gurudev Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना लिरिक्स (Mai Sharan Pada Teri Charno Me Jagah Dena Lyrics in Hindi) - Guru Bhajan Guru Vandana

गुरु की चरणों में समर्पित इस भजन के माध्यम से भक्ति का अनमोल अनुभव प्राप्त करें और जीवन में शांति पाएँ।

प्रस्तावना एवं परिचय

गुरु कृपा की ओर हमारा आत्म समर्पण

इस भजन के माध्यम से हम गुरुदेव की शरण में जा रहे हैं, मन की सभी दुखों और संकोचों को छोड़कर।

मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना लिरिक्स (Mai Sharan Pada Teri Charno Me Jagah Dena Lyrics in Hindi) - Guru Bhajan Guru Vandana - मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना। गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना। करूणानिधि नाम तेरा करुन दिखलाओ तुम। सोये हुए भाग्यो को हे नाथ जगाओ तुम। मेरी नाव भवर डोले इसे पार लगा देना। गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥ जय Gurudeva जय Gurudeva। जय Gurudeva जय Gurudeva॥ तुम सुख के सागर हो निर्धन के सहारे हो। इस तन में समाए हो मुझे प्राणों से प्यारे हो। नित्त माला जपूँ तेरी नहीं दिल से भुला देना। गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥ पापी हूँ या कपटी हूँ जैसा भी हूँ तेरा हूँ। घर बार छोड़ कर मैं जीवन से खेला हूँ। दुःख का मार हूँ मैं मेरा दुखड़ा मिटा देना। गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥ मैं सब का सेवक हूँ तेरे चरणों का चेरा हूँ। नहीं नाथ भुलाना मुझे इसे जग में अकेला हूँ। तेरे दर का भिखारी हूँ मेरे दोष मिटा देना। गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना॥ इन चरनन की पाऊं सेवा। जय Gurudeva जय Gurudeva।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में भक्त ने सर्वस्व समर्पण की भावना को व्यक्त किया है। 'मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना' पंक्ति में यह संकेत है कि वह अपने गुरु की शरण चाहते हैं, जो उनके लिए शांति और सुख का स्रोत हैं। जब भक्त कहता है 'गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना', तो वह गुरु की सहानुभूति और करुणा की ओर इशारा कर रहा है। इस भक्ति में, भक्त अपने कष्टों और दुखों का उल्‍लेख करता है, 'मैं सब का सेवक हूँ तेरे चरणों का चेरा हूँ', जो उस भक्ति भाव को दर्शाता है कि भक्त गुरु के मार्ग पर चलने के लिए तत्पर है।

भजन में जो भावनाएँ व्यक्त की गई हैं, वे भक्त की अंतर्निहित अधीरता और आंतरिक संघर्षों का परिचायक हैं। 'पापी हूँ या कपटी हूँ जैसा भी हूँ तेरा हूँ' में, भक्त अपने स्वयं को बिना किसी लज्जा के प्रकट करते हुए गुरु की अनुकंपा की याचना करते हैं। इस भाव में ऐसा लगता है कि भक्त अपने जीवन के सभी द्वंद्वों को गुरु के सामने रखकर एक नए सिरे से शुरू करने की कामना कर रहा है। गुरु के चरणों में समर्पण करने से उसे नई ऊर्जा मिलती है, जिससे उसकी जीवन की नाव भवर में फँसने के बजाय पार लक्षित करने में सफल हो सके।

भक्ति मार्ग का केंद्र गुरु भक्ति है। इस भजन में भक्त गहिराई से समझता है कि ज्ञान और मोक्ष प्राप्ति के लिए गुरु का आशीर्वाद अनिवार्य है। गुरु के चरणों में शरण लेना केवल शारीरिक या मानसिक राहत नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का माध्यम भी है। इस शुद्धि से भक्त अपना जीवन उन मूल्यों पर आधारित कर सकता है जो उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं। गुरु की शरण में जाने का अर्थ जीवन की सभी समस्याओं का सामना करने के लिए एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण चुनना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

इस भजन का महत्व शास्त्रीय और पौराणिक संदर्भों में निहित है। गुरु की महिमा का वर्णन कई पुराणों में मिलता है, जैसे कि भागवत पुराण में। गुरु को ‘प्रभुमय’ माना गया है और उनके आशीर्वाद से भक्त को सभी कठिनाइयों से राहत मिलती है। रामायण में भी भगवान राम को गुरु वंश में मान्यता प्राप्त है, जिसमें गुरु की भूमिका को केंद्रित किया गया है। इस भजन के माध्यम से भक्त उन सभी पहलुओं को समाहित करता है जो गुरु की कृपा की आवश्यकता को दर्शाते हैं। इसके अलावा, भक्ति साहित्यों में भी गुरु की महिमा का बखान सदैव किया गया है, जिससे यह समझ में आता है कि गुरु का आशीर्वाद भक्त की भक्ति को पूर्ण बनाता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का जाप करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और आंतरिक शक्ति का अनुभव होता है। नियमित रूप से इस भजन का जप करने से भक्त की नकारात्मक सोच में कमी आती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में यह भजन सहायक होता है, जिससे जीवन में सुख-शांति का अनुभव होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह के समय सूर्योदय के बाद या शाम के समय कीर्तन में किया जा सकता है। पूजा करते समय एक दीप जलाना और फूल चढ़ाना उचित होगा। भक्त को ध्यान केन्द्रित करते हुए और ध्यान में गहराई से उतरते हुए नम्रता से भजन का गान करना चाहिए। मन में सदैव गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव रखें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यह भजन किस प्रकार की कृपा को दर्शाता है?

यह भजन गुरु की कृपा और करुणा को दर्शाता है, जहां भक्त उनके चरणों में शरण जाकर हर दुख का निवारण चाहता है।

क्या इस भजन का कोई विशेष समय है जपने के लिए?

हां, इस भजन का जप सुबह सूर्योदय से पहले या शाम कीर्तन में किया जाना विशेष रूप से फलदायी है।

इस भजन का गान करने से हमें क्या लाभ होता है?

इस भजन का गान करने से मानसिक शांति, आत्मिक संतोष और नकारात्मक सोच में कमी आती है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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