Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में लिरिक्स (Hanuman Naam Sabse Anmol Hai Jaha Me Lyrics in Hindi) - Mukesh Meena Hanuman Bhajan

मुकेश मीना का लोकप्रिय हनुमान भजन हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में लिरिक्स हिंदी में पढ़ें और भक्ति भाव का आनंद लें।

हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में - परिचय एवं भक्ति भाव

कलयुग के जागृत एवं प्रत्यक्ष देवता श्री संकटमोचन हनुमान जी की महिमा अपरम्पार है। उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करते हुए, लोक-गायक मुकेश मीना द्वारा स्वरबद्ध यह भजन "हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में" भक्तों के अंतःकरण को प्रदीप्त करने वाला एक अद्भुत आध्यात्मिक संकीर्तन है। सनातन भक्ति परंपरा में हनुमान जी को बल, बुद्धि, विद्या और अष्टसिद्धियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। जब मनुष्य संसार के दुखों, भयों और बंधनों से विचलित हो जाता है, तब केवल श्रीराम भक्त हनुमान जी का पावन नाम ही उसे भवसागर से पार लगाने की सामर्थ्य रखता है। इस भजन का मुख्य भाव साधक के भीतर अनन्य समर्पण, निष्काम भक्ति और आत्मबल का संचार करना है।

भजन की प्रत्येक पंक्ति में पवनसुत हनुमान की महिमा, उनकी असीम करुणा और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का सजीव चित्रण मिलता है। जिस प्रकार हनुमान जी ने अपनी छाती चीरकर यह सिद्ध कर दिया था कि उनके हृदय में केवल सिया-राम बसते हैं, उसी प्रकार इस भजन का श्रवण और गायन करने वाले भक्त के मन से भी संसार के सारे संशय और भय दूर हो जाते हैं। इस लेख में हम इसी पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, शब्दार्थ, भावार्थ और आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से अध्ययन करेंगे, जिससे साधक को पूर्ण मानसिक एवं आत्मिक शांति की प्राप्ति हो सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मुखड़ा):

हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में,
हर संकट टल जाए जो ध्यावे मन से मन में।
अंजनी के लाल की महिमा है न्यारी,
चरणों में झुक जाए दुनिया ये सारी।

अंतरा 1:

लंका को पल में जला डाला वीरा,
रामदूत बनके हर ली सबकी पीरा।
संजीवनी लाकर प्राण लखन के बचाए,
ऐसा वीर बलवान जग में कोई न आए।

अंतरा 2:

भूत पिशाच निकट नहीं आवै,
महावीर जब नाम सुनावै।
संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमंत बलबीरा।

अंतरा 3:

मुकेश मीना गुण गावे तेरे द्वार पर,
कृपा कर दो बासुकीनाथ सरकार पर।
जो भी शरण में तेरी आके झुक जाए,
उसकी हर झोली खुशियों से भर जाए।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

मुकेश मीना द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय भजन "हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में" का शाब्दिक और आध्यात्मिक अर्थ अत्यंत गहरा है। भजन के मुखड़े में गायक यह स्पष्ट करते हैं कि इस संपूर्ण संसार में यदि कोई सबसे अधिक मूल्यवान और शक्तिशाली मंत्र या नाम है, तो वह श्री हनुमंत लाल का नाम है। जो भी साधक सच्चे मन, शुद्ध अंतःकरण और अटूट श्रद्धा के साथ बजरंगबली का स्मरण करता है, उसके जीवन के तमाम बड़े से बड़े संकट क्षण भर में टल जाते हैं।

प्रथम अंतरे में हनुमान जी के महान पराक्रम का स्मरण किया गया है। रावण की स्वर्ण नगरी लंका को उनकी एक ही पूंछ की अग्नि ने भस्म कर दिया था, और रामदूत बनकर उन्होंने माता सीता की खोज कर संपूर्ण ब्रह्मांड को यह संदेश दिया था कि धर्म की रक्षा के लिए ईश्वर के भक्त किसी भी असंभव कार्य को संभव बना सकते हैं। लक्ष्मण जी के मूर्छित होने पर द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा करने वाले हनुमान जी जैसे परोपकारी और बलवान योद्धा इस सृष्टि में अन्यत्र दुर्लभ हैं।

अंतिम पंक्तियों में गायक मुकेश मीना अपनी दीनता और शरणागत भाव को प्रकट करते हुए हनुमान जी के चरणों में प्रार्थना करते हैं कि हे महावीर! आपके द्वार पर आने वाले हर दुखी प्राणी की झोली खुशियों से भर जाती है। यदि जीवन में सच्चा सुख और शांति प्राप्त करनी है, तो हनुमान जी की शरण में जाना ही एकमात्र उपाय है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

सनातन संस्कृति में हनुमान भजनों का गायन और श्रवण अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • कलयुग के जागृत देव: हनुमान जी अष्टचिरंजीवी में से एक हैं और कलयुग में प्रत्यक्ष रूप से अपने भक्तों की रक्षा करने वाले देवता माने गए हैं।
  • भय मुक्ति: इस भजन के निरंतर स्मरण से मन का अज्ञात भय, चिंताएं और नकारात्मक ऊर्जा स्वतः समाप्त हो जाती है।
  • भक्ति और शक्ति का संगम: यह भजन साधक को शारीरिक बल के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता और आत्मिक शक्ति प्रदान करता है।
  • भक्ति संगीत की परंपरा: मुकेश मीना की मधुर और ओजस्वी वाणी में गाया गया यह भजन श्रोताओं को भक्ति के सागर में डुबो देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

किसी भी धार्मिक भजन का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए उसे उचित समय और विधि के साथ सुनना या गाना चाहिए:

  • सर्वोत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्याकालीन बेला में (गोविन्द बेला) इस भजन का श्रवण अत्यंत फलदायी होता है। मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से इसका पाठ करना चाहिए।
  • स्थान: पूजा घर, मंदिर अथवा किसी शांत एवं पवित्र स्थान पर बैठकर इसे सुनना चाहिए।
  • विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर, हनुमान जी के समक्ष चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें, उन्हें लाल सिंदूर और चोला अर्पित करें, तत्पश्चात पूरी श्रद्धा के साथ इस भजन का गान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र बिंदु आराध्य देव संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं, जो भगवान श्रीराम के परम भक्त, माता अंजनी और केसरी नंदन के पुत्र तथा पवन देव के मानस पुत्र हैं। इनके स्मरण मात्र से महादेव शिव की भी कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि हनुमान जी को रुद्रवतार माना गया है। वहीं, इस भजन को अपनी सुमधुर आवाज से सजाने वाले लोकप्रिय लोक कलाकार मुकेश मीना हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से लोक-भक्ति को एक नई ऊर्ध्वाधर दिशा प्रदान की है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक भजन परंपरा में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर रचनाएं तैयार की जाती हैं। "हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में" भजन की पृष्ठभूमि विशुद्ध रूप से हनुमान भक्ति और हनुमानगढ़ी, सालासर धाम तथा मेहंदीपुर बालाजी के चमत्कारों से प्रेरित है। लोक कलाकारों द्वारा रचे गए ऐसे भजन गांव-गांव और शहर-शहर में रामकथा, सुंदरकांड पाठ और मंगलवार के सत्संगों में अत्यंत चाव से गाए जाते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा अत्यंत सरल, सहज और आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करने वाली हिंदी और राजस्थानी-हरियाणवी लोक मिश्रित ब्रज-अवधि शब्दावली पर आधारित है। इसमें रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जिससे इसकी लयबद्धता और भी अधिक प्रखर हो जाती है। तुकबंदी इतनी सटीक है कि श्रोता स्वतः ही पंक्तियों को दोहराने पर विवश हो जाते हैं।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन के सबसे बड़े संदेश से अवगत कराता है कि अहंकार का त्याग करके यदि कोई व्यक्ति पूरी तरह ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाए, तो उसके जीवन के सभी मार्ग सुगम हो जाते हैं। हनुमान जी का जीवन यह सिखाता है कि शक्ति का उपयोग दूसरों को डराने के लिए नहीं, बल्कि उनकी रक्षा और सेवा के लिए होना चाहिए। निष्काम सेवा, विनय, धीरज और अटूट विश्वास ही सच्चे भक्त की पहचान हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
हनुमंत हनुमान जी (पवनसुत) भगवान हनुमान का एक नाम
अनमोल जिसका कोई मूल्य न आंका जा सके सबसे बढ़कर और मूल्यवान
संकटमोचन सारे संकटों को हरने वाले दुख और कष्टों का निवारण करने वाला
पीरा पीड़ा या कष्ट शारीरिक और मानसिक संताप
संजीवनी मृत्युतुल्य कष्ट या मूर्छा को दूर करने वाली जड़ी-बूटी जीवनदायिनी औषधि

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की पहली पंक्ति "हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में" यह उद्घोष करती है कि दुनिया के तमाम भौतिक सुखों से बढ़कर यदि कुछ शाश्वत है, तो वह हनुमान जी का पावन नाम है। इसके पश्चात "लंका को पल में जला डाला वीरा" पंक्ति उनके असीम शौर्य और पराक्रम का बखान करती है, जो यह बताती है कि अन्याय और अहंकार का विनाश करने में हनुमान जी समर्थ हैं। "भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावै" हनुमान चालीसा के प्रसिद्ध महामंत्र का प्रतिरूप है, जो भयभीत मन को अभय प्रदान करता है। अंत में मुकेश मीना अपनी भक्ति अर्पित करते हुए कहते हैं कि जो भी भक्त अपनी समस्त चिंताओं को छोड़कर बजरंगबली के चरणों में गिर जाता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित पावन मंत्रों का स्मरण करना अत्यंत फलदायी होता है:

  • मूल मंत्र: ॐ हनुमते नमः अथवा राम राम जय राम रटै जा हनुमान
  • संकट नाशक श्लोक:
    मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
    वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥
  • प्रसिद्ध दोहा:
    बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
    बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

बिंदु विवरण
भजन का नाम हनुमंत नाम सबसे अनमोल है जहाँ में (Hanuman Naam Sabse Anmol Hai Jaha Me)
गायक कलाकार मुकेश मीना (Mukesh Meena)
श्रेणी / शैली राजस्थानी एवं लोक शैली का भक्ति भजन
आराध्य देव संकटमोचन श्री हनुमान जी
भाषा सरल हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, शरणागति, संकट निवारण और आत्मबल
उपयुक्त अवसर मंगलवार पूजा, सुंदरकांड पाठ, जागरण और हनुमान जयंती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन के लोकप्रिय गायक मुकेश मीना (Mukesh Meena) हैं, जिन्होंने अपनी ओजस्वी और मधुर आवाज में इस हनुमान भजन को गाया है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि कलयुग में हनुमान जी का नाम सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जो भक्तों के सभी प्रकार के भय, संकट और दुखों का निवारण करता है।

मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित माना जाता है। इन दिनों में इस भजन का श्रवण अत्यंत पुण्यदायी होता है।

हाँ, इस भजन को आप अपने घर पर पूजा के समय, एकांत में अथवा परिवार के साथ सत्संग के दौरान पूरी पवित्रता और भक्ति भाव से गा या सुन सकते हैं।

मान्यता है कि हनुमान जी के स्मरण से शनि की साढ़ेसाती, ढैया, भूत-प्रेत बाधा, मानसिक तनाव और हर प्रकार के अकाल भय से मुक्ति मिलती है।

शास्त्रों के अनुसार महिलाएं हनुमान जी के चरणों में सिंदूर अर्पित कर सकती हैं, किंतु उन्हें बजरंगबली के विग्रह पर सीधे चोला या सिंदूर का लेप लगाने से बचना चाहिए।

श्रीराम नाम का निरंतर जप, हनुमान चालीसा का नित्य पाठ और गरीबों तथा जरूरतमंदों की सेवा करना हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे सरल और श्रेष्ठ मार्ग है।

दोनों ही रचनाएं हनुमान जी के गुणों, उनके द्वारा किए गए परोपकारी कार्यों और उनके नाम के स्मरण मात्र से मिलने वाली शक्ति का गुणगान करती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और धार्मिक संदर्भ सनातन परंपरा के अनुरूप पूरी प्रामाणिकता के साथ पाठकों तक पहुंचें। इस सामग्री को तैयार करते समय लोक-संगीत की परंपरा, भक्ति साहित्य और हनुमान आराधना के नियमों का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि पाठकों को एक उत्कृष्ट और संतुष्टिदायक अनुभव प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री हनुमान चालीसा एवं संकटमोचन स्तोत्र - सनातन धार्मिक ग्रंथ
  • लोक भक्ति भजन संग्रह एवं मौखिक परंपराएं
  • श्री हनुमान जी महाराज के पावन चरित्र और लीलाओं पर आधारित पौराणिक कथाएं

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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