Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है (Jis Sukh Ki Chahat Mein Tu Lyrics in Hindi) - Upasana Mehta Krishna Bhajan

जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है भजन के बोल हिंदी में पढ़ें। उपासना मेहता का यह लोकप्रिय कृष्ण भजन मन को शांति देता है।

Upasana Mehta Krishna Bhajan

भक्ति रस से सराबोर यह अत्यंत ही पावन भजन "जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है" (Jis Sukh Ki Chahat Mein Tu Lyrics in Hindi) प्रसिद्ध भजन गायिका उपासना मेहता (Upasana Mehta) की मधुर वाणी में गाया गया एक ऐसा आध्यात्मिक रत्न है जो मनुष्य को भौतिक संसार की नश्वरता और बाह्य दिखावे से मोड़कर भगवान श्री बांके बिहारी एवं श्याम सुंदर के चरणों की ओर आकर्षित करता है। इस भजन का मुख्य भाव (Bhava) परमेश्वर के शरणागत होने, अनश्वर शांति प्राप्त करने और सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने की गहरी लालसा पर आधारित है। कलयुग के इस भागदौड़ भरे जीवन में जहां मनुष्य क्षणिक सुखों की प्राप्ति के लिए दर-दर भटकता है, यह भजन उसे सही दिशा और सच्चे ठिकाने का बोध कराता है। इस लेख में हम इस भजन के सम्पूर्ण गीत (Complete Bhajan Lyrics), सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ, गायन विधि, आध्यात्मिक संदेश और जीवन से जुड़ी सीख पर विस्तार से चर्चा करेंगे। श्री बांके बिहारी की कृपा और राधा कृष्ण भजन (Radha Krishna Bhajan) की इस अनमोल श्रृंखला में यह रचना हर भक्त के हृदय को झकझोर देने और उसे परम शांति का अनुभव कराने में पूर्णतः समर्थ है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थायी (मखड़ा):

जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है,
वो श्याम के मंदिर में दिन रात बरसता है।
जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है... ||

अंतररा 1:

अनमोल है हर पल तेरी जिंदगानी का,
कब अंत हो जाए तेरी कहानी का।
जिस पावन गंगाजल से जीवन ये सुधरता है,
वो श्याम के मंदिर में दिन रात बरसता है।
जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है... ||

अंतररा 2:

जैसे भरा पानी सागर में खारा है,
वैसे भरा दुःख से जीवन हमारा है।
जिस अमृत को पीने को संसार तरसता है,
वो श्याम के मंदिर में दिन रात बरसता है।
जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है... ||

अंतररा 3 (समापन / मड़):

ना कर भरोसा तू ‘सोनू’ दीवाने पर,
तू देख ले जाकर इसके ठिकाने पर।
वो सावन जो धरती की तक़दीर बदलता है,
वो श्याम के मंदिर में दिन रात बरसता है।
जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है... ||

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन मनुष्य के उस आंतरिक संताप और भ्रम को उजागर करता है जिसमें वह सच्ची शांति और सुख की तलाश में संपूर्ण जीवन भौतिक संसार, धन-वैभव और रिश्तों की भागदौड़ में व्यतीत कर देता है। गीतकार और गायिका उपासना मेहता जी हमें यह याद दिलाती हैं कि जिस परमसंचय और आनंद की तलाश में मनुष्य दर-दर भटक रहा है, वह वास्तविक आनंद और शीतलता तो बांके बिहारी श्याम के मंदिर और उनके चरणों की शरण में निरंतर बरस रही है।

प्रथम अंतरा में जीवन की नश्वरता का सुंदर चित्रण किया गया है। मनुष्य की यह जिंदगानी अत्यंत अनमोल है, जिसका कोई भरोसा नहीं कि यह कब समाप्त हो जाए। जिस प्रकार पावन गंगाजल मनुष्य के तन और मन को पवित्र कर उसके जीवन को संवार देता है, ठीक उसी प्रकार बांके बिहारी की कृपा का प्रसाद हर भक्त के जीवन को संताप मुक्त कर देता है। सांसारिक सागर का जल भले ही खारा (दुखों से भरा) प्रतीत होता हो, परंतु श्याम नाम का अमृत ऐसा है जिसके लिए संपूर्ण संसार तरसता है और वह उनके द्वार पर निरंतर उपलब्ध है।

अंतिम चरणों में रचयिता 'सोनू' जी यह संदेश देते हैं कि इस नश्वर संसार और स्वार्थी लोगों पर भरोसा करने के बजाय उस सावन रूपी घनश्याम पर भरोसा करना चाहिए जो इस सूखी धरती (भक्त के हृदय) की तकदीर को पल भर में बदल देता है। यह भजन केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीव को परमात्मा से जोड़ने का एक दिव्य सेतु है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी और सीधा संवाद है। यह सीधे मनुष्य के अंतर्मन को छूता है। राधा कृष्ण भजन परंपरा में इस प्रकार के दार्शनिक भजनों का अत्यधिक महत्व है जो वैराग्य और भक्ति का अनूठा समन्वय प्रस्तुत करते हैं। इसे सुनकर भक्तों को मानसिक शांति, आंतरिक संबल और भगवान के प्रति अगाध प्रेम की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को प्रातः काल की ब्रह्ममुहूर्त बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा किसी भी सत्संग और एकांत साधना के दौरान गाया या सुना जा सकता है। इसे गाते समय मन में भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। यदि आप कृष्ण भजन के नियमित श्रोता हैं, तो इस भजन को अपनी दैनिक प्रार्थना सूची में अवश्य शामिल करें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के आराध्य भगवान श्री कृष्ण, श्री बांके बिहारी और खाटू श्याम जी हैं। भजन में उपासना मेहता ने अपनी सुमधुर आवाज से इस भक्ति रस को जीवंत किया है, जो वर्तमान समय की एक अत्यंत लोकप्रिय और प्रतिष्ठित भजन गायिका हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

इस सुंदर भजन के रचनाकार 'सोनू' जी हैं, जिन्होंने अत्यंत सरल शब्दों में वेदों और संतों के उस मूल संदेश को पिरोया है जिसमें संसार की असारता और ईश्वर की शरणागति का वर्णन है। उपासना मेहता द्वारा इसे स्वरबद्ध किए जाने के बाद से यह घर-घर में लोकप्रिय हो चुका है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

भजन की भाषा बेहद सरल, सुबोध और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें ब्रज और अवधी का हल्का सा प्रभाव भी देखने को मिलता है। काव्य शैली रूपक और उपमा अलंकारों से परिपूर्ण है, जैसे 'सागर में खारा पानी' और 'सावन जो धरती की तकदीर बदलता है'।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

1. भौतिक सुखों की चाहत में भटकना व्यर्थ है, वास्तविक सुख भगवान की भक्ति में है।
2. जीवन नश्वर है, इसलिए इसका सदुपयोग प्रभु स्मरण में करना चाहिए।
3. मनुष्य को स्वार्थी दुनिया के बजाय केवल परमात्मा की शरण पर भरोसा रखना चाहिए।
4. भगवद कृपा किसी पावन गंगाजल और अमृत से कम नहीं है।

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
जि जिंदगानी जीवन / आयु मानव जन्म का दुर्लभ अवसर
गंगाजल पवित्र जल भगवत कृपा और पवित्र विचार
खारा पानी नमकीन या दुःखद अनुभव भौतिक संसार के कष्ट और मोह
अमृत अमरता प्रदान करने वाला रस श्री कृष्ण का प्रेम और नाम स्मरण
ठिकाना आश्रय स्थल भगवान श्री कृष्ण के चरण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है..."
अर्थात हे मनुष्य! तू जिस सुख, शांति और आनंद को पाने के लिए जगह-जगह भटक रहा है, वह बाहर नहीं बल्कि भीतर और भगवान के दरबार में प्रचुर मात्रा में है।

"अनमोल है हर पल तेरी जिंदगानी का..."
अर्थात यह जीवन अत्यंत बहुमूल्य है। सांसारिक माया-मोह में इसे व्यर्थ न गंवाओ क्योंकि समय बहुत तेजी से बीत रहा है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के भाव को पुष्ट करने वाला श्रीमद्भगवद्गीता का यह श्लोक स्मरण योग्य है:

"मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमुरु।
मामेवैष्यसि सत्यं ते प्रतिजाने प्रियोऽसि मे॥"

(अर्थात: मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरा पूजन करो और मुझे नमस्कार करो। तुम मुझको ही प्राप्त होगे, यह मैं तुमसे सत्य प्रतिज्ञा करता हूँ, क्योंकि तुम मेरे अत्यंत प्रिय हो।)

श्रेणी विवरण
भजन का नाम जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है
गायिका उपासना मेहता (Upasana Mehta)
गीतकार सोनू जी
भाषा सरल हिंदी / ब्रज भाव
विषय / थीम भक्ति, वैराग्य, शरणागति और शांति
भाव (Bhava) समर्पण, विनय और करुणा
उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, सत्संग, एकांत साधना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

"जिस सुख की चाहत में तू दर दर को भटकता है" भजन की गायिका कौन हैं?

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध भजन गायिका उपासना मेहता (Upasana Mehta) ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

इस भजन के रचयिता कौन हैं?

इस भजन के गीतकार 'सोनू' जी हैं, जिन्होंने इसके सुंदर शब्दों की रचना की है।

इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को भौतिक सुखों की तलाश में भटकने के बजाय भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाना चाहिए, जहाँ वास्तविक शांति और आनंद निरंतर बरसता है।

क्या यह भजन राधा-कृष्ण भजन श्रेणी में आता है?

हाँ, यह भजन श्री कृष्ण और श्याम सुंदर की आराधना से जुड़ा हुआ है, अतः इसे राधा कृष्ण स्टेटस और भजनों में बहुत पसंद किया जाता है।

इस भजन को सुनने से क्या लाभ मिलता है?

इसे सुनने से मन को असीम शांति मिलती है, सांसारिक तनाव कम होता है और भगवान के प्रति भक्ति भावढ़ होता है।

इस भजन को किस समय सुनना सबसे अच्छा होता है?

इसे प्रातः काल पूजा के समय या संध्या वंदन के दौरान सुनना अत्यंत आनंददायक और शांतिप्रद होता है।

क्या इस भजन के बोल आसानी से याद किए जा सकते हैं?

हाँ, इसकी लय और शब्दावली इतनी सरल है कि कोई भी भक्त इसे बहुत कम समय में याद कर सकता है।

इस भजन को किन वाद्य यंत्रों के साथ गाया जा सकता है?

इसे हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा और फ्लूट (बांसुरी) के साथ बहुत ही सुंदर ढंग से गाया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ताें की आध्यात्मिक पिपासा को शांत करने और प्रामाणिक भक्ति साहित्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सभी बोल और अर्थ पारंपरिक संदर्भों पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत इस लेख की भाषा, व्याकरण और भाव पक्ष की गहन समीक्षा की गई है ताकि पाठकों को उत्तम अनुभव मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

1. श्रीमद्भगवद्गीता - भक्ति योग अध्याय
2. पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन परंपरा
3. उपासना मेहता आधिकारिक संगीत एलबम एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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