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मेरे या शंकरा हो मौन में बैठा है तु लिरिक्स (Mere ya Shankara Ho Maun Me Baitha Hai Tu Lyrics in Hindi) - Hansraj Raghuwanshi Shiv Bhajan

हंसराज रघुवंशी के प्रसिद्ध शिव भजन मेरे या शंकरा हो मौन में बैठा है तु लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित | Bhaktilok

शिव भजन | Bhakti Sangeet

Hansraj Raghuwanshi

प्रकाशित तिथि: 2023 / अद्यतन तिथि: 2026 | लेखक: भक्तिलोक विद्वत परिषद | श्रेणी: शिव भजन एवं गीत

देवादिदेव महादेव भगवान शिव की असीम कृपा और उनकी रहस्यमयी महिमा का गुणगान करने वाला प्रसिद्ध भजन "मेरे या शंकरा हो मौन में बैठा है तु" (Mere ya Shankara Ho Maun Me Baitha Hai Tu) आधुनिक भक्ति संगीत जगत के लोकप्रिय गायक हंसराज रघुवंशी द्वारा गाया गया एक अत्यंत भावपूर्ण और आत्मिक भजन है। भगवान शिव के शांत, गंभीर, और मौन स्वरूप को समर्पित यह रचना साधक के अंतर्मन को झकझोर देती है। इस भजन में एक भक्त की अपने आराध्य भोलेनाथ के प्रति अनन्य श्रद्धा, विरह, समर्पण और एकांत में उनकी आराधना करने के भाव को अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली शब्दों में पिरोया गया है। शिव साधक जब कैलाशपति की इस महिमा का स्मरण करते हैं, तो उनका मन भौतिक संसार की भागदौड़ से दूर होकर मौन और ध्यान की गहराइयों में उतर जाता है। भक्तिलोक के इस विस्तृत आलेख में हम आपको इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल (Lyrics), हिंदी अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व से अवगत कराएंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन - शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:


शंभू महादेवा...

जय जय शंकरा, शंभू महादेव, जय जय शंकरा, शंभू...

ओ मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु,
हो तेरे दर्शन को तरसे मेरी रुह।
मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु,
हो बैठा कैलाश में तू अनंत आकाश में तू,
हो पग पग मै चलेया मिलने की आस में हु।

मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु,
हो तू है तो मै हु तुझ बिन मै क्या हु,
हो मन बैरागी हुआ तेरी लगान में हु।
मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु,
हो मेरी डोर बंधी मै तुझमे समा रहा हूँ,
हो सांसो की माला में तेरा ही नाम जपु।

मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु,
हो मतलब के रिश्ते तेरी दुनिया में कैसे रहू,
हो आऊँ जब मिलने शरण में लेना तू।
मेरेया शंकरा हो मौन में बैठा है तु...

जग को तारने वाला हो, मेरा भोला भंडारी,
कष्ट मिटाने वाला हो, मेरा भोला भंडारी ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन भगवान शिव के मौन और ध्यानस्थ स्वरूप का अत्यंत सुंदर वर्णन करता है। देवादिदेव महादेव संसार के प्रलय और सृजन के स्वामी हैं, किंतु उनका मूल स्वभाव ध्यान और मौन में स्थित रहना है। इस भजन का प्रत्येक शब्द भक्त के भीतर छिपी पुकार को प्रकट करता है:

प्रथम अंश की व्याख्या

भक्त अपने आराध्य को संबोधित करते हुए कहता है कि हे मेरे शंकरा! आप इस ब्रह्मांड में परम मौन को धारण करके बैठे हैं। आपकी इस शांत और रहस्यमयी स्थिति के कारण मेरी आत्मा आपके दिव्य दर्शन के लिए व्याकुल और तरस रही है। आप विशाल कैलाश पर्वत पर और इस अनंत आकाश में सर्वत्र व्याप्त हैं, और मैं केवल आपसे मिलने की आशा में पग-पग आगे बढ़ता जा रहा हूँ।

द्वितीय अंश की व्याख्या

भक्त अपने अस्तित्व को भगवान शिव से जोड़ते हुए स्वीकार करता है कि इस संसार में मेरा कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है—"तू है तो मैं हूँ, तुझ बिन मैं क्या हूँ?" भगवान की लगन और प्रेम में पड़कर भक्त का मन अब सांसारिक मोह-माया से विरक्त होकर 'बैरागी' हो चुका है। उसकी सांसें हर पल भगवान शिव का ही सिमरन कर रही हैं और वह अपनी सांसों की माला में केवल भोलेनाथ का नाम जप रहा है।

अंतिम अंश की व्याख्या

संसार की स्वार्थी प्रकृति पर कटाक्ष करते हुए भक्त कहता है कि हे प्रभु, इस दुनिया में हर रिश्ता मतलबी हो चुका है, ऐसे में मैं इस मायावी दुनिया में कैसे रहूँ? मेरी एकमात्र प्रार्थना यही है कि जब भी मैं जीवन के अंत में या साधना की पराकाष्ठा पर आपसे मिलने आऊँ, तो मुझे अपनी शरण में अवश्य स्थान देना। आप ही संपूर्ण जगत को तारने वाले और सभी भक्तों के कष्टों को दूर करने वाले 'भोला भंडारी' हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शिव भक्ति का अनूठा स्वरूप: यह भजन भगवान शिव के रौद्र रूप के स्थान पर उनके शांत, ध्यानस्थ और करुणामय स्वरूप पर प्रकाश डालता है।
  • आधुनिक व पारंपरिक संलयन: हंसराज रघुवंशी की ओजस्वी और भावुक आवाज ने इस भजन को युवाओं और वृद्धों दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय बना दिया है।
  • सांसारिक विरक्ति का संदेश: यह रचना सिखाती है कि कैसे भौतिक दुनिया के स्वार्थी संबंधों से ऊपर उठकर केवल परमात्मा से प्रेम करना चाहिए।
  • सत्संग, जागरण, शिवरात्रि और कांवड़ यात्रा के दौरान इस शिव तांडव स्तोत्र और भजनों का विशेष रूप से गान किया जाता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भगवान शिव की आराधना के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4 से 6 बजे के बीच) या संध्याकाल का समय अत्यंत उत्तम माना जाता है। इस भजन को सुनते या गाते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  1. स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शिव मंदिर या घर के ईशान कोण में पूजा स्थल पर बैठें।
  2. शिवलिंग का जल, दूध, बेलपत्र और धतूरे से पूजन करने के पश्चात इस भजन का मानसिक या मौखिक गान करें।
  3. दीपक प्रज्वलित कर धूप दिखाएं और आंखें बंद करके भोलेनाथ के मौन स्वरूप का ध्यान करें।
  4. नियमित रूप से महामृत्युंजय मंत्र के साथ इस भजन का स्मरण करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शंकरा कल्याण करने वाले भगवान शिव का नाम जो सबका मंगल करते हैं
मौन शांत, वाणीहीन अवस्था परम चेतना और ध्यान की अगाध स्थिति
कैलाश शिव का धाम हिमालय का पवित्र शिखर जहाँ शिव निवास करते हैं
बैरागी मोह-माया से विरक्त संसार से नाता तोड़कर ईश्वर मेंलीन होने वाला
भोला भंडारी सरल हृदय से सब कुछ देने वाले शिव की सहज कृपा और उदारता का प्रतीक

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम मेरे या शंकरा हो मौन में बैठा है तु (Mere ya Shankara)
आराध्य देव देवादिदेव महादेव भगवान शिव (Lord Shiva)
गायक / कलाकार हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi)
भाषा हिंदी / ब्रज मिश्रित बोल
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, वैराग्य और शिव प्रेम
उपयुक्त अवसर महाशिवरात्रि, सावन मास, सोमवार व्रत, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन लोकप्रिय गायक और शिव भक्त हंसराज रघुवंशी द्वारा गाया गया है।

इस भजन का मुख्य भाव भगवान शिव के प्रति अनन्य प्रेम, उनके मौन ध्यान स्वरूप के दर्शन की लालसा और सांसारिक मोह-माया से विरक्ति है।

भगवान शिव अत्यंत सरल स्वभाव के हैं और अपने भक्तों की सच्ची पुकार पर बहुत जल्दी प्रसन्न होकर उन्हें सब कुछ (भंडार) प्रदान कर देते हैं, इसलिए उन्हें भोला भंडारी कहा जाता है।

यह भजन सावन के महीने, महाशिवरात्रि, प्रत्येक सोमवार के व्रत और घर पर होने वाले शिव सत्संग या जागरण के समय सुनने के लिए अत्यंत उत्तम है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तलोक पर प्रकाशित यह सामग्री शिव भक्तों की आध्यात्मिक जिज्ञासाओं और भजन प्रेमियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस आलेख में भजन के प्रामाणिक बोल, सरल हिंदी अर्थ और सांस्कृतिक महत्व का समावेश किया गया है ताकि पाठकों को पूर्ण भक्ति रस की प्राप्ति हो सके।


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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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