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भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे वो तो गौरा से प्यार कर बैठे लिरिक्स (Bhola Khushi Me Kamal Kar Baithe Lyrics in Hindi) - Shivratri Bhajan Meenakshi Mukesh

पढ़ें भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे वो तो गौरा से प्यार कर बैठे लिरिक्स (Bhola Khushi Me Kamal Kar Baithe Lyrics in Hindi) - Shivratri Bhajan Meenakshi Mukesh -

भगवान शिव और माता पार्वती के अलौकिक प्रेम को समर्पित 'भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे' भजन भक्ति रस का एक अद्भुत संगम है। यह भजन न केवल शिव की सरलता और उनके 'भोलेपन' को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि किस प्रकार महादेव अपनी गौरा (माता पार्वती) के प्रति समर्पित होकर सृष्टि के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। शिवरात्रि और सावन के पावन अवसरों पर गाए जाने वाले इस भजन में प्रेम, समर्पण और आनंद का भाव निहित है। मीनाक्षी मुकेश द्वारा स्वरबद्ध यह रचना भक्तों के हृदय में शिव-शक्ति के प्रति अटूट आस्था जगाती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे,
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे।
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे,
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे॥

कैलाश पर्वत पे डेरा जमाया,
गौरा को अपना जीवन बनाया।
खुशियों के रंग में वो ढल गए,
गौरा के नैनों में वो पल गए।
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे,
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे॥

ना कोई चिंता ना कोई बंधन,
गौरा के चरणों में अर्पण है मन।
शिव की जटाओं से गंगा बहे,
गौरा के संग वो तो मस्ती में रहे।
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे,
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे॥

भक्तों के दुख को वो हर लेते हैं,
गौरा के संग वो तो वर देते हैं।
प्रेम की महिमा निराली है देखो,
शिव और शक्ति की थाली है देखो।
भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे,
वो तो गौरा से प्यार कर बैठे॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव 'शिव-शक्ति' के मिलन और उनके निश्छल प्रेम का उत्सव मनाना है। 'भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे' का अर्थ है कि भगवान शिव, जो स्वयं वैरागी और योगी हैं, वे भी माता गौरा के प्रेम में इतने मग्न हो गए कि उन्होंने अपनी योग-निद्रा और वैराग्य को छोड़कर गृहस्थ जीवन के आनंद को स्वीकार किया। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर का प्रेम किसी बंधन में नहीं, बल्कि मुक्ति और आनंद में निहित है। गौरा के प्रति उनका प्रेम संसार के लिए एक आदर्श है, जो यह संदेश देता है कि शिव और शक्ति अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के दो रूप हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिवरात्रि, सावन सोमवार और विवाह उत्सवों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इसमें शिव के 'भोले' स्वरूप का वर्णन है, जो भक्तों की छोटी-सी भक्ति से भी प्रसन्न हो जाते हैं। यह भजन शिव-पार्वती के दांपत्य जीवन की मधुरता को दर्शाता है, जिससे भक्तों को पारिवारिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को शिवरात्रि की रात्रि जागरण, सावन के सोमवार, या किसी भी शिव मंदिर में पूजा के दौरान गाया जा सकता है। इसे गाते समय मन में शिव-पार्वती के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि संभव हो, तो इसे ढोलक और मंजीरे के साथ गाने से भक्ति का वातावरण और अधिक प्रगाढ़ हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • समर्पण: जिस प्रकार शिव ने गौरा को अपना सर्वस्व माना, उसी प्रकार भक्त को ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पित होना चाहिए।
  • सरलता: शिव का 'भोला' होना यह दर्शाता है कि ईश्वर को पाने के लिए जटिल कर्मकांडों की नहीं, बल्कि सरल हृदय की आवश्यकता है।
  • शिव-शक्ति का मिलन: यह भजन हमें याद दिलाता है कि पुरुष (शिव) और प्रकृति (शक्ति) के मिलन से ही सृष्टि का संचालन होता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
भोला सरल स्वभाव वाले भगवान शिव के लिए प्रयुक्त
गौरा माता पार्वती शक्ति का स्वरूप
अर्पण समर्पित करना भक्ति का भाव
जटा शिव के बाल जहाँ से गंगा का उद्गम होता है

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम भोला ख़ुशी में कमाल कर बैठे
आराध्य देव भगवान शिव एवं माता पार्वती
भाषा हिंदी
भाव भक्ति, प्रेम, आनंद
उपयुक्त अवसर शिवरात्रि, सावन, विवाह उत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. यह भजन किस अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन मुख्य रूप से शिवरात्रि और सावन के सोमवार को शिव-पार्वती की पूजा के समय गाया जाता है।

2. 'भोला' शब्द का अर्थ क्या है?
भोला का अर्थ है सरल और निष्कपट। भगवान शिव अपने भक्तों के प्रति अत्यंत सरल हैं, इसलिए उन्हें 'भोलेनाथ' कहा जाता है।

3. क्या यह भजन पारिवारिक पूजा में गाया जा सकता है?
जी हाँ, यह भजन अत्यंत मधुर है और इसे घर पर होने वाले किसी भी धार्मिक आयोजन या सत्संग में गाया जा सकता है।

4. शिव और गौरा के प्रेम का क्या संदेश है?
यह प्रेम पुरुष और प्रकृति के संतुलन और दांपत्य जीवन में आपसी विश्वास का प्रतीक है।

5. मीनाक्षी मुकेश का यह भजन कहाँ सुना जा सकता है?
यह भजन विभिन्न भक्ति संगीत प्लेटफॉर्म्स और यूट्यूब चैनलों पर उपलब्ध है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री पौराणिक ग्रंथों, शिव पुराण और पारंपरिक भक्ति साहित्य के संदर्भों पर आधारित है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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