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आज बालाजी का किर्तन हमारे अंगना भजन लिरिक्स (Aaj Balaji Ka Kirtan Hamare Angna Bhajan Lyrics in Hindi) - Rekha Garg

रेखा गर्ग द्वारा गाया गया भजन 'आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। हनुमान जी के इस मधुर कीर्तन से घर में सुख-समृद्धि लाएं।

"आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना" एक अत्यंत लोकप्रिय, मधुर और भक्ति रस से परिपूर्ण संकीर्तन भजन है, जो भगवान श्री हनुमान जी (बालाजी) के प्रति भक्तों के अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण को अभिव्यक्त करता है। इस भजन में एक ऐसे अलौकिक और दिव्य वातावरण की सुंदर परिकल्पना की गई है, जहाँ भक्त के घर या आँगन में आयोजित संकीर्तन में स्वयं पवनपुत्र हनुमान जी पधारते हैं। केवल हनुमान जी ही नहीं, बल्कि उनके इस पावन कीर्तन का श्रवण करने और भक्त के भाव को स्वीकार करने के लिए समस्त देवलोक से देवी-देवता भी अपने-अपने दिव्य स्वरूपों में उपस्थित होते हैं। रेखा गर्ग जी के अत्यंत सुरीले और भावपूर्ण स्वर में गाया गया यह भजन सत्संगों, पारिवारिक कीर्तनों, मंगलवार और शनिवार की विशेष पूजा-अर्चना तथा हनुमान जन्मोत्सव जैसे मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला एक प्रमुख भक्ति गीत बन चुका है। यह भजन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि जहाँ भी सच्चे हृदय और पवित्र भाव से संकीर्तन होता है, वहाँ साक्षात ईश्वर और उनके समस्त दिव्य स्वरूपों का वास हो जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना

आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना,
हमारे अंगना, हमारे अंगना।
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को गणपति आये,
गणपति आये संग रिद्धि-सिद्धि लाये,
आज लंगर बटेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को ब्रह्माजी आये,
ब्रह्माजी आये संग में सरस्वती को लाये,
आज वेद पढ़ेंगे हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को विष्णुजी आये,
विष्णुजी आये संग लक्ष्मीजी को लाये,
आज शंख बजेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को शिवजी आये,
शिवजी आये संग गौराजी को लाये,
आज डमरू बजेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को रामजी आये,
रामजी आये संग सीताजी को लाये,
आज अमृत बरसेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

सुन कीर्तन को हनुमत आये,
हनुमत आये संग वानर सेना लाये,
आज जयकारा गूंजेगा हमारे अंगना,
आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का मुख्य भाव "भक्त और भगवान" के बीच का वह आत्मीय संबंध है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के स्वागत के लिए अपने हृदय रूपी आँगन को सजाता है। जब भक्त सच्चे मन से भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी (बालाजी) का कीर्तन आयोजित करता है, तो वह केवल एक भौतिक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि वह एक दिव्य उत्सव बन जाता है।

भजन में बताया गया है कि जैसे ही भक्त के आँगन में बालाजी का कीर्तन प्रारंभ होता है, उसकी गूंज पूरे ब्रह्मांड में फैल जाती है। इस पावन ध्वनि को सुनकर सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश अपनी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के साथ पधारते हैं। उनके आगमन से कीर्तन में विघ्न-बाधाओं का नाश होता है और चारों ओर शुभता का संचार होता है। इसके बाद सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी देवी सरस्वती के साथ आते हैं, जिससे वातावरण में वेदों की ऋचाओं का दिव्य नाद गूंजने लगता है।

इसी क्रम में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आगमन होता है, जो अपने साथ समृद्धि और शंख की मांगलिक ध्वनि लेकर आते हैं। देवों के देव महादेव और माता पार्वती के आने से डमरू की थाप पर पूरा आँगन शिवमय हो जाता है। अंत में, जिनके नाम के बिना हनुमान जी का कोई भी कीर्तन अधूरा है, वे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम माता सीता के साथ पधारते हैं। राम जी के आने से पूरे आँगन में भक्ति और कृपा का अमृत बरसने लगता है। यह भजन दर्शाता है कि हनुमान जी की भक्ति में इतनी शक्ति है कि उनके कीर्तन मात्र से समस्त देवलोक भक्त के घर खिंचा चला आता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन सनातन धर्म की सामूहिक संकीर्तन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • सामूहिक देव-आवाहन: इस भजन के माध्यम से भक्त एक ही स्थान पर हिंदू धर्म के प्रमुख त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और उनकी शक्तियों (सरस्वती, लक्ष्मी, गौरी) का आवाहन करता है।
  • भक्ति की पराकाष्ठा: यह भजन सिद्ध करता है कि हनुमान जी की आराधना से भगवान श्री राम और अन्य सभी देवी-देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • सकारात्मक ऊर्जा का संचार: भजन की लय और ताल इतनी ऊर्जावान है कि इसे गाते या सुनते समय भक्त स्वतः ही नृत्य करने पर विवश हो जाता है, जिससे मानसिक तनाव दूर होता है।
  • सरलता और सुबोधता: इसकी भाषा इतनी सरल है कि बच्चे से लेकर वृद्ध तक सभी इसे आसानी से गा सकते हैं और इसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझ सकते हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवान का नाम किसी भी समय लिया जा सकता है, परंतु इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर और विधियां अत्यधिक फलदायी मानी गई हैं:

शुभ समय: यह भजन मुख्य रूप से मंगलवार और शनिवार के दिन गाया जाता है, क्योंकि ये दोनों दिन भगवान हनुमान जी को समर्पित हैं। इसके अतिरिक्त, हनुमान जन्मोत्सव, सुंदरकांड पाठ के समापन पर, गृह प्रवेश, नवरात्रि और किसी भी पारिवारिक सत्संग या कीर्तन के अवसर पर इसका गायन अत्यंत शुभ माना जाता है।

गायन की विधि:

  • सर्वप्रथम घर के मंदिर या कीर्तन स्थल को साफ-सुथरा करें और गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  • एक चौकी पर भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी (बालाजी) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • धूप, दीप और अगरबत्ती जलाकर पूजा का प्रारंभ करें।
  • भजन गाते समय ढोलक, मंजीरा और चिमटे का प्रयोग करें। सामूहिक रूप से ताली बजाते हुए इस भजन को गाने से वातावरण में अद्भुत स्पंदन पैदा होता है।
  • भजन के अंत में हनुमान जी की आरती करें और सभी उपस्थित भक्तों में प्रसाद वितरित करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री हनुमान जी (बालाजी) को समर्पित है। हनुमान जी को कलयुग का जाग्रत देव माना जाता है, जो अपने भक्तों की पुकार बहुत शीघ्र सुनते हैं। भजन में उनके साथ-साथ निम्नलिखित दिव्य शक्तियों का भी वर्णन है:

  • भगवान गणेश और रिद्धि-सिद्धि: विघ्नहर्ता और बुद्धि के दाता।
  • ब्रह्मा जी और माता सरस्वती: ज्ञान, कला और सृष्टि के सृजक।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी: जगत के पालनहार और ऐश्वर्य की देवी।
  • भगवान शिव और माता पार्वती: कल्याणकारी महादेव और शक्ति स्वरूपा गौरी।
  • भगवान श्री राम और माता सीता: मर्यादा पुरुषोत्तम और जगत जननी, जो हनुमान जी के प्राण आराध्य हैं।

इस भजन को अपनी मधुर आवाज से जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय सुप्रसिद्ध भजन गायिका रेखा गर्ग जी को जाता है। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस पारंपरिक कीर्तन को एक नया आयाम दिया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक-धुनों और कीर्तन शैलियों पर आधारित है। भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सदियों से चली आ रही महिला संगीत और सत्संग मंडलियों में इस प्रकार के भजनों का निर्माण स्वतःस्फूर्त रूप से भक्तों के हृदय से होता रहा है। इस भजन की पृष्ठभूमि "अतिथि देवो भव" और "भक्त के वश में हैं भगवान" के सनातन सिद्धांतों पर आधारित है। जब कोई भक्त अपने घर में कीर्तन रखता है, तो वह अपने घर को मंदिर मान लेता है और सभी देवताओं को अतिथि के रूप में आमंत्रित करता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और लोक-भाषा (खड़ी बोली और हिंदी का मिश्रण) है। इसमें किसी क्लिष्ट संस्कृत या कठिन शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है, जिससे यह जनमानस के हृदय के अत्यंत निकट है।

इसकी काव्य शैली "पुनरावृत्ति और संकीर्तन" शैली है, जहाँ मुख्य पंक्ति (मुखड़ा) "आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना" को बार-बार दोहराया जाता है। यह शैली ध्यान को केंद्रित करने और मन को एकाग्र करने में सहायक होती है। प्रत्येक अंतरे में एक नए देवता के आगमन और उनके द्वारा की जाने वाली दिव्य लीला (जैसे वेद पढ़ना, शंख बजाना, डमरू बजाना) का सुंदर चित्रण किया गया है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:

  1. सामूहिकता और एकता: कीर्तन हमेशा सामूहिक रूप से किया जाता है। यह हमें समाज में मिलजुल कर रहने और खुशियां बांटने का संदेश देता है।
  2. हृदय की पवित्रता: भगवान केवल सोने-चांदी के महलों में नहीं, बल्कि भक्त के प्रेमपूर्ण "अंगना" (हृदय) में आते हैं। यदि हमारा मन पवित्र है, तो ईश्वर हमारे भीतर ही प्रकट हो जाते हैं।
  3. समर्पण का भाव: जब हम अपने अहंकार को छोड़कर भगवान के चरणों में समर्पित हो जाते हैं, तो समस्त ब्रह्मांडीय शक्तियां हमारी सहायता और कल्याण के लिए तत्पर हो जाती हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
अंगना घर का आँगन / हृदय रूपी आँगन वह पवित्र स्थान जहाँ भक्त ईश्वर का स्वागत करता है।
कीर्तन ईश्वर के नामों और महिमा का सामूहिक गान कलयुग में मोक्ष और शांति प्राप्ति का सबसे सरल साधन।
रिद्धि-सिद्धि समृद्धि और अलौकिक शक्तियां भगवान गणेश के साथ आने वाली शुभता और सफलता।
लंगर सामूहिक भोज / भंडारा बिना किसी भेदभाव के सभी को प्रसाद वितरण करना।
अमृत बरसेगा कृपा और भक्ति रस की वर्षा भगवान राम के आगमन से मिलने वाला परम आनंद।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना..."
भक्त अत्यंत हर्ष और उल्लास के साथ घोषणा करता है कि आज मेरे घर के आँगन में संकटमोचन बालाजी का कीर्तन हो रहा है। यह मेरे लिए परम सौभाग्य का दिन है।

"सुन कीर्तन को गणपति आये, संग रिद्धि-सिद्धि लाये..."
जैसे ही कीर्तन की मंगल ध्वनि गूंजती है, विघ्नहर्ता श्री गणेश अपनी शक्तियों रिद्धि-सिद्धि के साथ आते हैं। उनके आने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है और आज इस पावन अवसर पर महाप्रसाद (लंगर) का वितरण होगा।

"सुन कीर्तन को ब्रह्माजी आये, संग में सरस्वती को लाये..."
ज्ञान के सागर ब्रह्मा जी ज्ञान की देवी सरस्वती के साथ पधारते हैं। उनके आने से पूरा वातावरण वेदों के पवित्र मंत्रों और ज्ञान के प्रकाश से आलोकित हो उठता है।

"सुन कीर्तन को विष्णुजी आये, संग लक्ष्मीजी को लाये..."
जगत के स्वामी भगवान नारायण माता लक्ष्मी के साथ आते हैं। उनके आगमन पर शंखों की मांगलिक ध्वनि गूंजती है, जो सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश करती है।

"सुन कीर्तन को शिवजी आये, संग गौराजी को लाये..."
कैलाशपति भगवान शिव माता पार्वती के साथ आते हैं। वे कीर्तन के आनंद में मग्न होकर अपना डमरू बजाते हैं, जिससे पूरा ब्रह्मांड शिवमय हो जाता है।

"सुन कीर्तन को रामजी आये, संग सीताजी को लाये..."
अंततः, हनुमान जी के परम आराध्य प्रभु श्री राम माता जानकी के साथ आते हैं। राम जी के आने से पूरे कीर्तन स्थल पर ईश्वरीय कृपा और भक्ति का अमृत बरसने लगता है, जिससे सभी भक्त निहाल हो जाते हैं।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

हनुमान जी के कीर्तन के समय और इस भजन के गायन से पूर्व निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है:

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

इसके अतिरिक्त, कीर्तन के दौरान श्री हनुमान चालीसा का पाठ और भगवान राम के नाम का संकीर्तन "राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे" का जाप करने से कीर्तन की महिमा अनंत गुना बढ़ जाती है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम आज बालाजी का कीर्तन हमारे अंगना (Aaj Balaji Ka Kirtan Hamare Angna)
मुख्य आराध्य देव भगवान श्री हनुमान (बालाजी)
प्रसिद्ध गायिका रेखा गर्ग (Rekha Garg)
भाषा हिंदी (लोक-भाषा)
भजन का भाव भक्ति, समर्पण, उत्सव और आनंद (सख्य एवं दास्य भाव)
उपयुक्त अवसर मंगलवार/शनिवार पूजा, हनुमान जन्मोत्सव, सुंदरकांड पाठ, पारिवारिक सत्संग
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, चिमटा, हारमोनियम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन को अपनी अत्यंत सुरीली और भावपूर्ण आवाज में प्रसिद्ध भजन गायिका रेखा गर्ग जी ने गाया है। उनके द्वारा गाए गए इस भजन को यूट्यूब और अन्य संगीत मंचों पर लाखों श्रोताओं द्वारा पसंद किया गया है।

यह भजन भगवान हनुमान जी (बालाजी) को समर्पित है, इसलिए इसे मंगलवार और शनिवार के दिन गाना या सुनना सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा इसे किसी भी धार्मिक उत्सव या गृह प्रवेश के समय गाया जा सकता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि जहाँ भी सच्चे मन और पवित्र भाव से भगवान का कीर्तन होता है, वहाँ न केवल आराध्य देव बल्कि समस्त देवी-देवता अपनी कृपा बरसाने के लिए उपस्थित होते हैं। यह ईश्वर की सर्वव्यापकता और भक्त के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है।

हाँ, सुंदरकांड पाठ के समापन के बाद आरती से पहले इस भजन का गायन अत्यंत लोकप्रिय है। यह कीर्तन के वातावरण को और अधिक भक्तिमय और आनंदमय बना देता है।

भौतिक रूप से "अंगना" का अर्थ घर का आँगन है, जहाँ कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ भक्त का "हृदय रूपी आँगन" है, जिसे वह अपने आराध्य के स्वागत के लिए विकारों से मुक्त और पवित्र बनाता है।

इस भजन में भगवान गणेश, माता रिद्धि-सिद्धि, ब्रह्मा जी, माता सरस्वती, भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव, माता पार्वती (गौरा जी), भगवान श्री राम, माता सीता और अंत में हनुमान जी (बालाजी) का उल्लेख है।

हाँ, इसकी सरल भाषा और लयबद्धता के कारण बच्चे इसे बहुत जल्दी सीख जाते हैं। इसके माध्यम से बच्चों को हिंदू धर्म के प्रमुख देवी-देवताओं और उनके स्वरूपों के बारे में खेल-खेल में जानकारी मिल जाती है।

इस भजन के पारंपरिक कीर्तन स्वरूप को बनाए रखने के लिए ढोलक, मंजीरा, चिमटा और हारमोनियम का प्रयोग सबसे अच्छा माना जाता है। यदि ये उपलब्ध न हों, तो केवल ताली बजाकर भी इसे गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और इसकी व्याख्या को विभिन्न प्रामाणिक सत्संग संकलनों, पारंपरिक कीर्तन मंडलियों के अनुभवों और शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को न केवल भजन के सही बोल प्रदान करना है, बल्कि उन्हें इसके पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक संदेश से भी अवगत कराना है। यह सामग्री पूरी तरह से त्रुटिहीन, शुद्ध और सनातन धर्म की गरिमा के अनुकूल है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण एवं श्री रामचरितमानस (हनुमान चरित्र प्रसंग)
  • पारंपरिक संकीर्तन एवं सत्संग संग्रह
  • रेखा गर्ग जी द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक ऑडियो/वीडियो संस्करण
  • सनातन धर्म की लोक-भजन परंपरा और मौखिक इतिहास

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 18 Oct 2026

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