Hanuman Bhajan

श्री गणेश आरती

127 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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भगवान श्री गणेश, जो 'विघ्नहर्ता' और 'प्रथम पूज्य' के रूप में पूजित हैं, हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य के प्रारंभ में अनिवार्य रूप से स्मरण किए जाते हैं। "श्री गणेश आरती" केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि भक्त का अपने आराध्य के प्रति समर्पण का भाव है। यह आरती गणेश जी के गजमुख, विशाल उदर, और उनकी दिव्य शक्तियों का गुणगान करती है। गणेश जी बुद्धि, ज्ञान, विवेक और समृद्धि के अधिष्ठाता हैं। इस आरती का गायन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। विशेष रूप से बुधवार के दिन और किसी भी नए कार्य के शुभारंभ पर इस आरती का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
मस्तक सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

हार चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

दीनन की लाज राखो, शंभु सुत वारी।
कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस आरती में भक्त भगवान गणेश की महिमा का गान करते हुए कहता है कि हे गणेश, आपकी जय हो। आप माता पार्वती और पिता महादेव के पुत्र हैं। आपके एक दांत (एकदंत) है और आप चार भुजाओं वाले हैं। आपके मस्तक पर सिंदूर सुशोभित है और आप मूषक (चूहे) की सवारी करते हैं।

आरती की अगली पंक्तियों में गणेश जी की कृपा का वर्णन है। भक्त कहता है कि आप अंधे को दृष्टि, कोढ़ी को स्वस्थ काया, बांझ को संतान और निर्धन को धन प्रदान करने वाले हैं। आप भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। आपको हार, फूल और मेवे अर्पित किए जाते हैं। लड्डू का भोग आपको अत्यंत प्रिय है। हे शंभु के पुत्र, आप दीन-दुखियों की लाज रखने वाले हैं। आप हमारी सभी कामनाओं को पूर्ण करें, हम आपके चरणों में नतमस्तक हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

गणेश आरती का मुख्य महत्व 'विघ्न विनाश' है। गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि वे जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को हरने वाले हैं। यह आरती बुद्धि और विवेक की वृद्धि के लिए भी गाई जाती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस आरती को नित्य पूजा के अंत में, विशेषकर बुधवार के दिन, गणेश चतुर्थी पर, या किसी भी शुभ कार्य (जैसे गृह प्रवेश, विवाह, नया व्यापार) के आरंभ में करना चाहिए। आरती करते समय शुद्ध घी का दीपक जलाएं, धूप-दीप दिखाएं और पूरी श्रद्धा के साथ गणेश जी का ध्यान करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस आरती के मुख्य आराध्य भगवान श्री गणेश हैं। गणेश जी भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। वे विद्या के देवता हैं और उन्हें 'विनायक' भी कहा जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
विघ्नहर्ता बाधाओं को दूर करने वाला
एकदंत एक दांत वाले
मूषक चूहा (गणेश जी का वाहन)
शंभु सुत भगवान शिव के पुत्र

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम श्री गणेश आरती
आराध्य देव भगवान श्री गणेश
भाषा हिंदी
मुख्य भाव समर्पण एवं विघ्न विनाश
उपयुक्त अवसर नित्य पूजा, बुधवार, गणेश चतुर्थी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • प्रश्न: गणेश आरती कब करनी चाहिए?
    उत्तर: गणेश आरती नित्य पूजा के अंत में या बुधवार के दिन विशेष रूप से करनी चाहिए।
  • प्रश्न: क्या गणेश आरती से बुद्धि बढ़ती है?
    उत्तर: हाँ, गणेश जी बुद्धि और विवेक के देवता हैं, उनकी स्तुति से मानसिक स्पष्टता और ज्ञान में वृद्धि होती है।
  • प्रश्न: आरती के लिए कौन सा भोग श्रेष्ठ है?
    उत्तर: गणेश जी को मोदक और लड्डू अत्यंत प्रिय हैं।
  • प्रश्न: गणेश जी का वाहन क्या है?
    उत्तर: गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) है।
  • प्रश्न: क्या किसी भी कार्य की शुरुआत में गणेश आरती कर सकते हैं?
    उत्तर: हाँ, गणेश जी प्रथम पूज्य हैं, अतः किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में उनका स्मरण अनिवार्य है।
  • प्रश्न: गणेश जी के माता-पिता कौन हैं?
    उत्तर: भगवान शिव और माता पार्वती।
  • प्रश्न: क्या आरती के समय घंटी बजानी चाहिए?
    उत्तर: हाँ, आरती के समय घंटी और शंख का नाद करना शुभ माना जाता है।
  • प्रश्न: गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' क्यों कहते हैं?
    उत्तर: क्योंकि वे अपने भक्तों के जीवन की सभी बाधाओं को दूर करते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

यह सामग्री गणेश पुराण और पारंपरिक भक्ति साहित्य के आधार पर तैयार की गई है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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