गजानन पूरे कर दो काज शरण में आये हम भी आज लिरिक्स (Gajanan Pure Kar Do Kaj Lyrics in Hindi) - Ram Rana Ganesh Bhajan
हिन्दू सनातन परंपरा में विघ्नहर्ता भगवान गणेश का स्मरण प्रत्येक शुभ कार्य, अनुष्ठान और भजन-कीर्तन के आरंभ में अनिवार्य माना गया है। राम राणा द्वारा रचित और स्वरबद्ध यह पावन भजन "गजानन पूरे कर दो काज शरण में आये हम भी आज" भगवान श्री रामचंद्र जी के भक्तों और गणेशोपासकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस भजन में आदिदेव गणेश की महिमा, उनके रूप-सौंदर्य, मूसा की सवारी, एकदन्त स्वरूप तथा भक्तों के संकट हरने की उनकी असीम करुणा का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। भक्ति, विनय और समर्पण के भाव से ओत-प्रोत यह रचना श्रोताओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करती है और जीवन के समस्त विघ्नों को दूर करने के लिए गजानन के चरणों में शरण लेने की प्रेरणा देती है।
श्रेणी: राम भजन | भाषा: हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित | विषय: गणेश वंदना एवं विघ्ननाशक स्तुति
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
श्लोक:
गुरु चरणों नमन करू फिर करू तुम्हारा ध्यान
शिव गौरा के लाडले मेरा आप ही रखना मान।।
स्थाई (मुखड़ा):
गजानन पूरे कर दो काज शरण में आये हम भी आज
शिव गौरा के राज दुलारे देवों के सरताज
गजानन पूरे कर दो काज....।।
अंतरा 1:
सबसे पहले शिव भोले ने करि तुम्हारी पूजा
हम भी पहले तुम्हे मनाएं काम करें फिर दूजा
लड्डुओं का तुम्हे भोग लगाएं आजाओ महाराज
गजानन पूरे कर दो काज....।।
अंतरा 2:
मूसे की तुम करो सवारी शोभा जग में न्यारी
एक दन्त गज बदन तुम्हारा जाऊं मैं बलिहारी
तीन लोक में राज तुम्हारा धरती या आकाश
गजानन पूरे कर दो काज....।।
अंतरा 3:
सात सुरों से आज सजाई हमने तेरी माला
हमको चरणों में रख लेना सुनलो गौरी लाला
तेरी किरपा से भगत की गूंजे ये आवाज़
गजानन पूरे कर दो काज....।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह भजन भगवान गणेश के प्रति अनन्य श्रद्धा और शरणागत भाव का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। भजन के प्रारंभिक श्लोक में रचयिता राम राणा अपने गुरु चरणों में नमन करने के पश्चात विघ्नहर्ता गणेश का ध्यान धरते हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती (गौरा) के लाडले पुत्र से अपने मान-सम्मान की रक्षा करने और जीवन के हर कार्य को निर्विघ्न रूप से पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं।
भजन के पहले अंतरे में सनातन धर्म की उस महान परंपरा का स्मरण किया गया है जिसके अनुसार किसी भी नए कार्य के आरंभ से पहले प्रथम पूज्य गणेश का पूजन किया जाता है। स्वयं देवों के देव महादेव ने भी त्रिपुरासुर वध और अन्य कार्यों से पूर्व गणेश जी की आराधना की थी। भक्त यहाँ भगवान को मोदक (लड्डुओं) का भोग अर्पित कर उन्हें अपने अनुष्ठान में सम्मिलित होने का सविनय निवेदन करता है।
द्वितीय अंतरे में भगवान गणेश के अद्वितीय स्वरूप का वर्णन किया गया है। उनका छोटा सा मूषक वाहन, उनका एकदंत गजवदन रूप और त्रिलोकी में उनका प्रभाव इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति के हर छोटे-बड़े जीव में ईश्वर का वास है। अंतिम अंतरे में संगीत और सात सुरों के माध्यम से गणेश वंदना करते हुए भक्त यह कामना करता है कि गौरी लाल (गणेश जी) उसे अपने श्रीचरणों में स्थान दें, ताकि उसकी भक्ति और स्वर सदा गूंजते रहें।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- प्रथम पूज्य की वंदना: यह भजन सनातन संस्कृति के उस मूल सिद्धांत को पुष्ट करता है जिसके अनुसार सभी देवी-देवताओं में गणेश जी की पूजा सबसे पहले होती है।
- शरणागत भाव: भजन की पंक्तियाँ 'शरण में आये हम भी आज' भक्त के पूर्ण समर्पण और आत्मसमर्पण के भाव को दर्शाती हैं।
- सरल एवं सुबोध भाषा: लोकभाषा और सरल हिंदी के शब्दों का प्रयोग होने के कारण इसे किसी भी आयु वर्ग के भक्त द्वारा आसानी से गाया जा सकता है।
- मानसिक शांति और एकाग्रता: इस भजन के निरंतर गायन या श्रवण से मन को असीम शांति मिलती है और कार्यक्षेत्र में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भगवान गणेश के इस पावन भजन को निम्नलिखित अवसरों और समय पर गाना अत्यंत शुभ माना जाता है:
- प्रातःकालीन वंदना: दिन की शुरुआत करने से पहले, घर के पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करके इस भजन का स्मरण करना चाहिए।
- नया कार्य आरंभ करते समय: गृह प्रवेश, नया व्यापार, परीक्षा या किसी भी मांगलिक आयोजन से पूर्व विघ्नहर्ता को प्रसन्न करने के लिए यह भजन आदर्श है।
- संकष्टी चतुर्थी एवं गणेश उत्सव: गणेश चतुर्थी, बुधवार के व्रत और संकष्टी चतुर्थी के दिन विशेष रूप से इस भजन का संकीर्तन किया जाता है।
- सत्संग और जागरण: किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, माता के चौकी या जागरण के गणेश वंदना सत्र में इसे प्रमुखता से गाया जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint
इस भजन के मुख्य आराध्य देव भगवान श्री गणेश हैं, जिन्हें विघ्नहर्ता, गजानन, एकदंत और लंबोदर जैसे नामों से जाना जाता है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र हैं तथा बुद्धि, विवेक और सफलता के देवता माने जाते हैं। इसके साथ ही इस भजन की रचना लोकप्रिय भजन गायक एवं रचनाकार राम राणा द्वारा की गई है, जिन्होंने अपनी सरल और मधुर शैली से गणेश भक्ति को जन-जन तक पहुँचाया है। इस भजन में भगवान श्री राम के आदर्शों के साथ-साथ शिव-परिवार की महिमा का भी सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन खड़ी बोली हिंदी और अवधी-ब्रज के लोक शब्दों के सुंदर मिश्रण से तैयार किया गया है। इसमें अनुप्रास और रुचक लयबद्धता का विशेष ध्यान रखा गया है जैसे 'राज दुलारे - सरताज', 'पूजा - दूजा', और 'सवारी - बलिहारी'। काव्य शैली अत्यंत सरल, प्रवाहमान और गंत्यात्मक है, जिससे इसे ढोलक, मंजीरे या हारमोनियम की ताल पर आसानी से गाया जा सकता है। उपमा और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग इस भजन के साहित्यिक सौंदर्य को और अधिक समृद्ध करता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल एक स्तुति नहीं है, बल्कि मानव जीवन के लिए एक गहरा आध्यात्मिक संदेश देता है:
- विनम्रता और अहंकार का त्याग: गणेश जी का छोटा सा वाहन मूषक हमें सिखाता है कि जीवन में ज्ञान और बुद्धि होने पर भी अहंकार नहीं करना चाहिए, बल्कि विनम्र रहना चाहिए।
- प्रथम कर्तव्य और अनुशासन: जीवन का कोई भी कार्य शुरू करने से पहले परमात्मा का स्मरण और बड़ों का आशीर्वाद आवश्यक है।
- संकटों में धैर्य: भगवान गणेश स्वयं विघ्नहर्ता हैं, अतः जीवन के दुखों और बाधाओं से घबराने के बजाय उनके चरणों में शरण लेनी चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| गजानन | हाथी के मुख वाले | भगवान गणेश का एक प्रसिद्ध नाम |
| काज | कार्य या काम | जीवन के महत्वपूर्ण कार्य एवं अनुष्ठान |
| मूसा | मूषक / चूहा | भगवान गणेश की सवारी |
| एक दन्त | एक दांत वाले | गणेश जी का विशिष्ट शारीरिक स्वरूप |
| गज बदन | हाथी के शरीर/मुख वाला | विघ्नहर्ता का विराट रूप |
| गौरी लाला | माता पार्वती के पुत्र | भगवान गणेश का स्नेहिल संबोधन |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"गुरु चरणों नमन करू फिर करू तुम्हारा ध्यान..."
भक्त सबसे पहले अपने गुरु को प्रणाम करता है जिनके ज्ञान से उसे भक्ति का मार्ग मिला है, और फिर गणेश जी का ध्यान धरता है।
"सबसे पहले शिव भोले ने करि तुम्हारी पूजा..."
पौराणिक कथाओं का स्मरण करते हुए भक्त कहता है कि महादेव ने भी अपने हर कार्य से पहले आपकी पूजा की है, इसलिए हम भी सबसे पहले आपको ही मनाते हैं।
"मूसे की तुम करो सवारी शोभा जग में न्यारी..."
छोटे से चूहे की सवारी करने वाले हे प्रभु! आपका यह अनोखा रूप पूरी दुनिया में सबसे सुंदर और निराला है।
"सात सुरों से आज सजाई हमने तेरी माला..."
भक्त अपने संगीत के सातों सुरों को पिरोकर आपके चरणों में प्रेम की माला अर्पित कर रहा है, आपकी कृपा से ही यह यश गूंज रहा है।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ निम्नलिखित पौराणिक गणेश मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी होता है:
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
(हे टेढ़े सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले भगवान गणेश! मेरे सभी कार्य बिना किसी विघ्न के हमेशा पूर्ण करें।)
इसके अतिरिक्त, आप भगवान गणेश की स्तुति के लिए श्री गणेश चालीसा और गणेश आरती का भी पाठ कर सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | गजानन पूरे कर दो काज शरण में आये हम भी आज |
|---|---|
| आराध्य देवता | भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता) |
| रचियता / गायक | राम राणा |
| भाषा | हिंदी / ब्रज-अवधी मिश्रित लोक भाषा |
| विषय / थीम | गणेश वंदना, विघ्ननाशक स्तुति एवं भक्ति |
| भाव | विनय, समर्पण और अगाध श्रद्धा |
| उपयुक्त अवसर | प्रातःकालीन पूजा, गणेश चतुर्थी, सत्संग, नया कार्य आरंभ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रશ્न 1: "गजानन पूरे कर दो काज" भजन के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस पावन भजन के रचयिता और गायक राम राणा जी हैं, जिन्होंने इसे बहुत ही मधुर और सरल शब्दों में पिरोया है।
प्रश्न 2: इस भजन को किस समय गाना सबसे अच्छा रहता है?
उत्तर: इस भजन को आप सुबह की पूजा के समय, बुधवार के दिन, गणेश चतुर्थी पर या किसी भी नए कार्य को शुरू करने से पहले गा सकते हैं।
प्रश्न 3: भगवान गणेश को किस वस्तु का भोग प्रिय है?
उत्तर: भजन में भी उल्लेख है कि भगवान गणेश को मोदक और बेसन या बूंदी के लड्डूओं का भोग अति प्रिय है।
प्रश्न 4: क्या इस भजन को घर पर महिलाएं और बच्चे गा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, यह भजन अत्यंत सरल और मधुर है। इसे परिवार के सभी सदस्य, बच्चे और महिलाएं किसी भी सत्संग या पर्व पर आसानी से गा सकते हैं।
प्रश्न 5: भगवान गणेश को 'प्रथम पूज्य' क्यों कहा जाता है?
उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान शिव ने गणेश जी को यह वरदान दिया था कि किसी भी यज्ञ, पूजा या मांगलिक कार्य में सबसे पहले तुम्हारी ही पूजा होगी।
प्रश्न 6: गणेश जी का वाहन क्या है?
उत्तर: भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है, जो चंचल मन और अहंकार के नियंत्रण का प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न 7: इस भजन को गाने से क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: इसके नियमित स्मरण से मानसिक शांति मिलती है, कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और बुद्धि व विवेक में वृद्धि होती है।
प्रश्न 8: क्या इस भजन से जुड़े अन्य पाठ भी किए जा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, आप इस भजन के साथ-साथ श्री गणेश चालीसा और संकट नाचन गणेश स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
भक्तिकाल से लेकर आधुनिक युग तक, भगवान गणेश की स्तुति भारतीय जनमानस की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न अंग रही है। राम राणा द्वारा रचित यह भजन भक्तों की भावनाओं को सहजता से अभिव्यक्त करता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस लेख को पाठकों की सुविधा के लिए पूरी प्रमाणिकता, शुद्ध उच्चारण और विस्तृत भावार्थ के साथ प्रस्तुत किया है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक लोक भजन संग्रह एवं मौखिक संत परंपरा
- सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं गणेश पुराण
- भक्ति संगीत एवं संकीर्तन ग्रंथ
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