प्रस्तावना एवं परिचय
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
दिन होवे रात होवे
तेरा जिकर करा मैं
तेरे होंदेया वे मेरे साईया
कानू फ़िक्र करा मैं
बिन मंगिया तू दित्ता
सानू हद तो वी ज्यादा
प्यारा वचना दा साईया
तू निभाया हर वादा
तेरी रजा विच राजी
हर वेले हुन्न रहना
सुख होवे दुःख होवे
मुहो कुज नहिओ कहना
सुख विच शुक्राना
दुःख विच फर्यादा
हर हाल विच दाता
बस तेरिया ही यादां
ऐना दिता ए तू दाता
किवे जिक्र करा मैं
हर दम हर वेले साईया
तेरा शुक्र करा मं
किन्ना लफजां च गवा
महिमा मैं तेरियां दाता
हर हाल विच निभाया
तुसा साढे नाल दाता
बांह फड़ के दाता
चंगे पासे तू ला
असी आधे ते अधूरे
तुसा पुराण ते पूरा
गल्ल साहिल दी तुसा
इक वार वी न टाली
ताहिओ हर कोई होया
साईया तेरे दर दा सवाली
पुनीत तेरा बछड़ा
किवे शुक्र करा मैं
जिस हाल च रखे
साईया तेरा शुक्र करा मैं
तेरा शुक्र करा वे
साईया मैं तेरा शुक्र करां
तुसां लगिया तोड़
निभाईआं मैं तेरा शुक्र करा
दरबार बुलाया शुक्र करां
चरना विच लाया शुक्र करां
दोषा नू भुलाया शुक्र करां
आके अपनाया शुक्र करां
अहंकार मिटाया शुक्र करां
धीरज उपजाया शुक्र करां
दे के न जताया शुक्र करां
सानु पार लगाया
तेरा शुक्र करा वे
साईया मैं तेरा शुक्र करां...
दिन रात बथेरा शुक्र करां
पल पल मैं तेरा शुक्र करां
जब होवे हनेरा शुक्र करां
जब होवे सवेरा शुक्र करां
सुख दुःख सब तेरा शुक्र करां
कुछ वी नहीं मेरा शुक्र करां
कण कण विच तेरा शुक्र करां
दिसदा ए बसेरा
तेरा शुक्र करा वे
साईया मैं तेरा शुक्र करा...
केन्दे ने सवाली शुक्र करां
रुतबा तेरा आली शुक्र करां
दुनिया दा वाली शुक्र करां
तेरी शान निराली शुक्र करां
मोड़ी न खाली शुक्र करां
करदा लज पाली शुक्र करां
वनडे खुशाली शुक्र करां
डुबदी तू संभाली
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
दुखिया दा सहारा शुक्र करां
सुखियानु भी प्यारा शुक्र करां
जब जब दिलहारा शुक्र करां
तैनू ही पुकारा शुक्र करां
संसार ये सारा शुक्र करां
दिल जान वे हारा शुक्र करां
शिरडी दा नज़ारा शुक्र करां
स्वर्ग तो भी प्यारा
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
सांगता दे कारज आप कराया (2)
हर कम करावन आया राम
सांगता दे कारज आप कराया (2)
सतगुरु सुखदायी शुक्र करां
किती सुनवाई शुक्र करां
तुसा देर न लायी शुक्र करां
हर पीड़ मुकाई शुक्र करां
किस्मत चमकाई शुक्र करां
औकाद बनायीं शुक्र करां
इज़्ज़त भी कमाई शुक्र करां
चोली विच्च पायी
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
हर आस अधूरी शुक्र करां
किती ए तू पूरी शुक्र करां
श्रद्धा ते सबुरी शुक्र करां
देना ऐ जरूरी शुक्र करां
रखदा न दुरी शुक्र करां
कटदा मजबूरी शुक्र करां
हर वक़्त हज़ूरी शुक्र करां
किती मंज़ूरी
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
मांगिए सो पाया शुक्र करां
लारा नहीं लाया शुक्र करां
बदीयां को बचाया शुक्र करां
नेकी वल लाया शुक्र करां
सम्मान बढ़ाया शुक्र करां
रज रज के रजाया शुक्र करां
समजा ना पराया शुक्र करां
हर वचन निभाया
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
चंगेयां नू मिलाया शुक्र करां
मेहनत दा खवाया शुक्र करां
विश्वास जगाया शुक्र करां
धन धन तेरी माया शुक्र करां
हर कम बनायाशुक्र करां
झुकना भी सिखाया शुक्र करां
अश्का दा सहारा शुक्र करां
नी मैं फल पाया
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...
सतगुरु प्यारा मेरे नाल है -2
तेरा शुक्र करा मेरे साईया -2
हर रसना ते साई साई
हर दिल विच वी साई साई
हर सुख विच वी साई साई
हर दुःख विच वी साई साई
चारे पासे साई साई
हुन्दे चर्चे साई साई
कण कण विच वी साई साई
तन मन विच वी साई साई
मिलके बोलो साई साई
अमृत घोलो साई साई
सचदी सूरत साई साई
रबदी मूरत साई साई
चिंता कजिए साई साई
हर दम जपिये साई साई
परदे कजदा साई साई
दुखड़े हरदा साई साई
बांह फड़ लैंदा साई साई
अंग संग रेह्न्दा साई साई
अनमोल रतन साई साई
सजना दा सजन साई साई
हर दम रक्षक साई साई
करुणादायक साई साई
जग तो न्यारा साई साई
रब तो प्यारा साई साई
खुशिया दा स्वर साई साई
हर स्वर अंदर साई साई
भक्ति देंदा साई साई
शक्ति देंदा साई साई
मस्ती देंदा साई साई
मुक्ति देंदा साई साई
झुकियाँ दा वी साई साई
डिगयाँ दा वी साई साई
दुखिदा वे साई साई
सुखिया दा वी साई साई
सब नू वेखे साई साई
रखदा लेखे साई साई
दुःख दर्द हरे साई साई
इन्साफ करे साई साई
नित ध्यान करो साई साई
गुण गान करो साई साई
एहसास करो साई साई
कुछ ख़ास करो
तेरा शुक्र करा वे साईया
मैं तेरा शुक्र करां...||
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
शिरडी के साईं बाबा को समर्पित यह भजन "तेरा शुक्र करा वे साईया (Tera shukar kara ve saiya Lyrics in Hindi) - Puneet Khurana Sai Bhajan - Bhaktilok" सबका मालिक एक होने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। साईं बाबा का जीवन काल सादगी, प्रेम, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता है। इस भजन की सरल पंक्तियां भक्त को सीधे बाबा के दिव्य आशीर्वाद और करुणा से जोड़ती हैं।
भजन का मुख्य भाव श्रद्धा और सबूरी (धैर्य) का है। साईं बाबा अपने भक्तों को वचन देते हैं कि जो भी उनके द्वार पर आएगा, वह कभी खाली हाथ नहीं जाएगा। बाबा की उदी (भस्म) और उनके वचनों का स्मरण ही इस भजन का सार है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
साईं बाबा के भजनों के संकीर्तन से भक्तों के मन में धर्म-जाति के भेद से ऊपर उठकर प्राणी मात्र के प्रति प्रेम की भावना जागृत होती है। बाबा की पूजा में सादगी और शुद्ध अंतःकरण का विशेष महत्त्व है।
संतों और ऋषियों के आध्यात्मिक इतिहास की गहरी समझ के लिए संत एवं ऋषि ज्ञानकोश अवश्य पढ़ें। साईं बाबा के भजन से पारिवारिक शांति प्राप्त होती है, मन के द्वेष और कलह दूर होते हैं और साधक में संतोष तथा धैर्य का विकास होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
साईं बाबा की आराधना के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से फलदायी है। साईं बाबा की मूर्ति या चित्र के सम्मुख दीप जलाकर, उदी का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक भजन गाएं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
शिरडी साईं बाबा की उपासना के दो मुख्य स्तंभ क्या हैं?
बाबा ने अपने भक्तों को 'श्रद्धा' (विश्वास) और 'सबूरी' (धैर्य) को जीवन का मूल आधार बनाने की शिक्षा दी थी।
साईं भजनों के संकीर्तन के लिए कौन सा दिन उत्तम है?
गुरुवार (गुरु दिवस) का दिन साईं बाबा के पूजन, व्रत और भजन संकीर्तन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
साईं बाबा की 'उदी' का क्या महत्त्व है?
उदी बाबा की धूनी की पवित्र भस्म है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि उदी धारण करने से शारीरिक बीमारियां और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।
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