Ram Bhajan

हे लंकेश सुन राम का संदेश लिरिक्स (Hey lankesh sun ram ka sandesh Lyrics in Hindi) - Ravindra Khare Ram Bhajan - Bhaktilok

60 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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प्रस्तावना एवं परिचय

लंकेश को राम का प्रेम संदेश

यह भजन लंकेश रावण को राम के सन्देश के माध्यम से भक्ति और समर्पण का पाठ पढ़ाता है।

हे लंकेश सुन संदेशमैं हु वाली पुत्र अंगदआया रामदूत बनकरअपनी मतिभष्ट मतकरसीता को मुक्ति देकरझुकजा रामशरण में आकरहे लंकेश सुन संदेशहोगा वही जो राम ने चाहाचिता मनन व्यथा कर स्वाहामंगल भवन अमंगल हारीजय श्री राम बिष्णु अवतारी....||तू धनुष न तोड़ पायाकेबल राम ने तोड़ पायासीता संग व्याह रचायाफिर गुस्सा तुझको आयासूर्पनखा के कहने परसीता को लिया तूने हरसीता को मुक्ति दे करझुकजा रामशरण में आकरलंकेश सुन संदेशहोगा वही जो राम ने चाहाचिता मनन व्यथा कर स्वाहामंगल भवन अमंगल हारीजय श्री राम बिष्णु अवतारी....||तू रावण निर्दयी अभिमानीतूने किसी की बात न मानीसीता मैया है भवानीतूने माया राम न जानीतूम हो सबसे विद्या धरतू इतनी भी न हट करसीता को मुक्ति दे करझुकजा रामशरण में आकरलंकेश सुन संदेश....||
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन का मुख्य विषय लंकेश रावण को राम के संदेश का प्रचार करना है। यह संदेश विशेषकर अंगद द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, जो राम का दूत बनकर रावण की ओर आता है। यहाँ रावण की स्थिति पर प्रकाश डाला गया है, जहाँ उसकी अहंकारिता और क्रूरता का उल्लेख है। 'मैं हु वाली पुत्र अंगद' से यह स्पष्ट होता है कि अंगद, जो कि राम के भिक्षु का रूप है, रावण के अहंकार को चिरस्थायीकरण करने के लिए आया है। वहीं, 'सीता को मुक्ति देकर' पंक्ति यह संदेश देती है कि रावण को अपनी हार माननी होगी और राम के शरण में आना होगा। भजन के 'मंगल भवन अमंगल हारी' शब्द यह इंगित करते हैं कि राम की उपस्थिति में सभी संकट समाप्त हो जाते हैं और जीवन में मंगलकारी ऊर्जा का संचार होता है।

भजन में भावात्मक रूप से रावण की स्थिति को भी उजागर किया गया है। वह 'निर्दयी अभिमानी' है, जिसने सीता को हरने की व्हीष्या अपनी इच्छाओं पर वृत्ति की है। 'तू धनुष न तोड़ पाए', यह रावण के दुर्गुणों और उस पर प्रभु राम की व्यापक शक्ति का संकेत देता है। यह यथार्थ रावण को उसके कार्यों के प्रति जागरूक करने का प्रयास करता है और उदात्तता की ओर उसका मार्ग प्रशस्त करता है। अंत में, 'झुक जा रामशरण में आकर' का संदेश दिखाता है कि भक्ति और समर्पण ही परम सत्य है। इस भजन के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किसी भी देवता की कृपा केवल श्रद्धा और समर्पण के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।

इस भजन में भक्ति मार्ग की गहन व्याख्या की गई है। इसका अर्थ है कि भक्त पहचानता है कि रावण की शक्ति राम के आगे कुछ नहीं है। रावण ने भले ही असाधारण विद्या प्राप्त की हो, लेकिन इसका उपयोग यदि धर्म की सेवा में न किया जाए तो यह व्यर्थ है। भक्ति मार्ग का हिस्सा है शरणागति, जिसका संकेत धार्मिक ग्रंथों में बार-बार मिलता है। भजन में 'सीता को मुक्ति दे कर' पंक्ति यह दर्शाती है कि केवल राम की शरण में आने से न केवल मुक्ति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन की कठिनाइयों का समाधान भी होता है। भक्ति और प्रेम के साथ श्रीराम की कृपा का विश्वास हर भक्त को करना चाहिए ताकि वह अंत में सही मार्ग पर चल सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

यह भजन रामायण के कथानक के माध्यम से रावण के अहंकार और बुराई के अंत की याद दिलाता है। रामायण में रावण को एक शक्तिशाली राक्षस के रूप में चित्रित किया गया है, जिसने सीता का अपहरण किया था। इस भजन में अंगद का राम का दूत बनकर रावण को सन्देश देने का प्रसंग, रामायण के तात्त्विक महत्त्व को स्पष्ट करता है। यहाँ भक्ति के माध्यम से जीने, ध्यान लगाने, और देवता के प्रति समर्पण का गुणगान किया गया है। यह बताता है कि जब बुराई के समक्ष भक्ति के सामर्थ्य का उपयोग किया जाता है, तब विजय सुनिश्चित होती है।

प्रभु श्री राम के आदर्शों और मर्यादा पुरुषोत्तम के सम्पूर्ण चरित्र का रसास्वादन करने के लिए रामायण महाग्रंथ अन्वेषक का उपयोग करें। इस भजन का जाप मन में शांति और संतोष लाने में सहायक होता है। यह मानसिक तनाव को कम करता है और भक्ति भाव को प्रगाढ़ करता है। यह ध्यान रहित अवस्था में भी आत्मा को शांति प्रदान करता है और भक्त के मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नियमित रूप से इसे गाने से व्यक्ति के जीवन में राम के प्रति अधिक समर्पण विकसित होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय या संध्या के समय किया जा सकता है। भक्ति में डूबने के लिए एक शांत स्थान पर बैठकर दीप जलाना एवं फूलों का भोग अर्पित करना शुभ रहता है। जाप करते समय मन में राम के प्रति भक्ति भावना रखते हुए ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सही आसन में बैठकर मन की शांति बनाए रखना इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किसकी पूजा के लिए है?

यह भजन भगवान राम के प्रति भक्ति को व्यक्त करने के लिए है, जो रावण के प्रति संदेश रोपित करता है।

इस भजन के माध्यम से क्या सन्देश मिलता है?

इस भजन द्वारा यह सन्देश मिलता है कि भक्ति से ही मुक्ति संभव है और रावण जैसे अहंकारी को भी राम की शरण में आना चाहिए।

क्या यह भजन सुनने से कोई विशेष लाभ होता है?

हाँ, यह भजन मानसिक शांति, सकारात्मकता और भक्ति के भाव को विकसित करने में मदद करता है, जिससे व्यक्ति का जीवन परिवर्तित हो सकता है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 24 Sep 2026

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