Hanuman Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

यह प्रेम सदा भरपूर रहे हनुमान तुम्हारे चरणो में लिरिक्स (Yah Prem Sada Bharpur Rahe Lyrics in Hindi) - by Devendra Pathak Ji Maharaj

हनुमान जी की चरणों में प्रेम और भक्ति का अद्वितीय भजन, मानसिक शांति एवं आशीर्वाद की प्राप्ति का साधन।

प्रस्तावना एवं परिचय

हनुमान चरणों में प्रेम की बूँदें

प्रभु हनुमान के चरणों में प्रेम-भक्ति की भावना व्यक्त करने वाला भजन, भक्तों को आध्यात्मिक समर्पण की ओर प्रेरित करता है।

यह प्रेम सदा भरपूर रहे हनुमान तुम्हारे चरणो में यह अर्ज मेरी मंजूर रहे हनुमान तुम्हारे चरणो में यह प्रेम सदा भरपूर रहे यह प्रेम सदा भरपूर रहे निज जीवन की यह डोर तुम्हे सौपी है दया कर इसको धरोउद्धार करो ये दास पड़ा हनुमान तुम्हारे चरणों में यह प्रेम सदा भरपूर रहे संसार मै देखा सार नहीं तभी चरणों की शरण गई भवबन्ध कटे ये विनती है हनुमान तुम्हारे चरणों मै यह प्रेम सदा भरपूर रहे आँखों में तुम्हारा रूप रमे मन ध्यान तुम्हारे में मगन रहे धन अर्पित निज सब कर्म करे हनुमान तुम्हारे चरणों मै यह प्रेम सदा भरपूर रहे ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य भाव प्रेम और भक्ति के माध्यम से हनुमान जी की महिमा का वर्णन करना है। पहले चरण में प्रार्थना की गई है कि ये प्रेम हमेशा हनुमान जी के चरणों में भरा रहे। यह दर्शाता है कि भक्त की सच्ची खुशी इसी में है कि वह भगवान के चरणों में समर्पित रहकर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करे। 'यह अर्ज मेरी मंजूर रहे' में यह भाव है कि भक्त का समर्पण और प्रार्थना ईश्वर तक पहुंचें और उनकी कृपा को प्राप्त करें। फिर, 'निज जीवन की यह डोर तुम्हे सौपी है...' यह बताता है कि भक्त ने अपने जीवन की सारी बंधनों को भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया है, जिससे मुक्ति की स्थिति की कामना की गई है।

भावार्थ के अनुसार, इस भजन में हनुमान जी के प्रति भक्त की अटूट भक्ति को रेखांकित किया गया है। 'संसार मै देखा सार नहीं' की पंक्ति दर्शाती है कि भक्त ने संसार की असारता को पहचान लिया है और इसी कारण हनुमान जी की शरण में आया है। वे अपने भजनों और प्रार्थनाओं के माध्यम से भवबंधन से मुक्ति की चाह रखते हैं। 'आँखों में तुम्हारा रूप रमे' इस बात का प्रतीक है कि भक्त भगवान के प्रेम को अपने जीवन का केंद्र मानता है। मन का ध्यान, धन का समर्पण, ये सब भक्त के हृदय में समर्पण और भक्ति की गहराई को दर्शाते हैं।

इस गीत का मूल धार्मिक तत्व भक्ति मार्ग को दर्शाता है। भक्ति मार्ग का सिद्धांत है कि भक्त जब अपने हृदय को पूरी तरह से भगवान में अर्पित करता है, तब उसे न केवल मानसिक बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त होती है। श्रद्धा, भक्ति, और समर्पण से भरे इस गाने में, भक्त के अहंकार का समर्पण और सेवा का भाव प्रमुख है। यह दर्शाता है कि हनुमान जी की कृपा से सारे दुख समाप्त होकर एक नई जीवन की शुरुआत होती है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान जी का भक्तिकार्य विशेष रूप से 'रामायण' में उल्लेखित है, जहां उन्होंने भगवान राम की सहायता की। वे शक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं, जो सभी देवी-देवता के प्रेम और सम्मान से परिपूर्ण हैं। 'श्रीमद्भागवत' में भी हनुमान जी की भक्ति का वर्णन मिलता है। इस भजन के माध्यम से भक्त हनुमान जी से शुभकामनाएं और आशीर्वाद प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, ताकि उनके जीवन की सभी बाधाएँ समाप्त हों।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान जी का ध्यान करने और इस भजन को गाने से मानसिक शांति और आत्मबल मिलता है। यह मन की कठोरता को दूर कर आंतरिक प्रेम और समर्पण को जागृत करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति संभव होती है। नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से नकारात्मकता दूर होती है और भक्त को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप preferably सुबह या संध्या को करना चाहिए। पूजा के समय शुद्ध मन से बैठकर दीपक जलाना और हनुमान जी को फूल और मिठाई चढ़ाना शुभ होता है। भक्त को ध्यान लगाते समय शांत मन से अपने हृदय की गहराइयों से भक्ति का अनुभव करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन हनुमान जी की कौन सी विशेषता को दर्शाता है?

यह भजन हनुमान जी के चरणों में अनंत प्रेम और भक्ति को दर्शाता है, जो भक्तों को आपसी संबंधों में ऊपर उठाता है।

क्या इस भजन का नियमित जाप करने से लाभ होता है?

हाँ, नियमित रूप से इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, तनाव में कमी और भक्ति में वृद्धि होती है।

इस भजन का क्या वैदिक संदर्भ है?

भजन में हनुमान जी का उल्लेख रामायण और पुराणों में मिलता है, जहां वे श्रीराम के प्रति अपनी गहरी भक्ति और सेवा भाव के लिए जाने जाते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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