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उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया शिव भजन (Ujjain ke raja kabhi kirpa najariya Lyrics in Hindi) - Kishan Bhagat Shiv Bhajan

किशन भगत द्वारा गाए भजन 'उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया' के लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। महाकाल बाबा की कृपा पाने के लिए इस शिव भजन को अवश्य गाएं।

उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया शिव भजन का परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

भक्ति और समर्पण की अनूठी गाथाओं में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन का विशेष स्थान है। 'उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया' (Ujjain ke raja kabhi kirpa najariya Lyrics in Hindi) किशन भगत द्वारा गाया गया एक अत्यंत लोकप्रिय एवं भावपूर्ण शिव भजन है। इस भजन में भगवान शिव के महाकाल स्वरूप, उनकी असीम करुणा, तांडव स्वरूप और भक्तों के प्रति उनके वात्सल्य भाव का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है। शिव भक्त जब इस भजन का गान करते हैं, तो वे भौतिक संसार के सभी भयों से मुक्त होकर भगवान शिव के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाते हैं। सनातन धर्म में उज्जैन को भगवान महाकालेश्वर की पावन नगरी माना जाता है, जहाँ काल स्वयं महाकाल के आधीन रहता है। यह भजन साधक के मन में अगाध श्रद्धा और विश्वास जगाता है, जिससे जीवन के हर संकट का सामना करने की अद्भुत शक्ति प्राप्त होती है। इस लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, सरल हिंदी अर्थ, गायन विधि और इसके आध्यात्मिक रहस्यों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,

और काल उसका क्या बिगड़े जो भगत हो महाकाल का...॥


उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...

उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...

राजा महाराजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...॥

पार्वती पति शिवजी है प्यारे,

कैलाश पर मेरे भोले विराजे,

मेरे भोले विराजे मनकामेश्वर बाबा,

मन की मुरादे...

महाकालेश्वर बाबा मन की मुरादे,

झोली मे डालना रे...

उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...॥

नैनो मे ज्वाला आँखो मे ज्वाला,

जटा मे गंगा पहने मृगछाला,

भोले पहने मृगछाला,

खुलती है जब उनकी तीसरी वो अँखियाँ...

खुलती है जब उनकी तीसरी वो अँखियाँ,

तांडव कर डालना रे...

उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...॥

पीते है प्याले भर भर के भंगिया,

लगाए दम भोले दिन और रतियाँ,

भोले दिन और रतियाँ बाबा तेरा भगत हूँ...

मैं बहुत दीवाना किशन भगत है,

बाबा तेरा दीवाना...

उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया,

दुखिया पे डालना रे...॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक भक्त की अपने आराध्य महाकाल के प्रति अनन्य पुकार है। भजन की शुरुआत में ही महाकाल के भक्तों की अजेयता का उद्घोष किया गया है कि जो व्यक्ति महाकाल का सच्चा भक्त है, उसका काल भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उज्जैन के राजा महाकालेश्वर को सम्पूर्ण ब्रह्मांड का राजा माना जाता है। भक्त अपने आराध्य से प्रार्थना करता है कि हे उज्जैन के राजा, कभी अपनी कृपा भरी नजर हम दुखियों पर भी डालिए।

भजन के अगले चरण में भगवान शिव के स्वरूप का वर्णन करते हुए उन्हें माता पार्वती का प्रिय, कैलाश पर विराजमान तथा उज्जैन में महाकालेश्वर और मनकामेश्वर के रूप में विराजने वाला बताया गया है। भक्त कामना करता है कि बाबा भक्तों के मन की मुरादें और झोलियाँ अपनी कृपा से भर दें। शिव का रूप जितना शांत और करुणावान है, उतना ही वह प्रलयंकारी भी है। उनकी जटाओं में गंगा विराजती है, शरीर पर मृगछाला है और नेत्रों में प्रलय की ज्वाला है। जब उनकी तीसरी आँख खुलती है, तो संपूर्ण ब्रह्मांड में तांडव का आरंभ हो जाता है। इसके साथ ही, भोलेनाथ की सरल और अलौकिकचर्या का वर्णन है कि वे भांग का सेवन करते हैं और अपनी मस्ती में लीन रहते हैं। गायक किशन भगत स्वयं को महाकाल का दीवाना बताते हुए उनकी शरण में पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन शिव भक्तों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है क्योंकि इसमें भगवान शिव के राजा स्वरूप (महाकाल) का स्मरण किया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • महाकाल की महिमा: भजन में उज्जैन के राजा महाकालेश्वर के आधिपत्य और उनकी शरण में जाने वाले भक्त की निर्भयता का सुंदर वर्णन है।
  • भक्ति और समर्पण: किशन भगत द्वारा रचित व प्रस्तुत यह भजन साधक के मन में अगाध भक्ति और अहंकार शून्यता का भाव पैदा करता है।
  • भावपूर्ण अभिव्यक्ति: इसमें शिव के शांत रूप (कैलाशपति, मनकामेश्वर) और उग्र रूप (तांडव, तीसरी आँख) दोनों का संतुलन दिखाया गया है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण और गायन से मानसिक तनाव दूर होता है और आंतरिक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष अवसरों पर इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है:

  • प्रदोष काल एवं सोमवार: भगवान शिव को समर्पित सोमवार के दिन और प्रदोष काल में इस भजन का पाठ विशेष फलदायी होता है।
  • महाशिवरात्रि पर्व: महाशिवरात्रि और सावन मास के पावन दिनों में शिवालयों में यह भजन भक्तों को झूमने पर विवश कर देता है।
  • शिव जागरण और सत्संग: रात्रि जागरण, भंडारे या महाकाल के सत्संग के दौरान इस भजन को सामूहिक रूप से गाने का अलग ही आनंद है।
  • गायकी की विधि: इसे ढोलक, मंजीरे और हारमोनियम के साथ तालबद्ध तरीके से ऊंचे और भावपूर्ण स्वरों में गाया जाना चाहिए।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में भगवान शिव (महाकाल, मनकामेश्वर, भोलेनाथ) और माता पार्वती हैं। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहाँ राजा महाकाल की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है। इस भजन के रचयिता एवं गायक किशन भगत हैं, जिन्होंने अपनी मधुर वाणी और अनन्य शिव भक्ति के माध्यम से इस रचना को अमर बना दिया है। ऐसे भजन संतों और भक्तों की आत्मानुभूति से उत्पन्न होते हैं जो सीधे शिव के चरणों में अर्पण होते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संगीत और पारंपरिक भक्ति धाराओं के प्रभाव से रचे गए इस भजन की पृष्ठभूमि उज्जैन की आध्यात्मिक संस्कृति से जुड़ी हुई है। उज्जैन को भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक राजधानी माना जाता है जहाँ राजा विक्रमादित्य के समय से ही महाकाल की पूजा होती आ रही है। किशन भगत ने इस लोक शैली को आधुनिक भक्ति संगीत के साथ जोड़कर एक ऐसा काव्यात्मक रूप दिया, जो आम जनमानस की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है। इसमें ग्रामीण अंचल की सरलता और शास्त्रीय शिव महिमा का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी, ब्रज और अवधी मिश्रित लोक भाषा है, जिसे भारत का आम नागरिक आसानी से समझ सकता है और गा सकता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का' जैसी पंक्तियाँ लोक-काव्य की उस शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं जो सीधे हृदय को स्पर्श करती हैं। लयबद्धता और तुकबंदी इस भजन की मुख्य विशेषता है जो श्रोता को बांधे रखती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन जीने के कई गहरे दार्शनिक पाठ सिखाता है:

  • निडरता: जो व्यक्ति सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए महाकाल का स्मरण करता है, उसके मन से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
  • शरणागति: जीवन के दुखों से मुक्ति पाने के लिए अहंकार त्याग कर भगवान के चरणों में कृपा की भीख मांगनी पड़ती है।
  • संतोष और सरलता: भोलेनाथ की तरह जीवन में सरलता और संतोष अपनाना चाहिए।
  • कर्म और फल: मनुष्य को अपने कर्म अच्छे रखने चाहिए क्योंकि महाकाल की दृष्टि न्यायकारी है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ
महाकाल समय के भी स्वामी, भगवान शिव उज्जैन के मुख्य देवता
किरपा नजरिया कृपा भरी दृष्टि भक्त की भगवान से प्रार्थना
मृगछाला मृग (हिरण) का चर्म शिव का वस्त्र
तांडव प्रलय या ब्रह्मांडीय नृत्य शिव का रौद्र रूप
मनकामेश्वर मन की कामना पूर्ण करने वाले शिव का एक पावन नाम

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का, और काल उसका क्या बिगड़े जो भगत हो महाकाल का..."
इस पंक्ति का अर्थ है कि साधारण या अकाल मृत्यु उसी की होती है जो बुरे कर्म करता है। परंतु जो निरंतर महाकाल का स्मरण करता है, उसका काल (यमराज) भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

"उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया, दुखिया पे डालना रे..."
भक्त पुकारता है कि हे उज्जैन के अधिपति राजा महाकाल! हम दुखी संसारियों पर भी अपनी दया दृष्टि डालिए और हमारे कष्टों का निवारण कीजिए।

"खुलती है जब उनकी तीसरी वो अँखियाँ, तांडव कर डालना रे..."
जब भगवान शिव के ललाट पर स्थित तीसरी आँख खुलती है, तो सृष्टि में अधर्म का नाश करने के लिए प्रलयकारी तांडव होता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

महाकाल की आराधना से जुड़े प्रमुख श्लोक का स्मरण करना इस भजन के प्रभाव को और बढ़ा देता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

यह महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का सबसे शक्तिशाली और प्राण रक्षक मंत्र है, जिसका जाप महाकाल के भक्तों द्वारा निरंतर किया जाता है। इसके साथ ही शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी साधकों के लिए अत्यधिक ऊर्जावान माना जाता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम उज्जैन के राजा कभी कृपा नजरिया (Ujjain ke raja kabhi kirpa najariya)
आराध्य देव भगवान शिव (महाकाल / मनकामेश्वर)
गायक / कलाकार किशन भगत (Kishan Bhagat)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव समर्पण, विनय, करुणा और अगाध विश्वास
नगरी उज्जैन, मध्य प्रदेश
उपयुक्त अवसर सोमवार पूजा, शिवरात्रि, सत्संग, जागरण

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय शिव भजन के गायक किशन भगत (Kishan Bhagat) हैं, जिन्होंने अपनी भावपूर्ण आवाज में इसे प्रस्तुत किया है।

उज्जैन में भगवान श्री महाकालेश्वर को ही वहाँ का राजा माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उज्जैन में कोई दूसरा राजा सिंहासन पर नहीं बैठ सकता, केवल महाकाल ही वहाँ के राजा हैं।

इस भजन को प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा के समय, सोमवार के दिन, सावन मास में या शिव रात्रि के जागरण के दौरान सुनना अत्यधिक फलदायी होता है।

इस पंक्ति का अर्थ है कि जो लोग बुरे कर्म करते हैं, उन्हें अकाल मृत्यु और कष्टों का सामना करना पड़ता है। परंतु जो सच्चे मन से महाकाल के भक्त होते हैं, उनकी रक्षा स्वयं काल के स्वामी महाकाल करते हैं।

उज्जैन भारत की सात पवित्र मोक्षदायिनी नगरियों में से एक है। यहाँ भगवान शिव का प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थित है, जो दक्षिणमुखी होने के कारण tantric और आध्यात्मिक साधनाओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

हाँ, यह भजन बहुत ही सरल और लयबद्ध है, इसलिए इसे घर की पूजा, रुद्राभिषेक अनुष्ठान या किसी भी शिव सत्संग में आसानी से गाया जा सकता है।

भगवान शिव को सोमवार का दिन अत्यंत प्रिय है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और शिवालयों में जाकर जल व बेलपत्र अर्पित करते हैं।

महाकाल के भक्तों को यह सीख मिलती है कि जीवन में किसी भी प्रकार के संकट या मृत्यु के भय से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि परमेश्वर महाकाल हर परिस्थिति में अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तों की धार्मिक भावनाओं, पारंपरिक लोक संगीत की परंपरा और शास्त्रीय शिव महिमा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत भजन के बोल और अर्थ प्रामाणिक स्रोतों एवं लोक संस्कृति के आधार पर संकलित किए गए हैं। यह सामग्री पाठकों को आध्यात्मिक संतुष्टि और सटीक जानकारी प्रदान करने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शिव पुराण - कोट रुद्र संहिता एवं महाकाल महात्म्य
  • पारंपरिक भारतीय लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
  • उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर के ऐतिहासिक एवं धार्मिक संदर्भ
  • भक्त किशन भगत की लोक संगीत प्रस्तुतियां

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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