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भोली सी सुरत माथेपे चंदा भजन लिरिक्स (Bholi Si Surat Mathe Pe Chanda Lyrics in Hindi) - Mukesh Kumar Shiv Bhajan

भोली सी सुरत माथे पे चंदा भजन भगवान शिव की भक्ति का मधुर अंश है, जो भक्तों को शांति और शिव कृपा का अनुभव कराता है।

प्रस्तावना एवं परिचय

शिव की भोली लीला: नीलकंठ भजन

शिव की भक्ति में खो जाएं, इस भजन के मधुर स्वरों के संग।

भोली सी सुरत माथेपे चंदादेखो चमकता जाएसदा समाधि में है मगन कहीभोला नजर ना आएजब भक्तो को पडे जरुरतखुद को रोक ना पाएसागर मंथन के अवसर परshivji विष पी जाएपीकर विष की गगरीभोला नीलकंठ कहलायेकोई भी मांगे बुंद तो येसारा सागर दिखलाएशिव की लीला बडी अलग हैकोई समझ ना पाएभोलीसी सुरत माथेपे चंदादेखो चमकता जाएसदा समाधि में मगन कहीभोला नजर ना आएजब भक्तोको को पडे जरुरतखुद को रोक ना पाएशिव अकाम गुण के है धामशिव का ही नाम संयमशिवलीला तो है अगाधतोडे करमो का बंधनशिव शक्ति से अलग नहीं हैसंसार का कण कणशिव का नाम लिए मन मेचलता हूँ मै तो हरदमभोलीसी सुरत माथेपे चंदादेखो चमकता जाएसदा समाधि में मगन कहीभोला नजर ना आएजब भक्तोको को पडे जरुरतखुद को रोक ना पाए
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भगवान शिव की भोली सूरत की चर्चा की गई है। 'भोली सी सुरत माथे पे चंदा' के माध्यम से दर्शाया गया है कि शिवजी की सूरत कितनी सरल और दिव्य है। उनकी सरलता में गहराई है, और यही उन्हें अपने भक्तों के लिए प्रिय बनाती है। 'सदा समाधि में है मगन' इस वाक्य से हमें यह संदेश मिलता है कि भगवान शिव ध्यान और समाधि में रहते हैं। भक्तों की जरूरत पड़ने पर वो तुरंत जाग उठते हैं, जैसे कि 'जब भक्तों को पड़े जरूरत खुद को रोक न पाए'। यह संकेत करता है कि भगवान शिव भक्तों के सभी कष्टों को दूर करने के लिए तत्पर रहते हैं।

इस भजन में शिव की विशेषताओं को बयां किया गया है। 'शिवजी विष पी जाए' इस वाक्य में समुद्र मंथन के समय शिवजी द्वारा विष पान करने की घटना की याद दिलाई जाती है। यह दर्शाता है कि शिवजी अपने भक्तों के कल्याण के लिए अपने परिश्रम से कठिनाइयों को सहन करते हैं। 'नीलकंठ' नाम से भी इन्हीं गुणों की पुष्टि होती है। शिव की लीला को अद्वितीय बताया गया है, 'कोई समझ ना पाए', यह बताता है कि शिव की जीवंतता और उनके विषय में गहराई से समझ पाने के लिए तप और साधना की आवश्यकता है।

भजन में यह भी उल्लेख किया गया है कि 'शिव अक्षाम गुण के हैं धाम', जो संकेत करता है कि शिव की महानता सब गुणों का समावेश है। उन्हें समर्पित होकर भक्त को संयम और धैर्य सीखाया जाता है। 'शिव लीला तो है अगाध', यह दर्शाता है कि शिव की कलाएँ सीमाहीन हैं। इसमें शिव और शक्ति का संबंध भी स्पष्ट है, यह दर्शाता है कि शिव और शक्ति एक ही हैं, एक-दूसरे से पृथक नहीं हैं। यह समग्र ब्रह्मांड की शक्ति का प्रतीक है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन भारतीय पौराणिक कथाओं में शिव की महानता को उजागर करता है। भगवान शिव का दुष्टों के प्रति दया, उनके द्वारा विष पान करने की कथा, और उनका नीलकंठ नाम से प्रसिद्ध होना सभी कथा अनुकृत हैं। शिव पुराण, भागवत पुराण, और रामायण में शिव का महत्व इस भजन में बखूबी दर्शाया गया है। शिवजी की उपासना से भक्तों को संसार के दु:ख-दर्दों से मुक्ति मिलती है। यह भजन भक्ति मार्ग के अनुसरण का प्रेरणा स्रोत है।

भगवान शिव की महिमा, लिंगोत्पत्ति और पवित्र तीर्थों के विवरण के लिए शिव पुराण का संपूर्ण अध्ययन करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, स्थिरता, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार होता है और भक्तों को कठिन समय में सहारा देता है। शिव की कृपा से जीवन में दूरियाँ मिटती हैं और हर संकट का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

'भोली सी सुरत माथे पे चंदा' भजन का जाप सुबह या शाम को किया जाना उत्तम है। दीये का जलाना और फूलों के साथ भगवान शिव का पूजन करना इस साधना का हिस्सा है। मन में दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता के साथ भजन का उच्चारण करें और ध्यान लगाएं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भोली सी सुरत माथे पे चंदा भजन का महत्व क्या है?

यह भजन भगवान शिव की सरलता और करुणा को दर्शाता है। भक्ति में इसे गाने से भक्तों को आत्मिक शांति और शिव कृपा का अनुभव होता है।

इस भजन में शिव की कौन सी विशेषता बताई गई है?

भजन में शिव की विष पान करने की घटना, उनका नीलकंठ नाम, और उनकी लीला की अद्वितीयता का वर्णन है, जो उनकी महानता को दर्शाता है।

भजन के जाप का सही समय और विधि क्या है?

सुबह या शाम को इस भजन का जाप करना श्रेयस्कर है। साधक को ध्यान लगाकर और दीया जलाकर शिव का पूजन करना चाहिए।

श्रेणियां: Holi Bhajan Holi Geet holi song

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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