Krishna Bhajan

मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होरी में लिरिक्स (Mero Khoy Gayo Bajuband Rasiya Lyrics in Hindi) - Krishna Bhajan Ram Avtar Sharma - Bhaktilok

173 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
आकार:
कंट्रास्ट:

प्रस्तावना एवं परिचय

भक्ति से भरा नंदनंदन का शृंगार

कृष्ण भक्ति में रंगीनी लीला का यह भजन, मन में आनंद भरने का साधन है।

मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होरी में लिरिक्स (Mero Khoy Gayo Bajuband Rasiya Lyrics in Hindi) - ऊधम ऐसा मचा ब्रज में सब  केसर रंग उमंगन सींचेंचौपद छज्जन छत्तन चौबारे बैठ के केसर पीसें |भर पिचकारी दई पिय को  पीछे से गुपाल गुलाल उलीचेंअरे एक ही संग फुहार पड़ें  सखी वह हुए ऊपर मैं हुई नीचे |ऊपर-नीचे होते-होते हो गया भारी द्वंद ना जाने उस समय मेरा कहाँ खो गया बाजूबन्द हो मेरा हो मेरा हो मेराउधम ऐसो मच्यो बृज में सब केसर उमंग मन सींचेक्यों पद्माकर छज्जन थाकन बैठत छाजत केसर पीसेदे पिचकारी भगी पिय को पछे से गोपाल गुलाल उलीचेएकहि संग वहार पिटे सखी वो भये ऊपर मैं भई नीचेऊपर निचे हे सखी हे गयो भारी बंद ना जाने वा समय कहाँ मेरो खोय गयो बाजूबंद।दै पिचकी भजी भीजी तहां पर पीछे गुपाल गुलाल उलीचे ।एक ही सग यहाँ रपटे सखी ये भए ऊपर वे भई नीचे ।मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होरी में होरी में होरी में होरी में होरी मेंमेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में।बाजूबंद मेरे बड़ो रे मोल कोतो पे बनवाऊँ पुरे तोल को नन्द के परजंदरसिया होरी में मेरो खोय गयोबाजूबंद रसिया होली में।सास लड़ेगी मेरी नंदुल लड़ेगीखसम की सिर पे मार पड़ेगीहे जाय सब रस भंग रसिया होरी मेंमेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में।उधम तेने लाला बहुत मचायोलाज शरम जाने कहाँ धरी आयोमैं तो होय गई तोसे तंग रसिया होरी मेंमेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में।तेरी मेरी प्रीत पुराणी तुमने मोहन नाय पहचानीमोकू ले चल अपने संग रसिया होरी मेंमेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में।मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होरी मेंहोरी में होरी में होरी में होरी मेंमेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में।
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन के माध्यम से भक्त राधा और कृष्ण की होली के पावन अवसर को जीवंत करते हैं। यह कविता मुख्यतः इस बात पर केंद्रित है कि कैसे ब्रज में होली का उत्सव मनाया जाता है, जहाँ भक्त एक-दूसरे पर गुलाल और रंग डालते हैं। "मेरो खोय गयो बाजूबंद" का अर्थ है कि भक्ति के इस उत्सव में भक्त का मन पूर्ण रूप से लीन हो जाता है; ऐसा प्रतीत होता है कि भक्त अपने बाजूबंद (आभूषण) का भी ध्यान नहीं रखता और उसकी भावनाएँ कृष्ण में खो जाती हैं। इस भीड़-भाड़ और प्रेमपूर्ण माहौल में, भक्तों के मन में भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना प्रकट होती है।

भजन में भावनाएँ गहरी हैं, और कृष्ण प्रेम की अपनी विशेषताएँ दर्शाते हैं। भक्त कहता है कि कैसे होली के खेल के दौरान वह खुद को परिधानों और आभूषणों से मुक्त कर देता है। ‘हे सखी!’ के संबोधन से मित्रता का भाव उभरता है, जो इस बात को उजागर करता है कि भक्ति सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक भी है। भक्त का उत्साह और आनंद केवल अपने भीतर नहीं, बल्कि उसके चारों ओर के लोगों में भी बिखर जाता है। जबकि भक्त अलग-अलग अनुभवों में खोता है, यह समझ में आता है कि प्रेम के रंग में सब कुछ भिगो दिया गया है।

इस भजन का एक गहरा धार्मिक और दार्शनिक प्रतीकात्मक अर्थ है। यहां भक्ति मार्ग को दर्शाया गया है, जहां भक्त अपना सब कुछ भगवान को समर्पित कर देता है। इस भजन में इसका साफ संदर्भ मिलाता है कि जैसे आनंद को खोकर, भक्त अपने अस्तित्व के सबसे गहरे बिंदु तक पहुँच जाता है। यह भक्ति मार्ग की विशिष्ट पहचान हैः आत्म-समर्पण और प्रेम का जादू। भक्त की सर्वोच्च स्थिति यह है कि वह अपने स्वार्थों को छोड़कर बस भगवान में डूब जाए।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन ब्रज की लीलाओं और कृष्ण के त्योहारों का प्रतिबिंब है। इस प्रकार के प्रसंगों का उल्लेख भागवत पुराण और जनमाष्टमी की कथा में मिलता है, जहां भगवान कृष्ण और राधा की लीलाएं भगवान के साथ संगम का एहसास कराती हैं। भक्ति में निष्ठा और प्रेम की गहराई यहाँ प्रदर्शित होती है, जिससे भक्त अपने जीवन में आनंद और शांति प्राप्त करता है। इस प्रकार की परंपरा भक्तों के हृदय में भक्ति की अविरल धारा को प्रवाहित करता है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का पाठ मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसे सुनने और गाने से मानसिक तनाव कम होता है, और एक अद्भुत शांति का अनुभव होता है। भक्तों को प्रेम, समर्पण और श्रद्धा से भरी भावनाओं में लिपटा रखता है। नियमित रूप से इस भजन का पाठ करने से व्यक्ति आत्मिक चिंतन में लिप्त रहता है और भगवान के साथ एक गहन संबंध स्थापित कर सकता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह या शाम किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से होली के दौरान किया जाएगा तो अधिक फलों की प्राप्ति होती है। पूजा करते समय घर में दीया जलाना, और भगवान को रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित करना आवश्यक है। ध्यान रखें कि आपके मन में पूरी श्रद्धा और प्रेम हो, क्योंकि यही समर्पण की असली शक्ति है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस बारे में है?

यह भजन, कृष्ण और राधा के प्रेम और होली के त्योहार पर केंद्रित है, जहाँ भक्त अपनी भावनाओं और समर्पण को प्रकट करता है।

इस भजन का क्या महत्व है?

यह भजन भक्तों के लिए श्रद्धा और प्रेम का अनुभव कराता है। यह कृष्ण की लीलाओं का प्रतिबिंब है जो आत्मा को शांति और आनंद प्रदान करता है।

मैं इस भजन का पाठ कब और कैसे करूँ?

इस भजन का पाठ सुबह या शाम किया जा सकता है, खासकर होली पर। पूजा में दीया जलाना और रंगीन पुष्प अर्पित करना उचित रहता है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!