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अन्नपूर्णा स्तोत्रम् लिरिक्स (Annapoorna Stotram Lyrics in Hindi) - Anuradha Paudwal Annapurna Stotra - Bhaktilok

281 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

अन्नपूर्णा देवी की कृपा: आहार और समृद्धि का स्तोत्र

अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ आपके जीवन में प्रचुरता और सुख-शांति लाएगा। इसे श्रद्धा से गाएं।

 अन्नपूर्णा स्तोत्रम् लिरिक्स (Annapoorna Stotram Lyrics in Hindi) - नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरीनिर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरीप्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी १नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरीमुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरीकाश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी २योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरीचन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरीसर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ३कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करीकौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरीमोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ४दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरीलीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरीश्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ५उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरीवेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरीसर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ६आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकारी शम्भोस्त्रिभावाकरीकाश्मीरात्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरीकामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ७देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरीवामं स्वादुपयोधरप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरीभक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ८चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरीचन्द्रार्काग्निसमानकुन्तलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरीमालापुस्तकपाशासाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ९क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरीसाक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरीदक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी १०अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभेज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ११माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरःबान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् १२ ||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

अन्नपूर्णा स्तोत्रम् में देवी अन्नपूर्णा की असीम कृपा और विविध रूपों का वर्णन किया गया है। यह स्तोत्र सर्वप्रथम देवी से भिक्षा की प्रार्थना के साथ शुरू होता है, जहाँ भक्त 'भिक्षां देहि' कहकर आशीर्वाद की याचना करता है। अन्नपूर्णा देवी को 'नित्यानन्दकरी' कहा गया है, जो कि सुख और संतोष प्रदान करने वाली हैं। देवी की सुंदरता और उनके विभूषणों का जिक्र करते हुए 'ह्रदयोद्वीप' और 'कुम्भान्तरी' जैसे विशेषण उनके दिव्य स्वरूप का चित्रण करते हैं। यहाँ तक कि उन्हें 'प्रत्यक्षमाहेश्वरी' के रूप में दर्शाया गया है, जो भक्तों में आध्यात्मिक जागरूकता का संचार करती हैं। हर श्लोक में देवी के विभिन्न रूपों और शक्तियों का उल्लेख किया गया है, जिससे भक्तों में विश्वास और श्रद्धा का संचार होता है।

इस स्तोत्र का भावार्थ यह है कि देवी अन्नपूर्णा हमारी सभी इच्छाओं की पूर्ति करती हैं। भक्त की अभिलाषाएँ चाहे भौतिक हों या आध्यात्मिक, अन्नपूर्णा देवी उनके सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली हैं। प्रत्येक मंत्र में देवी के प्रति भक्ति का एक अनूठा संदेश है, जिसमें वे भक्तों की रक्षा करती हैं। उन पर असीम दया के रूप में देखा जा सकता है, जैसे 'सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी' इस बात को इंगित करता है कि देवी केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान का भी साधन हैं। यह भक्तों से संवाद को सशक्त बनाता है, जो उन्हें संपूर्णता और शांति की ओर ले जाता है।

अन्यथा अन्नपूर्णा स्तोत्र समर्पण की भावना को भी व्यक्त करता है। भक्त जब अन्नपूर्णा से भिक्षा की प्रार्थना करते हैं, तो यह केवल भोजन की याचना नहीं है, बल्कि सभी प्रकार की भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि के लिए आभार प्रकट करना है। अन्नपूर्णा देवी के प्रति समर्पण भावती संजीवनी शक्ति को दर्शाता है, जो भक्तों के जीवन में समृद्धि लाने का साधन हो सकता है। 'सर्वानन्दकरी' का विशेषण यह बताता है कि अन्नपूर्णा देवी के माध्यम से भक्त का जीवन सुख और संतोष से भर जाता है। इस स्तोत्र में भक्तिरस और भक्तिपथ को रेखांकित किया गया है, जिससे यह सिद्ध होता है कि भक्ति का मार्ग ही सच्ची समृद्धि की ओर ले जाता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

अन्नपूर्णा देवी का पूजन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इन्हें काशी (वाराणसी) की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। यह स्तोत्र प्राचीन पुराणों में वर्णित देवी अन्नपूर्णा के गुण और शक्तियों का बखान करता है। देवी अन्नपूर्णा का उल्लेख 'Skanda Purana' और अन्य ग्रंथों में मिलता है, जहाँ उनका स्थान और उनकी अपार कृपा का बखान है। जैसे कि यह स्तोत्र कहता है, 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे', यह दर्शाता है कि देवी को हर समय अन्न और समृद्धि प्रदान करने वाली माना जाता है। भक्तों के लिए यह स्तोत्र व्यक्तिगत और सामूहिक प्रार्थना का साधन है, जो स्वयं को और समाज को समृद्ध बनाने की प्रणेता मानी जाती हैं।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक प्रगति का लाभ मिलता है। यह प्रार्थना भक्ति और विश्वास को प्रबल करती है, साथ ही समृद्धि की प्राप्ति में सहायक होती है। भिक्षा की याचना से आत्मिक संतोष का अनुभव होता है। जिन भक्तों को जीवन में अभाव या संकट का सामना करना पड़ता है, उनको भी इस स्तोत्र का पाठ करते हुए सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व या संध्या के समय करना सबसे उत्तम होता है। पूजा स्थान पर एक दीया जलाएं, देवी की तस्वीर या प्रतिमा के समक्ष पुष्प अर्पित करें। ध्यान लगाते हुए साधक को मन शांत करके स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इस दौरान भक्त का मन प्रसन्न और श्रद्धा से भरा रहना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ सभी के लिए लाभकारी है?

हाँ, अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ सभी धार्मिक भावनाओं वाले व्यक्तियों के लिए लाभकारी है, क्योंकि यह मानसिक शांति और परिवेश में समृद्धि लाता है।

कितनी बार अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए?

अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन एक या अधिक बार किया जा सकता है, लेकिन विशेष अवसरों पर जैसे नवरात्रि में अधिक पाठ करने से विशेष लाभ होता है।

क्या अन्नपूर्णा देवी केवल भोजन की देवी हैं?

नहीं, अन्नपूर्णा देवी केवल भोजन की देवी नहीं हैं, बल्कि वे सारी समृद्धियों, सुख और संतोष की देवता मानी जाती हैं। उनकी उपासना से सभी प्रकार के संसाधनों की प्राप्ति होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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