स्कंदमाता की आरती लिरिक्स (Skandamata Ki Aarti Lyrics in Hindi) - Anuradha Paudwal नवरात्रि पांचवे दिन की आरती
शारदीय एवं वासविक नवरात्रि के पावन पर्व के पांचवें दिन भगवती दुर्गा के पंचम स्वरूप, करुणामयी और वात्सल्यमूर्ति मां स्कंदमाता की उपासना का विधान है। स्कंदकुमार (भगवान कार्तिकेय) की माता होने के कारण इन्हें 'स्कंदमाता' के रूप में लोक-विख्यात और पूजित किया गया है। जब भक्त अपनी आत्मीय श्रद्धा और शुद्ध अंतःकरण से देवी के इस परम पावन रूप का स्मरण करते हैं, तब साधक के जीवन में दिव्य ज्ञान, ऐश्वर्य, शांति और परम मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। सुप्रसिद्ध पार्श्वगायिका अनुराधा पौडवाल जी की मधुर वाणी में गाई गई यह आरती भक्तों के मध्य अत्यधिक लोकप्रिय है, जो संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना देती है। इस लेख में हम स्कंदमाता की संपूर्ण आरती, इसके सरल हिंदी अर्थ, पूजा विधि, महत्व और आध्यात्मिक रहस्यों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
जय तेरी हो स्कंदमाता | सम्पूर्ण आरती लिरिक्स
जय तेरी हो स्कंदमाता, पांचवां नाम तुम्हारा आता।
सबकी हो दाता, پنچم रूप तुम्हारा निराला।
सिंहासन पे करो विराजा, तुम्हें सब जग पूजने आता।
शंकराचार्य की माता, सुख-शांति सब को तुम देतीं।
ज्ञानी ध्यानी सब गुण गावें, चरण कमल तेरे शीश नवावें।
भक्तों के संकट हर लेतीं, भवसागर से तुम पार करतीं।
घर-घर में महिमा तुम्हारी गाई, दर्शन पाकर किस्मत चमकाई।
जो भी सच्चे मन से ध्यावे, वह मनवांछित फल पावे।
जय माँ स्कंदमाता, तेरी महिमा अपरम्पार।
आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Aarti Meaning & Bhavarth
स्कंदमाता की यह आरती माता के वात्सल्य और कृपालु स्वभाव का सजीव चित्रण प्रस्तुत करती है। आरती की प्रथम पंक्तियों में भक्त माता के पांचवें स्वरूप की वंदना करते हुए कहता है कि हे मां! आप सम्पूर्ण संसार को चेतना और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। सिंह पर आसीन आपका यह स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और अभय प्रदान करने वाला है। जिस प्रकार एक माता अपने बाल-गोपाल (स्कंद) का पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार आप अपने समस्त भक्तों के संकटों का निवारण करती हैं। जो साधक सच्चे मन से आपकी आराधना करते हैं, उनके जीवन के समस्त कष्ट स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं और उन्हें अलौकिक आनंद की प्राप्ति होती है।
| शब्द / पंक्ति | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| स्कंदमाता | भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता | ज्ञान, शक्ति और वीरता के स्रोत का उद्गम |
| सिंहासन पे करो विराजा | सिंह पर विराजमान होने वाली | पराक्रम और धर्म की रक्षा का प्रतीक |
| भक्तों के संकट हर लेतीं | भक्तों के दुखों का नाश करने वाली | करुणा और वात्सल्य की पराकाष्ठा |
स्कंदमाता के स्वरूप की विशेषता एवं महिमा
देवी स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसीलिए इन्हें 'पद्मासना देवी' भी कहा जाता है। इनकी गोद में उनके बाल रूप में स्कंदकुमार (कार्तिकेय जी) सुशोभित हैं। मां की चार भुजाएं हैं; दाहिनी ऊपर वाली भुजा में भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं, नीचे वाली दाहिनी भुजा में अभय मुद्रा है। बाईं भुजा में कमल का पुष्प तथा नीचे वाली भुजा वरद मुद्रा में है। इनका वर्ण पूर्णतः श्वेत है और यह कमल के पुष्प पर ही आसन ग्रहण करती हैं। इनकी उपासना करने से साधक को सूर्य मंडल के समान तेज और अलौकिक कांति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के विशेष अवसरों पर दुर्गा सप्तशती पाठ और नवरात्रि पांचवें दिन की पूजा का विधान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi
पंचमी तिथि के दिन मां स्कंदमाता की आरती करने से पूर्व पूजा स्थल को भली-भांति स्वच्छ कर लें। मां की प्रतिमा या चित्र के समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। धूप, गंध, अक्षत, पीले पुष्प (विशेषकर कमल या गुलाब), कुमकुम और रोली अर्पित करें। भोग के रूप में केले अथवा मिष्ठान्न का नैवेद्य लगाएं। इसके पश्चात दोनों हाथों में आरती की थाली लेकर, पूरे श्रद्धा भाव से अनुराधा पौडवाल जी के भजनों या पारंपरिक धुनों के साथ आरती गाएं। आरती संपन्न होने के बाद दोनों हथेलियों को दीपक पर रखकर अपनी आंखों और मस्तक पर लगाएं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस क्रम में मां शैलपुत्री आरती और मां ब्रह्मचारिणी स्तोत्र का स्मरण करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
स्कंदमाता पूजन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों के लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। विशुद्ध चक्र (Throat Chakra) की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनकी कृपा से वाणी में मधुरता, ज्ञान की प्राप्ति और एकाग्रता बढ़ती है। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए इनकी साधना विशेष फलदायी होती है।
एक नजर में भजन व आरती की जानकारी | Quick Information
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| देवी का स्वरूप | पंचम दुर्गा - स्कंदमाता |
| लोकप्रिय गायिका | अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) |
| पूजा का दिन | नवरात्रि का पांचवां दिन (पंचमी तिथि) |
| वाहन | सिंह (शेर) |
| प्रिय पुष्प | कमल का पुष्प |
| अधिष्ठाता चक्र | विशुद्ध चक्र |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में दी गई जानकारी पारंपरिक ग्रंथों, धार्मिक मान्यताओं और लोक-परंपराओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को सटीक और प्रामाणिक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ
- दुर्गा सप्तशती एवं पुराण कथाएं
- वैदिक सनातन धर्म संस्कृति और व्रत विधान
- पारंपरिक नवरात्रि आरती संग्रह
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें