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Hanuman Bhajan

तेरे दरबार आते रहेंगे (Tere Darbar Aate Rahenge Lyrics in Hindi) - Hanuman Bhajan by Sunil Sarvottam - Bhaktilok

70 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

तेरे दरबार आते रहेंगे (Tere Darbar Aate Rahenge Lyrics in Hindi) -  


जय हो जय हो बजरंग बाला 

जय हो जय हो अंजनी लाला 


तेरे दरबार पे आते थे आते हैं आते ही रहेंगे 

तेरा गुणगान सुनाते थे सुनाते हैं सुनाते ही रहेंगे 


तेरे दरबार पे हमने वो चमत्कार देखे हैं 

जो सब कुछ हार बैठे थे वो साहूकार देखे हैं 

तेरा दरबार सजाते थे सजाते हैं सजाते ही रहेंगे 


तेरे दरबार पे हारों को सदा जीत मिलती है 

तेरे दरबार पे गिरतो को सदा प्रीत मिलती है 

सदा प्रीत मिलती है सदा जीत मिलती है 

तेरे  दरबार से पाते थे पाते हैं पाते ही रहेंगे 


तेरे दरबार पे आते ही गम दूर होते हैं 

वो सब कुछ पा के जाते हैं के जो मजबूर होते हैं 

तेरे दर शीश झुकाते थे झुकाते हैं झुकाते ही रहेंगे 

तेरे दरबार पे आते थे आते हैं आते ही रहेंगे 




  • Song:  Tere Darbar Pe Aate Rahenge
  • Singer:  Sunil Sarvottam
  • Music: Sanjay Pal, Bunty Brijesh
  • Mix & Mastered: Sanjay Pal (Anjazz Studio)
  • Lyrics: Sunil Kumar 
  • Editing: Gulshan Kumar
  • Category:  Hindi Devotional (Hanuman Bhajan)
  • Producers:  Ramit Mathur
  • Label : Yuki


🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह भजन हनुमान जी के दरबार में निरंतर आने और उनकी महिमा का गुणगान करने का संदेश देता है। 'तेरे दरबार पे आते थे आते हैं आते ही रहेंगे' - यह पंक्ति भक्तों की अटूट निष्ठा और हनुमान जी के प्रति समर्पण को दर्शाती है। भजन में कहा गया है कि हनुमान के दरबार में हारों को जीत मिलती है और गिरतों को प्रीत मिलती है। यह आध्यात्मिक संदेश यह प्रदान करता है कि बजरंग बली की शरण में जाने वाले को कभी निराश नहीं होना पड़ता।

इस भजन का भावार्थ यह है कि हनुमान जी का दरबार सर्वदा भक्तों के लिए खुला रहता है। 'तेरे दरबार पे आते ही गम दूर होते हैं' - यह पंक्ति दर्शाती है कि केवल हनुमान की याद और उनके दरबार में समर्पण से ही सभी दुःख और कष्ट दूर हो जाते हैं। 'वो सब कुछ पा के जाते हैं के जो मजबूर होते हैं' - यह संदेश यह कहता है कि जो विकल और असहाय हैं, वे हनुमान जी की कृपा से सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान वह देवता हैं जिनकी पूजा रामायण काल से ही होती आई है। रामचरितमानस में तुलसीदास ने हनुमान को राम-भक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण माना है। हनुमान शक्ति, साहस और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। उन्हें 'बजरंग बली' कहा जाता है क्योंकि उनके शरीर की कठोरता वज्र जैसी है। यह भजन उन्हीं महान शक्तियों की आराधना करते हुए भक्तों को प्रेरणा देता है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। इस भजन का नियमित जाप करने से भक्त में आत्मविश्वास, साहस और आंतरिक शक्ति का विकास होता है। मानसिक शांति, कष्टों से मुक्ति और सकारात्मक विचारों की प्राप्ति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का सर्वश्रेष्ठ समय प्रातः काल या संध्या वेला है। एक शुद्ध स्थान पर बैठकर दीपक जलाएं और हनुमान जी को स्मरण करते हुए इस भजन को गाएं। आसन पर बैठते हुए रीढ़ को सीधा रखें, नेत्र बंद करें और हृदय से भजन गुनगुनाएं। मन को हनुमान जी के दरबार में ले जाने का प्रयास करें और सर्वोच्च भक्ति भाव से गाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

तेरे दरबार आते रहेंगे भजन में 'बजरंग बाला' और 'अंजनी लाला' किसे कहा गया है?

'बजरंग बाला' और 'अंजनी लाला' दोनों ही हनुमान जी के नाम हैं। 'बजरंग बाला' उनकी असीम शक्ति को दर्शाता है क्योंकि 'बजरंग' का अर्थ वज्र जैसा कठोर शरीर है, जबकि 'अंजनी लाला' उन्हें अंजनी माता का पुत्र कहकर उनके कोमल और भक्ति-भाव से परिचित कराता है।

हनुमान के दरबार में 'हारों को सदा जीत' और 'गिरतों को सदा प्रीत' कैसे मिलती है?

हनुमान जी सर्वोच्च भक्ति के प्रतीक हैं। जो व्यक्ति उनके दरबार में समर्पित भाव से आते हैं, वे अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर लेते हैं। हारे हुए लोग हनुमान की कृपा से साहस और विश्वास पाते हैं, जिससे वे जीवन में विजयी बनते हैं। गिरे हुओं को उनकी भक्ति और प्रेम से पुनः उत्थान की शक्ति मिलती है।

यह भजन 'तेरे दर शीश झुकाते थे झुकाते हैं झुकाते ही रहेंगे' में क्या संदेश देता है?

यह पंक्ति समर्पण और विनम्रता का शाश्वत संदेश देती है। इसका अर्थ है कि भक्त अतीत में भी, वर्तमान में भी और भविष्य में भी हमेशा हनुमान जी के समक्ष नत-मस्तक रहेंगे। यह निरंतर आध्यात्मिक विकास, शरणागति और भक्ति के मार्ग पर चलते रहने का वचन है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 31 Aug 2026

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