श्री हनुमान जी को समर्पित यह पावन भजन "जिनकी कृपा की है महिमा अपार" बजरंगबली की असीम अनुकंपा, उनके रुद्रावतार स्वरूप और उनके भक्तों पर होने वाले कृपा बरसाने वाले स्वभाव का अत्यंत मनमोहक गुणगान करता है। गायक राजेंद्र जैन द्वारा स्वरबद्ध यह भजन कलयुग के प्रत्यक्ष देवता संकटमोचन हनुमान जी की महिमा को जीवंत करता है। इस भजन का प्रत्येक शब्द बजरंगबली के शौर्य, त्याग, सेवा भाव और राम भक्ति की पराकाष्ठा का दर्शन कराता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन की विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे, ताकि आप पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ इसका स्मरण कर सकें। हनुमान जी की उपासना करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं और साधक को अगाध साहस और ज्ञान की प्राप्ति होती है। ऐसे ही अन्य स्तोत्रों और भजनों के लिए आप हमारे श्री हनुमान चालीसा और संपूर्ण सुंदरकांड पाठ के लेख भी पढ़ सकते हैं।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
स्थाई (Mukhda):
जिनकी कृपा की है महिमा अपार,
लीना है हनुमत ने रुद्रावतार।
ये महादानी है हनुमान जी,
सर्वज्ञ ज्ञानी है हनुमान जी ।।
अंतरा 1:
साधुओं को तारे ये तो पापी जनों को उबारे,
दुष्ट दानवों को क्षण माहि प्रभु संहारे।
वीर बली हनुमत है,
सूरत लुभानी है हनुमान जी,
ये महादानी है हनुमान जी ।।
अंतरा 2:
राम जी के प्यारे देवी सीता की आँखों के तारे,
संकट में भक्तों के जो दौड़ के आते द्वारे।
अन्तर्यामी स्वामी है,
मूरत सुहानी है हनुमान जी,
ये महादानी है हनुमान जी ।।
अंतरा 3:
अंजनी के नंदन महावीर बलवंत वंदन,
चरणों में झुका के शीश करते सब अभिनंदन।
राजेंद्र जैन गाए, महिमा सुनाए,
प्रभु की कहानी है हनुमान जी,
ये महादानी है हनुमान जी ।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन गायक राजेंद्र जैन की मधुर वाणी से सजा हुआ एक ऐसा आध्यात्मिक काव्य है जो भगवान हनुमान के विभिन्न स्वरूपों और उनकी भक्तवत्सलता का बहुत ही सुंदर वर्णन करता है। भजन की पंक्तियों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि हनुमान जी की कृपा का दायरा असीम और अनंत है। वे भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्रावतार हैं, जिनका अवतार ही धर्म की स्थापना और भक्तों के त्राण के लिए हुआ है।
स्थाई भाग में कहा गया है कि जिनकी कृपा की महिमा अपार है, ऐसे महादानी और सर्वज्ञ ज्ञानी साक्षात् हनुमान जी हैं। वे सब कुछ जानने वाले और अपने भक्तों पर सब कुछ न्योछावर करने वाले महादानी हैं। 'साधुओं को तारे ये तो पापी जनों को उबारे' पंक्ति का अर्थ है कि बजरंगबली सज्जन और साधु स्वभाव के लोगों की रक्षा करते हैं तथा पापी और दुष्ट प्रवृत्तियों का नाश करते हैं। रावण और अन्य दुष्ट दानवों का संहार करने में उन्होंने प्रभु श्री राम की सहायता की थी। उनकी वीर और पराक्रमी छवि के साथ-साथ उनकी सुंदर सूरत भक्तों के मन को मोह लेती है।
आगे के भाग में वर्णन है कि वे मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के अत्यंत प्रिय और माता सीता की आँखों के तारे हैं। जब भी कोई भक्त संकट में होता है, हनुमान जी उसकी पुकार सुनकर तुरंत उसके द्वार चले आते हैं। वे घट-घट की जानने वाले अन्तर्यामी स्वामी हैं। माता अंजनी के नंदन, महावीर और बलवंत हनुमान के चरणों में सभी संत-महात्मा और भक्त अपना शीश झुकाकर वंदन करते हैं। अंत में गायक राजेंद्र जैन कहते हैं कि वे अपनी इस रचना के माध्यम से हनुमान जी की महिमा का गुणगान कर रहे हैं, क्योंकि उनकी कथा अष्टसिद्धियों और नवनिधियों की प्रदाता है। ऐसे ही अन्य भजनों के आनंद के लिए आप श्री राम भजन संग्रह और संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ भी कर सकते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
किसी भी धार्मिक भजन का श्रवण और गायन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम होता है। "जिनकी कृपा की है महिमा अपार" भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- रुद्रावतार स्वरूप का स्मरण: यह भजन हनुमान जी के शिव अंश (रुद्रावतार) का स्मरण कराता है, जिससे साधक के भीतर अपूर्व ऊर्जा और साहस का संचार होता है।
- संकट निवारण: इस भजन को नियमित रूप से सुनने या गाने से जीवन के सभी प्रकार के भय, बाधाएं और मानसिक तनाव दूर होते हैं।
- भक्ति भाव की वृद्धि: यह रचना भगवान श्रीराम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाती है, जिससे साधक के मन में सच्ची भक्ति जागृत होती है।
- कलयुग में प्रत्यक्ष फल: हनुमान जी को कलयुग का जागृत देवता माना गया है, और उनकी महिमा का यह गुणगान भक्तों को ईश्वरीय सुरक्षा का अहसास कराता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस पावन भजन को किसी भी समय पूरी श्रद्धा के साथ गाया या सुना जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका स्मरण करने से अनंत गुणा फल प्राप्त होता है:
- नियमित पूजा में: सुबह और शाम की दैनिक पूजा के समय दीप प्रज्वलित करने के पश्चात इस भजन का गायन किया जा सकता है।
- मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी को समर्पित मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से इस भजन का पाठ या श्रवण करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
- हनुमान जयंती और पर्व: हनुमान जयंती, दीपावली या अन्य धार्मिक उत्सवों के दौरान सत्संग और जागरण में इस भजन को सामूहिक रूप से गाया जाता है।
- गायतन विधि: सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की प्रतिमा के समक्ष धूप-दीप जलाएं और ताली बजाकर या संगीत के साथ प्रेम भाव से इस भजन का गान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक व्याख्या को पारंपरिक ग्रंथों, लोक कथाओं और प्रामाणिक भक्ति स्रोतों के आधार पर सत्यापित किया गया है ताकि पाठकों को उच्च गुणवत्ता वाली और शुद्ध सामग्री प्राप्त हो सके। Bhaktilok.in सनातन धर्म की संस्कृति और भजनों के प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है।
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