Parvati Stotram

तेरा दर तो हक़ीकत में दुखियों का सहारा है लिरिक्स (Tera Dar To Haqikat Me Dukhiyo Ka Sahara Hai Lyrics in Hindi) - Gajendra Pratap Singh - Bhaktilok

179 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

दुखियों का सहारा: माँ की महिमा

माँ के दर पर पहुंचकर भक्ति और आस्था के साथ दर्द को मिटाने का यह भजन गाएं।

तेरा दर तो हकीकत में दुखियों का सहारा है दरबार तेरा मैया जन्नत का नजारा है || बिगड़ी हुई तकदीरें माँ पल में बनाती हो अब लाज रखो मैया हम सब ने पुकारा है हम सब ने पुकारा है जो बंदिशे थी ज़माने की वो तोड़ आया हु || आया तेरे दर पे दिवाना आया हो आया आया तेरा दिवाना तेरा दिवाना तेरा दिवाना आया तेरे दर पे दिवाना आया तेरे दर पे दिवाना || जिसने भी पुकारा है माँ दौडी चली आये दरबार तेरा मैया जन्नत का नजारा है जन्नत का नजारा है || तेरे दर के ही टुकडो पर हम सब का गुजारा है तेरा दर तो हकीकत में दुखियों का सहारा है || टूटी हुई कश्ती है बड़ी दूर किनारा है मैया तेरे टुकडो पर हम सब का गुजारा है हम सब का गुजारा है
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के सूत्रों में माँ की महानता और उनके दर का विशेष महत्त्व प्रकट होता है। 'तेरा दर तो हकीकत में दुखियों का सहारा है' बोल में प्रगट है कि माँ का दर वह स्थान है जहाँ हर दुखी व्यक्ति को राहत और सहारा मिलता है। भूले भटके लोग जो मुसीबत में होते हैं, वे माँ के दर पर आते हैं और माँ उनकी बिगड़ी तकदीरें चुटकी में सुधार देती हैं। यह भाव दर्शाता है कि अपनी कठिनाइयों में, यदि कोई प्रार्थना और भक्ति करता है, तो माँ की कृपा से हर समस्या का समाधान हो सकता है। इस दृष्टि से, माँ को साक्षात जन्नत का प्रतीक माना गया है।

इस भजन में भावनाओं की गहराई है, जहाँ भक्ति भाव से उपासक माँ को पुकारता है। 'जिसने भी पुकारा है माँ दौडी चली आये' का अर्थ है कि माँ कभी भी अपने भक्त को अकेला नहीं छोड़ती हैं। जब भक्त माँ के दर पर आता है, तो माँ उनके दर्द और समस्याओं को समझती हैं और तुरंत उनकी सहायता करती हैं। यह व्यक्तिगत अनुभव इस भजन को अत्यधिक प्रभावी बनाता है और चेतना को उच्चतर स्तर पर ले जाता है। भक्तों का विश्वास है कि माँ का दर केवल आस्था का स्थान नहीं, बल्कि आत्मा की शांति का केंद्र है।

इस भजन का आध्यात्मिक गूढ़ार्थ भक्ति मार्ग को दर्शाता है, जिसमें अनन्य विश्वास के साथ माँ की ओर मुड़ जाता है। यह हमें सिखाता है कि भक्ति में भेदभाव नहीं होता, चाहे भक्त किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो। वहाँ कोई स्थिति नहीं है जो माँ की अनुकम्पा से मुक्त हो सके। 'टूटी हुई कश्ती है, बड़ी दूर किनारा है' यह संकेत करता है कि जीवन में कितनी भी कठिनायें क्यों न हो, माँ का दर हर दुख का उपचार है। यह भजन एक ऐसा मार्ग प्रशस्त करता है, जहाँ भक्त खुद को माँ की गोद में सुरक्षित महसूस करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस स्तोत्र का महत्व भारतीय पौराणिक कथाओं में निहित है, जहाँ देवी माता की उपासना को श्रेष्ठतम माना गया है। पुराणों में विद्यमान है कि जब भी पितृ लोक में या धरती पर भक्तों को संकट अनुभव होता है, माँ अपनी करुणा से उन्हें राहत देती हैं। महाभारत और रामायण में भी माँ की करुणा का वर्णन मिलता है, जहाँ भक्तों की रक्षा के लिए माँ स्वयं प्रकट होती हैं। इस भक्ति गीत में यह सन्देश मिलता है कि माँ का दर हर दुख-संकट में उपासकों के लिए सहारा है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जप करने से मानसिक तनाव और नकारात्मकता को दूर करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से इस भजन का गान करने से मन को शांति मिलती है और आत्मा में संतोष का अनुभव होता है। यह भक्ति साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता लाती है और स्थिति को बेहतर बनाने में सहायक होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जप सुबह और शाम के समय करना अत्यंत लाभकारी है। भक्त को चाहिए कि वे ध्यान लगाते समय एक दीया जलाएं और माँ के तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठें। यह महत्वपूर्ण है कि भक्त मानसिक रूप से शुद्ध हों और श्रद्धा पूर्वक माँ के प्रति अपने भाव प्रकट करें। यह सच्चे मन से प्रार्थना करते हुए करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या यह भजन सभी के लिए है?

हाँ, यह भजन सभी व्यक्तियों के लिए है, चाहे उनकी कितनी भी कठिनाई और परेशानी क्यों न हो। माँ का दर सभी के लिए एक सहारा है।

क्या इस भजन को सप्ताह में कितनी बार गाना चाहिए?

इस भजन का जप नियमित रूप से, विशेषकर मंगलवार और शुक्रवार को करना शुभ माना जाता है। इसे दैनिक रूप से गाना भी लाभकारी है।

क्या इस भजन का विशेष समय होता है?

सबसे ideal समय प्रात: और सायं होता है। यह समय माँ की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे श्रेष्ठ होती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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