Radha Kriya Kataksh Stotram

नवग्रह स्त्रोत लिरिक्स (Navagraha Stotram Lyrics in Hindi) - Navagraha Stotram Ketan Patwardhan - Bhaktilok

167 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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वैदिक ज्योतिष एवं स्तोत्र

नवग्रह स्त्रोत लिरिक्स (Navagraha Stotram Lyrics in Hindi) - केतन पाटवर्धन

प्रकाशित तिथि: 2026 | पाठन समय: 10 मिनट | संकलन एवं समीक्षा: भक्तलोक आध्यात्मिक टीम

भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति में ज्योतिष शास्त्र और ग्रहों की उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। हमारे जीवन, स्वभाव, कर्म फल और भाग्योदय पर सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—इन नौ ग्रहों का प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रभाव रहता है। जब जन्म कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल होती है या ग्रह दोष (जैसे शनि की साढ़ेसाती, ढैया, राहु-केतु की पीड़ा या मंगल दोष) उत्पन्न होते हैं, तब जीवन में विभिन्न प्रकार के कष्ट, बाधाएं और मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है। इन समस्त नवग्रह जनित बाधाओं के शमन, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के संचरण के लिए महर्षि व्यास द्वारा रचित नवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotram) अत्यंत शक्तिशाली, पावन और अचूक वैदिक स्तोत्र माना गया है। आधुनिक संगीत और स्वर में पिरोया गया केतन पाटवर्धन (Ketan Patwardhan) द्वारा प्रस्तुत यह स्तोत्र श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने के साथ-साथ आंतरिक शांति प्रदान करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम नवग्रह स्तोत्र के संपूर्ण लिरिक्स, शुद्ध उच्चारण, पदच्छेद, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ, पाठ विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण नवग्रह स्तोत्र लिरिक्स | Complete Navagraha Stotram Lyrics in Hindi

( श्री गणेशाय नमः )

1. सूर्य स्तोत्र (दिवाकर):
जपाकुसुमसंकाशं काश्यपेयं महद्युतिम् ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ॥

2. चंद्रमा स्तोत्र (शशि):
दधिषंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसंभवम् ।
नमामि शशिनं सोमं शम्भोर्मुकुटभूषणम् ॥

3. मंगल स्तोत्र (भूमिपुत्र):
धरणीगर्भसंभूतं विद्युत्कानतिसमप्रभम् ।
कुमारं शक्तिहस्तं च मंगलं प्रणमाम्यहम् ॥

4. बुध स्तोत्र:
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम् ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ॥

5. बृहस्पति स्तोत्र (गुरु):
देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसंनिभम् ।
बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ॥

6. शुक्र स्तोत्र (भार्गव):
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ॥

7. शनि स्तोत्र (शनैश्चर):
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् ।
छायामार्तण्डसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम् ॥

8. राहु स्तोत्र:
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम् ।
सिंहिकागर्भसंभूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ॥

9. केतु स्तोत्र:
पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकमम् ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम् ॥

॥ इति श्रीव्यासरचितं नवग्रहस्तोत्रं संपूर्णम् ॥

नवग्रह स्तोत्र का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Navagraha Stotram Meaning & Bhavarth

महर्षि व्यास द्वारा रचे गए इस स्तोत्र में प्रत्येक ग्रह के भौतिक स्वरूप, उनके कुल, उनके वर्ण, उनके आभूषणों और उनके आधिपत्य का अत्यंत काव्यात्मक और वैज्ञानिक वर्णन किया गया है। आइए प्रत्येक श्लोक के गहरे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय अर्थ को समझें:

सूर्य देव (दिवाकर) का अर्थ:

जो जाहिद के फूल (जपाकुसुम) के समान लाल रंग वाले हैं, महर्षि कश्यप के कुल में उत्पन्न हुए हैं, जो अत्यधिक तेजवान और कांतिवान हैं। जो अज्ञान और अंधकार के शत्रु (तमोऽरि) हैं तथा समस्त पापों का नाश करने वाले हैं, ऐसे सूर्य देव (दिवाकर) को मैं प्रणाम करता हूँ।

चंद्र देव (शशि/सोम) का अर्थ:

जो दही, शंख और बर्फ के समान श्वेत वर्ण वाले हैं, क्षीरसागर (दूध के समुद्र) से जिनकी उत्पत्ति हुई है, जो समस्त औषधियों के स्वामी सोम हैं और जो देवर्षि भगवान शिव के मस्तक का आभूषण (चंद्रमा) हैं, उन चंद्रदेव को मैं बारंबार नमन करता हूँ।

मंगल देव (भौम/कुमार) का अर्थ:

जो पृथ्वी के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं, बिजली के समान जिनकी चमक और कांति है, जो कुमार रूप में अपने हाथ में शक्ति (वेला/आयुध) धारण करते हैं, ऐसे मंगल ग्रह को मैं प्रणाम करता हूँ। यह साहस, पराक्रम और ऊर्जा के प्रतीक हैं।

बुध देव का अर्थ:

जो प्रियंगु (सुगंधित मंजरी) की कलिक के समान श्याम वर्ण (सांवले) हैं, जिनकी रूप-छवि अत्यंत अप्रतिम और सुंदर है, जो अत्यंत सौम्य स्वभाव वाले और श्रेष्ठ गुणों से युक्त हैं, उन बुध देव को मैं प्रणाम करता हूँ। यह बुद्धि, वाणी और व्यापार के कारक हैं।

बृहस्पति देव (गुरु) का अर्थ:

जो देवताओं और ऋषियों दोनों के गुरु हैं, सुवर्ण (सोने) के समान जिनका दिव्य और कांतिमान शरीर है, जो बुद्धि के स्वरूप और तीनों लोकों के स्वामी (या ज्ञानदाता) हैं, उन बृहस्पति देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

शुक्र देव (भार्गव) का अर्थ:

बर्फ, कुंद पुष्प और मृणाल (कमल की नाल) के समान जिनका श्वेत और निर्मल आभा है, जो दैत्यों के परम गुरु हैं, और समस्त शास्त्रों के प्रवर्क्ता एवं ज्ञाता हैं, उन भार्गव (शुक्र) को मैं प्रणाम करता हूँ।

शनि देव (शनैश्चर) का अर्थ:

जो नीले अंजन (काजल) के समान जिनकी कांति है, जो सूर्य के पुत्र और यमराज के बड़े भाई हैं, तथा छाया और सूर्य के मिलन से जिनकी उत्पत्ति हुई है, उन शनैश्चर देव को मैं नमन करता हूँ।

राहु का अर्थ:

जिनका शरीर आधा (धड़ रहित मस्तक रूप) है, जो महापराक्रमी हैं, सूर्य और चंद्रमा को भी जो ग्रसित (विमर्दन) कर लेते हैं, और सिंहिका के गर्भ से जिनकी उत्पत्ति हुई है, उन राहु देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

केतु का अर्थ:

जो पलाश के लाल फूलों के समान आभा वाले हैं, जो तारों और ग्रहों के मस्तक पर (ऊपरी आकाशीय मंडल में) विराजमान हैं, जो रौद्र स्वभाव, भयंकर और उग्र रूप वाले हैं, उन केतु देव को मैं प्रणाम करता हूँ।

नवग्रह स्तोत्र की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार, हमारे जीवन में आने वाले सुख-दुःख और उतार-चढ़ाव प्रत्यक्ष रूप से ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति से जुड़े होते हैं। श्री हनुमान चालीसा के पाठ के साथ-साथ नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने से शनि, राहु और केतु के कुप्रभाव स्वतः शांत होने लगते हैं।

  • मानसिक शांति और एकाग्रता: नियमित पाठ से मन का भटकाव दूर होता है और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
  • ग्रह दोष निवारण: जन्मकुंडली में स्थित कालसर्प दोष, पितृ दोष, साढ़ेसाती और महादशा के कष्ट कम होते हैं।
  • स्वास्थ्य लाभ: सूर्य और चंद्रमा की कृपा से शारीरिक ऊर्जा, ओज और मानसिक संतुलन में वृद्धि होती है।
  • सफलता और समृद्धि: बुध, गुरु और शुक्र की कृपा से करियर, व्यापार, शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में उन्नति के द्वार खुलते हैं।

गायतन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Recite

नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने के लिए कुछ विशिष्ट नियमों और समय का पालन करने से सर्वोत्तम आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय परिणाम प्राप्त होते हैं:

सर्वोत्तम समय: प्रतिदिन प्रातः काल स्नान करने के पश्चात सूर्योदय के समय इस स्तोत्र का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है। विशेष रूप से रविवार के दिन सूर्य देव की उपासना और शनिवार के दिन शनि देव के निमित्त इस स्तोत्र का पाठ अचूक फलदायी होता है।

पूजा विधि: प्रातः स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। नवग्रह यंत्र या सूर्य/शिवजी के चित्र के सामने बैठकर एकाग्रचित्त होकर इस स्तोत्र का पाठ करें। केतन पाटवर्धन द्वारा गाए गए संस्करण को सुनने से उच्चारण की शुद्धता भी बनी रहती है और मन को गहरी शांति मिलती है।

एक नजर में नवग्रह स्तोत्र की जानकारी | Quick Information Table

विवरण तथ्य / जानकारी
स्तोत्र का नामनवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotram)
रचनाकारमहर्षि वेद व्यास
आधुनिक प्रस्तुतिकेतन पाटवर्धन (Ketan Patwardhan)
भाषासंस्कृत (देवनागरी लिपि)
मुख्य उद्देश्यग्रह शांति, नवग्रह दोष निवारण, आयु, आरोग्य एवं समृद्धि
कुल श्लोक9 श्लोक (प्रत्येक ग्रह के लिए एक)
उपयुक्त दिनप्रतिदिन, विशेषकर रविवार एवं शनिवार
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

नवग्रह स्तोत्र के रचयिता वेदों के संकलनकर्ता और महान ऋषि महर्षि वेद व्यास जी हैं। यह स्तोत्र पराशर ज्योतिष और पुराण ग्रंथों से प्रेरित होकर प्रकट हुआ है।

केतन पाटवर्धन का यह मधुर और शास्त्रीय शैली में गाया गया नवग्रह स्तोत्र यूट्यूब और प्रमुख संगीत स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है। इसे सुनकर शुद्ध उच्चारण सीखा जा सकता है।

हाँ, नियमित रूप से श्रद्धा और भक्ति के साथ नवग्रह स्तोत्र का पाठ करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं मानसिक बल की प्राप्ति होती है।

प्रातः काल सूर्योदय के समय स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र पहनकर इसका पाठ करना सबसे फलदायी माना गया है। संध्याकाल में भी इसका पाठ किया जा सकता है।

इस स्तोत्र में भारतीय ज्योतिष के नौ मुख्य ग्रहों—सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—का क्रमानुसार वर्णन किया गया है।

निसंदेह, सनातन संस्कृति में आध्यात्मिक साधना और स्तोत्र पाठ पर सभी का समान अधिकार है। स्त्रियाँ पूरी पवित्रता और श्रद्धा के साथ इस स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं।

हाँ, यदि आप संस्कृत पढ़ने में असमर्थ हैं, तो केतन पाटवर्धन या अन्य विद्वान गायकों द्वारा गाए गए इस स्तोत्र को ध्यानपूर्वक सुनने मात्र से भी मानसिक शांति और सकारात्मक स्पंदनों की प्राप्ति होती है।

पाठ के दौरान उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए, मन शांत और आदरभाव से परिपूर्ण होना चाहिए। पूजा स्थल को स्वच्छ रखना और शुद्ध मानसिक स्थिति बनाए रखना आवश्यक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ | Editorial Review & References

यह लेख सनातन ज्योतिष ग्रंथों, महर्षि पराशर की ज्योतिषीय परंपरा और पारंपरिक स्तोत्र संग्रहों के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को नवग्रह स्तोत्र के प्रामाणिक लिरिक्स, सरल अर्थ और इसकी आध्यात्मिक उपयोगिता से अवगत कराना है।

प्रमुख संदर्भ ग्रंथ: बृहत्पाराशरहोराशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र के मूल ग्रंथ, वैदिक स्तोत्र रत्नाकर एवं पारंपरिक लोक परंपराएं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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