूपों को समर्पित है। इसके साथ ही संत नरसी मेहता, माता शबरी और महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या के प्रसंगों के माध्यम से उन महान भक्तों और संतों का स्मरण किया जाता है जिन्होंने भगवत भक्ति के मार्ग पर चलकर इतिहास रच दिया।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

भक्ति संगीत की परंपरा में संकीर्तन का एक विशेष स्थान रहा है। पमेला जैन द्वारा गाए गए इस भजन की रचना पारंपरिक संकीर्तन शैलियों और श्री कृष्ण-विष्णु भक्ति के प्राचीन पदों से प्रेरित होकर की गई है। इसमें लोक संगीत की मिठास के साथ-साथ उच्च कोटि का आध्यात्मिक भाव समाहित है, जो श्रोताओं को तन्मय कर देता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल और सुबोध हिंदी (खड़ी बोली एवं ब्रज भाषा के सहज शब्दों के मिश्रण) में रचित है। इसकी काव्य शैली लयात्मक और प्रवाहित है, जिसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। शब्दावली इतनी सरल है कि एक आम ग्रामीण से लेकर शहर का हर संगीत प्रेमी इसे आसानी से समझ और गुनगुना सकता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • भगवान के नाम में असीम शक्ति है, जो मनुष्य के सारे संतापों को दूर कर सकती है।
  • भक्ति में जात-पात, ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं होता; केवल सच्ची भावना का महत्व है।
  • कठिन से कठिन समय में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए और विचलित नहीं होना चाहिए।
  • निरंतर नाम स्मरण से अंतःकरण शुद्ध होता है और परम आनंद की प्राप्ति होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
सुखकारी सुख देने वाला प्रभु का नाम सभी दुखों को मिटाकर सुख देता है।
बेतोल अमूल्य, जिसकी कोई तुलना न हो नाम की महिमा इतनी महान है कि उसका मोल नहीं लगाया जा सकता।
गणिका पिंगला या वैश्या अपने तोते को 'राम' पढ़ाते-पढ़ाते मोक्ष पाने वाली पात्रा।
हुण्डी सिकारी हुंडी स्वीकार करना भक्त नरसी मेहता की सांवरिया द्वारा सहायता का प्रसंग।
भवसागर संसार रूपी समुद्र जन्म-मरण का चक्र जिसे पार करना है।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"नाम प्रभु का है सुखकारी, पाप काटेंगे क्षण में भारी।" - इस पंक्ति का भाव यह है कि संसार में जितने भी कष्ट और पाप हैं, वे भगवान के पवित्र नाम के स्मरण मात्र से समाप्त हो जाते हैं।
"शबरी अहिल्या सदन कसाई, नाम जपन से मुक्ति पाई।" - यहाँ उन आत्माओं का उदाहरण है जिन्हें समाज ने तिरस्कृत किया या जो अनजाने में शापवश बंध गईं, परंतु प्रभु नाम से तर गईं।
"राम-नाम के सब अधिकारी, बालक वृद्ध युवा नर नारी।" - हरि नाम पर किसी एक वर्ग का अधिकार नहीं है, बल्कि हर आयु और लिंग के व्यक्ति इसके अधिकारी हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने।<प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हरी बोल हरी बोल हरी हरी बोल केशव माधव गोविंद बोल
गायिका पमेला जैन (Pamela Jain)
संगीत विधा भक्ति संकीर्तन / भजन
भाषा हिंदी / ब्रज मिश्रित
मुख्य विषय हरि नाम संकीर्तन एवं शरणागति
मुख्य भाव भक्ति, प्रेम, समर्पण और मुक्ति
उपयुक्त अवसर सत्संग, पूजा, प्रातः स्मरण, मंदिर दर्शन

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

'हरी बोल हरी बोल' भजन की गायिका कौन हैं?

इस लोकप्रिय भजन को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका पमेला जैन ने अपनी मधुर वाणी में गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि कलियुग में भगवान का नाम (केशव, माधव, गोविंद) ही समस्त दुखों का नाश करने वाला और भवसागर से पार लगाने वाला सबसे बड़ा साधन है।

क्या इस भजन को घर में दैनिक पूजा के समय गा सकते हैं?

हाँ, इस भजन को प्रातः काल या संध्या वंदन के समय घर में गाने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है।

भजन में किन-किन भक्तों का उल्लेख किया गया है?

भजन में माता शबरी, अहिल्या, गणिका और नरसी भगत जैसे प्रसिद्ध भक्तों और पात्राओं का उल्लेख किया गया है।

'केशव माधव गोविंद बोल' का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि अपनी वाणी से निरंतर भगवान श्री कृष्ण के केशव, माधव और गोविंद स्वरूपों के नामों का उच्चारण करते रहो।

क्या यह भजन सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है?

हाँ, इसकी सरल शब्दावली और लयबद्ध रचना के कारण इसे बच्चे, युवा और वृद्ध सभी बहुत आसानी से गा सकते हैं।

इस भजन को सुनने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है?

इसके श्रवण और गान से मन की चंचलता शांत होती है, तनाव कम होता है और भगवान के प्रति प्रेम भाव जागृत होता है।

क्या ऐसे अन्य भजन भी Bhaktilok पर उपलब्ध हैं?

हाँ, आप हमारी वेबसाइट पर विभिन्न देवी-देवताओं के चालीसा, स्तोत्र और भजन पा सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok के विद्वान आचार्यों और संपादकीय टीम द्वारा वेदों, पुराणों एवं पारंपरिक भक्ति संकीर्तन साहित्य के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक भक्ति सामग्री उपलब्ध कराना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं पारंपरिक संकीर्तन ग्रंथ
  • भक्ति आंदोलन के संतों की वाणी और पद संग्रह
  • भारतीय लोक संगीत एवं भजन परंपरा के प्रामाणिक संकलन

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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